चोर, स्वार्थी, बदनीयत और अनुशासनहीन लोगों का जमावड़ा है भारत का समाज

भारत का समाज

भारत का समाज क्या है, कैसा है इस बारे में पिछले चार दिनों में कुछ खबरें सुनने को मिलीं… इन्हें पढ़कर सहज अनुमान लगाया जा सकता है कि हमारा नेतृत्व कैसा भी हो, जिस प्रकार हम ढल चुके हैं अब आसानी से नहीं बदलने वाले. भारत का समाज ही नए भारत के निर्माण में सबसे बड़ा बाधक है, इसी सच्चाई से रूबरू कराती हैं ये चार खबरें.

1. प्रतापगढ़ से दिल्ली वाया लखनऊ जाने वाली ट्रेन पद्मावत एक्सप्रेस जो समय से चल रही थी, उसको लखनऊ के आउटर पर 2 घंटे लेट किया गया। ये ट्रेन 2 नंबर प्लेटफार्म पर आनी थी लेकिन उसको 6 नंबर पर लेने की घोषणा हुई।

दिवाली की छुट्टियों के बाद खचाखच भरे प्लेटफार्म पर लोगों को नरक भोगना पड़ा। लोगों को घंटों लग गए प्लेटफार्म बदलने में। भगवान की कृपा रही कि कोई भगदड़ नहीं हुई।

ये सब हुआ किसी केंद्रीय मंत्री के OSD की चमचागिरी में। रेलवे अधिकारीयों ने OSD के लिए तेल लगाई की सारी हदें पार कर दी और एक परिवार के लिए 2500 लोगों को परेशान किया और बड़ा खतरा मोल लिया.

OSD को सपरिवार दिल्ली जाना था, टिकट नहीं था तो आदेश हुआ कि ट्रेन में एक बोगी जोड़ी जाए। जीएम से लेकर गैंगमैन सब लग गए इन OSD की तेल लगाईं में। एक परिवार के लिए नए 2 AC डब्बों को तैयार किया गया। ट्रेन लेट की गयी और यात्रियों को बहकाने के लिए प्लेटफार्म परिवर्तन किया गया.

मतलब ये हुआ कि इस देश से राजा – रियासतों, सामंतवादियों और उनके चेलों की आम जनता को कीड़े मकोड़े समझने वालों की मानसिकता नहीं गई और ये महाभ्रष्ट लोग हैं.

2. एक व्यक्ति ने मारुती सुज़ुकी की नई गाड़ी खरीदी और कुछ समय बाद पहली फ्री सर्विस के लिए देकर आ गया। उसने गाड़ी में कैमरा लगाया हुआ था जिससे पता चला कि सर्विस सेंटर ने कोई सर्विस नहीं की। गाड़ी को धो पोछ के सर्विस हुई बता के पकड़ा दिया. इससे पता चलता कि इस देश के हर तरफ चोरी और बेईमानी फैली हुई है, कोई सेक्टर अछूता नहीं है. मौका लगा नहीं कि सब एक दूसरे को ठगने और चोरी करने में लगे हुए हैं. इस भारत देश में चोरों का जमघट है.

3. इंदौर से दिल्ली जाते समय बीच फ्लाइट ऊपर आसमान में यात्री का मोबाइल फट गया और आग लगने लगी. चालक दल ने आग बुझाने की कोशिश की लेकिन अग्नि शामक यंत्र बेकार था. फिर पानी फेंक के आग बुझाई गई. इससे पता चलता है कि हम जमीन से आसमान तक बेईमान हैं. अग्नि शामक यंत्र तक में चोरी करते हैं – चाहे वो एयरलाइन ने किया या उस कंपनी ने किया.

इससे ये भी साबित है कि हम बद्तमीज ट्रैवलर हैं. भारत के यात्री को मोबाइल बंद करने, ट्रे टेबल बंद करने और सीट को सीधा करने के अनाउंसमेंट के बाद घूम-घूम के चेक करना पड़ता है कि लोगों ने किया कि नहीं.

जहाज़ उड़ने और उतरने के समय हर इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस को बंद करने का उद्घोष होता है लेकिन म्यूजिक के शौक़ीन लोगों का मोबाइल और कान का ठेंठी नहीं बंद होता. जहाज उड़ने के कुछ सेकंड पहले तक लोगों को मोबाइल बंद करने के लिए बोलना पड़ता है. इस भारत में हर श्रेणी का इंसान बदतमीज़, बेहूदा, अनुशासनहीन है.

4. लखनऊ के कठौता झील में दो लोग डूब के मर गए. झील के किनारे लगी लोहे के जाल को काट के अंदर मछुआरों द्वारा लगाये गए जाल से मछली चुराने को उतरे थे. लोगों ने अधिकारियों और पुलिस को दोष दिया. अखबारों के पत्रकारों ने भी…

मछली चुराने वाले बियर पी रहे थे झील किनारे. सब चिनहट में दूकान करने वाले लोग थे, लेकिन चोरी इस देश के लोगों के खून में ऐसी घुस गई है कि सारी सोचने समझने की क्षमता घोल के पी चुके है. सैकड़ों की शराब पी जाने वाले 50 रुपये की मछली चोरी करने चले थे. ये धरती के बोझ हैं जो हल्के हो लिए.

कुल मिला के इस देश में मंत्री से लेकर संतरी तक चोर ही हैं… अफसर से लेकर चपरासी तक… किसी को किसी की परवाह नहीं जब तक कि उसका कोई अपना न हो. बाकी सड़क पर अनजान चेहरे – उनसे किसी को कोई मतलब नहीं. बस अपनी स्वार्थ सिद्धि होती रहे… चोर, स्वार्थी, बदनीयत और अनुशासनहीन लोगों का समाज है भारत का समाज…

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