125 करोड़ लोगों के इस देश में कुछ लोगों को तो करने ही पड़ेंगे ये काम

कोई मोहम्मद सिराज हैं. किरकिट के पिलियर हैं. उनका T20 टीम में चयन हुआ बतावें. उनके अब्बू ऑटो रिक्शा चलाते थे.

यनडीTV बता रहा है कि अब लौंडा सफल हो गया है… बड़ा आदमी बन गया है… इसलिए यनडीTV बता रहा है कि मोहम्मद सिराज के अब्बू अब ऑटो रिक्शा चलाने जैसा छोटा, घटिया और घृणित काम नहीं करेंगे.

लौंडा सफल हो जाये तो दुनिया के हर बाप को रिटायरमेंट लेने का हक़ है… पर बेटे की सफलता के नशे में उस व्यवसाय को छोटा, हीन, शर्मनाक क्यों बताया जाता है?

एक बार जब कि कलकत्ते में Hackney Rickshaw पर Ban लगा दिया गया तो मेरी धर्म पत्नी ने उसे उचित बताया. Cycle Rickshaw में puller cycling करके सवारी ढोता है, उधर Hackney Rickshaw में रिक्शा चालक पैदल चलते दौड़ते सवारी खींचता है.

बंगाल सरकार ने इसे अमानवीय मानते हुए कलकत्ते में प्रतिबंधित कर दिया. मैंने अपनी धर्मपत्नी से पूछा कि एक आदमी रिक्शा खींच के 1000 रु रोज़ाना कमा ले, अपने बच्चों का पेट पाल ले वो अमानवीय है?

और एक MA, MSc, BEd किये हुए, MCA और BTech, MTech पढ़े युवा को सिर्फ 7000 या 10,000 रुपल्ली महिन्ना (300 रुपल्ली रोज़ाना की दिहाड़ी) दे के स्कूल में पढ़वाना अमानवीय है कि नही?

रिक्शा या Auto Rikshaw चला के 30,000 रु कमा लेना अमानवीय और शर्मनाक है? और MA, MSc, PhD करके घर बैठना, बेरोज़गार घूमना या किसी के पास 5000 रूपए की नौकरी करना बहुत सम्मानजनक है?

दोनो में अंतर क्या है? सिर्फ यही न कि एक Blue Collar Job है और दूसरा White Collar?

आज हिंदुस्तान का हर हुनरमंद / कारीगर / श्रमिक 1000 या 2000 रु रोज़ाना कमा रहा है फिर भी उसकी गिनती Middle Class में नहीं होती…

यनडीTV जैसे हमारे मीडिया वाले उसको और उसके परिवार को और पूरे समाज को ये अहसास कराते हैं कि Auto Rikshaw चला के या ऐसा कोई भी Blue Collar job करके वो बहुत छोटा काम कर रहे हैं, उन्हें हीनता का अहसास कराते हैं, हमेशा छोटेपन का अहसास कराते हैं?

इसलिए जैसे ही लड़का सफल हुआ, बाप को वो ‘छोटा काम’ जिस से आज तक घर का चूल्हा जलता था और परिवार पलता था… छोड़ देना चाहिए.

भगवान करे कि हिंदुस्तान का हर बच्चा मोहम्मद सिराज की तरह सफल हो जाये, तो फिर सब लोग ये तमाम छोटे, शर्मनाक, घृणित काम छोड़ देंगे…

फिर इस देश मे कोई रिक्शा या auto rikshaw, या Taxi नहीं चलाएगा, कोई Plumber या Electrician, या कपड़े काले करके Car मैकेनिक जैसा घृणित काम नहीं करेगा, कोई जूते नहीं बनाएगा, कोई कूड़े का truck नहीं चलाएगा…

कोई रेस्त्रां में खाना नहीं पकाएगा, झाडू पोंछा नहीं करेगा, जूठे बर्तन नहीं उठाएगा, अस्पतालों में सफाईकर्मी न होंगे… कोई खेत में काम नहीं करेगा. Dairy Farms में गाय का गोबर यूँ ही पड़ा रहेगा, कोई उसे उठाने का काम नहीं करेगा…

125 करोड़ लोगों के इस देश में कुछ लोगों को तो ये काम करने ही पड़ेंगे. इसलिए हमें अपने समाज में श्रम और श्रमिक के प्रति सम्मान का भाव पैदा करने की ज़रूरत है.

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