यादों के झरोखे से : गुरु माँ गिरजा देवी जी को श्रद्धांजलि देती लोकगायिका मालिनी अवस्थी

मेरी माँ की हार्दिक अभिलाषा थी, कि मैं श्रद्धेया गिरिजा देवी जी से सीखूं..
सात बरस की बालअवस्था में, उन्होंने ही अप्पा जी की गायकी से मेरा परिचय कराया. इस बीच अप्पा से भेंट होती रही लेकिन सौभाग्य आज से अठारह वर्ष पूर्व 1998 में मिल पाया जब उन्होंने मुझे अपनी शरण में लिया.

जब 2006 में बनारस में अप्पा जी ने मुझे गंडा बाँधा तो मेरी माँ की आँखों में संतोष था, सब उनके सामने हुआ था क्यूंकि वे अपने जीवन के अंतिम दिन जी रही थीं.
माँ के जाने के बाद अप्पा ही हमारी माँ हैं, सबकुछ हैं.

**********************************

माँ विंध्यवासिनी से मेरा माँ और पुत्री का सम्बन्ध है. कन्नौज में जन्म हुआ और पिता जी का स्थानांतरण कानपुर से मिर्ज़ापुर हो गया. मैने होश संभाला मिर्ज़ापुर में. माँ के प्रांगण में मेरा मुंडन हुआ और उसी परंपरा को निभाते हुए कालांतर में, हमारी बिटिया का मुंडन भी माँ के चरणों में ही हुआ.

यहीं माँ विन्ध्याचल के प्रांगण में अपनी गुरु माँ श्रद्धेया गिरजा देवी जी को चार बरस की उमर से कजरी महोत्सव में गाते देखा. गुदई महाराज साथ बजा रहे थे. बाद में प्रति वर्ष अप्पा जी को माँ के दरबार में सुनती रही. माँ विंध्यवासिनी ने मन की बात समझी और कई वर्षों बाद, मुझे गुरु को सौंप दिया.

पिताजी और मम्मी की माँ पर अद्भुत आस्था थी. मंदिर आना हम सबका नियम सा था. मंदिर को जाने वाले सड़क में दुकानों में सजे लाल नारंगी सिन्दूर के टीले बहुत उत्सुकता जगाते. चीनी मिट्टी के खिलौने तो कभी, तो कभी खिलौने वाला पानी का स्टीमर दिला माँ बहला देती.

माँ विन्ध्याचल में बड़े बड़े नगाड़ों में सदा मंगल ध्वनि निकलती रहती. माँ की नथ और बड़ी बड़ी कजरारी आँखों की ओर देखते ही नैन स्वतः बंद हो जाते. कहीं भी किसी कोने में रहूं, माँ विंध्यवासिनी के पास वर्ष में एक बार मैं पहुँच ही जाती हूँ.

कल माँ के प्रांगण में देवी गीत पचरा, झूला कजरी और विशेषकर मिर्जापुरी कजरी सुनाने का सौभाग्य मिला, सुनाया क्या, हर सुर लगा कर उनका आशीर्वाद लेती रही, उनके प्रति कृतज्ञता को सुरों में पिरो कर गाती रही.

कल मम्मी की बेइंतिहा याद आई. लेकिन मुझे मालूम है, वे भी सुन रही थी मुझे गंगा मइया की तरह.. मौन, संतुष्ट, आशीर्वाद देती हुई.

(माँ और गुरु माँ को याद करते हुए लोक गायिका मालिनी अवस्थी की पिछले वर्ष की पोस्ट श्रद्धांजलि स्वरूप)

भारत की प्रसिद्ध ठुमरी गायिका गिरजा देवी का कोलकाता में निधन हो गया. वह 88 वर्ष की थी. गिरिजा देवी (जन्म 8 मई 1929, बनारस) सेनिया और बनारस घरानों की एक प्रसिद्ध भारतीय शास्त्रीय गायिका थीं. ठुमरी गायन को लोकप्रिय बनाने में गिरजा देवी का बहुत बड़ा योगदान है. गिरिजा देवी को सन 2016 में पद्म विभूषण एवं 1981 में भारत सरकार द्वारा कला के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान के लिए पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था.

पद्मविभूषण गिरिजा देवी का निधन कोलकाता के बिड़ला अस्पताल में रात करीब साढ़े नौ बजे हो गया.

उनमें सरस्वती बसती थी : मालिनी अवस्थी

मेरी उनसे दीवाली को बात हुई थी. उनका अगले 2 माह का कार्यक्रम था. 27 को पूना में उनका कार्यक्रम था. बनारस उनके तन मन, वाणी और कर्म में बसता था. वो हमेशा कहती थी कि बनारस की इस कला को जिंदा रखो. नई पीढ़ी के लिए वह एक जीती जागती मिसाल है. कला की वह शानदार साधक थी. उनका संगीत अद्भुत था वह किसी ईश्वरीय जादू की तरह था. 90 साल की उम्र में भी वह उत्साही थी.

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY