आयुर्वेद आशीर्वाद : नारियल की जटा से पाइल्स का इलाज

हमारे आयुर्वेद के आशीर्वाद से ऐसी कोई बीमारी नहीं जिसका इलाज संभव ना हो. कितने ही नुस्खे हिन्दुस्तान के मंदिरों और मठों में साधु संन्यासियों द्वारा आजमाए हुए हैं. इन पर शोध किया जाना आवश्यक है. फूल, पत्ती, फल, जड़, तना तो उपयोग में आता ही है. आज हम एक ऐसी वस्तु के बारे में बता रहे हैं जिसको खाते से ही खूनी बवासीर एक दिन में ही ठीक हो जाते हैं.

श्रीफल यानि नारियल की जटा. यह रामबाण से कम नहीं है. इस प्रयोग से पुरानी से पुरानी बवासीर 1 से 3 दिन में सही हो जाएगी. इस इलाज से एक दिन में ही रक्तस्राव बंद हो जाता है. बड़ा सस्ता व सरल उपाय है. एक बार इसको ज़रूर आजमाएँ. आइये जाने ये प्रयोग.

नारियल की जटा से करें खूनी बवासीर का इलाज

कहते हैं पाइल्स खानपान की गड़बड़ के अलावा उनको होता है जिनके अन्दर कुंठा का पहाड़ हो. मन जितना सरल और विराट रखेंगे इस बीमारी से दूर रहेंगे. स्वस्थ मन से ही स्वस्थ देह के द्वार खुलते हैं. इसलिए ध्यान को सनातन परंपरा में इतना अधिक महत्व दिया गया है.

फिर भी यदि आप इस पीड़ादायक बीमारी के शिकार हो गए हैं तो चलिए आपको एक सबसे कारगर उपाय बताते हैं. नारियल की जटा लीजिए. उसे माचिस से जला दीजिए. जलकर भस्म बन जाएगी. इस भस्म को शीशी में भर कर ऱख लीजिए.

कप डेढ़ कप छाछ या दही के साथ नारियल की जटा से बनी भस्म तीन ग्राम खाली पेट दिन में तीन बार सिर्फ एक ही दिन लेनी है. ध्यान रहे दही या छाछ ताजी हो खट्टी न हो. कैसी और कितनी ही पुरानी पाइल्स की बीमारी क्यों न हो, एक दिन में ही ठीक हो जाती है.

यह नुस्खा किसी भी प्रकार के रक्तस्राव को रोकने में कारगर है. महिलाओं के मासिक धर्म में अधिक रक्तस्राव या श्वेत प्रदर की बीमारी में भी कारगर है. हैजा, वमन या हिचकी रोग में यह भस्म एक घूँट पानी के साथ लेनी चाहिए.

दवा लेने के एक घंटा पहले और एक घंटा बाद तक कुछ न खाएं. अगर रोग ज्यादा जीर्ण हो और एक दिन दवा लेने से लाभ न हो तो दो या तीन दिन लेकर देखिए.

विशेष

1. बवासीर से बचने के लिए गुदा को गर्म पानी से न धोएं. खासकर जब तेज गर्मियों के मौसम में छत की टंकियों व नलों से बहुत गर्म पानी आता है तब गुदा को उस गर्म पानी से धोने से बचना चाहिए.
2. एक बार बवासीर ठीक हो जाने के बाद बदपरहेजी ( जैसे अत्यधिक मिर्च-मसाले, गरिष्ठ और उत्तेजक पदार्थो का सेवन ) के कारण उसके दुबारा होने की संभावना रहती है. अत: बवासीर के रोगी के लिए बदपरहेजी परम आवश्यक है.

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