कढ़ी खाय सड़ी : भट की फली डली कढ़ी पकौड़ी

हमारे तरफ की यह एक पुरानी कहावत है यानी एक बार बनी कढ़ी को कई दिनो तक खाया जाता है त्यौहार पर चढ़ी लोहे की कड़ाही में आज हमने कढ़ी पकौड़ी बनाई है. दही की वजह से कढ़ी हाज़मा भी सही रखती है और हमारी कड़ाही भी चमक गयी. आज हमने कढ़ी में भट की फली भी डाली है, साथ में पीले आलू व चावल भी हैं.

कढ़ी बनाने की विधि

बेसन में हींग नमक मिला कर पानी डाल कर गाढ़ा घोल बना कर अच्छी तरह फेंटे और गरम तेल की आँच धीमी करके पकौड़ियाँ तोड़े और करछुली से हिलाते हुये मध्यम व तेज आँच पर पकौड़ियों पर गर्म तेल डालें. इससे पकौड़ियाँ फूल कर मूढ़े की आकार की हो जायेगी. पकौड़ी बनाने के बाद कढ़ी बनाने के लिये बेसन के बराबर मात्रा में दही ले कर बेसन में मिला कर पानी डाल कर पतला घोल बनाये नमक व हल्दी मिलाएं.

पकौड़ी बनाने बाद अतिरिक्त तेल निकाल कर थोड़े से तेल मे मेथी दाना डालें और जला कर निकाल दें. बचे तेल में हींग, जीरा, मिर्च से तड़का दे कर नमक मिला कर बने दही और बेसन के पानी मिले घोल को डाल कर छौंके.

एक उबाल आने तक कढ़ी को बराबर चलाते रहे और उबाल आने के बाद एक पकौड़ी डाल दे गैस धीमी कर दे कढ़ी को पकने दें.

एक उबाल आने तक कढ़ी को बराबर चलाते रहे और उबाल आने के बाद पकौड़ी डाल दें. गैस धीमी कर दें, कढ़ी को पकने दें.

हमारे बाबा कहते थे कढ़ी बढ़िया पकने के लिये बत्तीस उबाल आने के बाद ही कढ़ी बढ़िया पकती है. तो जब कढ़ी अच्छी तरह पक जाये तब बाकी पकौड़ियों को भी पकती हुई कढ़ी में डाल दें. और थोड़ा पका कर गैस बन्द करके गर्म गैस पर ही रखी रहने दें.

एक अलग पैन में देशी घी में कुटी व पिसी लालमिर्च भूने.

पकी हुई कढ़ी को परोसते समय ऊपर से लालमिर्च वाला देशी घी डाले कुछ लोग देशी घी में जीरा भून कर भी ऊपर से डालना पसन्द करते हैं.

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