ताजमहल में भगवान का नाम लेने वालों से पेट के लिए खतरा! धिक्कार है

ताजमहल में नमाज़

जब अयोध्या, मथुरा, काशी हमें निरंतर चिढ़ा रहे हों तब ताजमहल V/S तेजोमहालय के विवाद को कतई फालतू का विवाद मानूँगा… और कोई बात हुई भी तो शाहजहाँ और औरंगज़ेब से पहले मुगलों के पुश्तैनी गुलाम मिर्जा जय सिंह को जूतांजलि दूंगा जिसने अपना मंदिर, कब्रगाह बनाने के लिए शाहजहाँ को सौंप दिया.

[ताजमहल : ताले तो खोलो, सामने आ जायेगी असलियत]

लेकिन फिर भी कुछ कांटे तो दिमाग में हर समय चुभते ही रहते हैं… अभी कल ही देख लो, वहाँ शिव चालीसा पढ़ते हुये कुछ लड़कों को गिरफ्तार कर लिया… लड़कों ने बताया कि उनका व्रत था सो उन्होंने शिव चालीसा पढ़ लिया… पट्ठों ने लिखित माफी भी मांग ली.

यहाँ भी जूतांजलि इन शिव चालीसा का पाठ करने वालों के लिए बनती है जिन्होंने शिव चालीसा पढ़ने के लिए लिखित माफी मांगी… और पता है वो ‘फर्ज़ीबहादुर’ कौन था? दस हजार लाइक वाला एक मशहूर फेसबुकिया.

खैर जो भी हो… अपने देश में रेल के डब्बे, तमाम रास्तों, हॉस्पिटल, सार्वजनिक पार्क या स्कूल प्रांगण आदि कोई भी ऎसी जगह नहीं जहां पर कि नमाज पढ़ते लोग ना मिल जाते हों…

तब यदि कोई बच्चा या बड़ा, ताजमहल की कब्रों को देख यकायक भूत प्रेत के एहसास से डर कर हनुमान चालीसा पढ़ने लगे तो क्या उसको जेल जाना पड़ेगा या लिखित माफी मांगनी पड़ेगी?

स्थानीय प्रशासन और यहाँ का इलीट वर्ग कहता है कि शिव चालीसा पढ़ने से आगरा वालों के पेट पर लात पड़ेगी क्योंकि तब विदेशों में आगरा की छवि खराब हो जाएगी और विदेशी पर्यटक आने से डरेंगे!!!

मतलब नमाज पढ़ने से विदेश में बढ़िया छवि बनती है और वे नमाज से नहीं डरते… लेकिन शिव चालीसा से छवि खराब होती है… विदेशी डरते हैं… वाह!!!

क्या ये विशाल हिन्दू समाज को चिढ़ाने वाली बात नहीं है?

यदि शिव चालीसा पढ़ना विदेशियों के लिए पिछड़ापन जैसी कोई बात है और इससे आगरा की रोज़ी पर फर्क पड़ेगा… उनके भूखों मरने का खतरा पैदा होगा तो…

…तो फिर वे क्लब कौन से गलत हैं जहां धोती-कुर्ता या चप्पल पहिनने वालों का प्रवेश वर्जित है… आखिर वे भी तो अपने क्लब की इमेज के कारण ही ऐसा कोई प्रतिबंध लगाते हैं…

…तो फिर वे साउथ अफ्रीका के अंग्रेज़ ही क्यों गलत थे जिन्होंने गांधीजी को अपने रेल के डब्बे में से निकाल कर फेंक दिया? उनका भी तो उस ट्रेन पर अपना कोई अधिकार ही तो था…

धिक्कार है आगरा वालों पर जो अपनी रोज़ी रोटी की चिंता में अपना स्वाभिमान तक इतना भूल चुके हैं कि ताजमहल पर भगवान का नाम तक लेने वालों से अपने पेट के लिए खतरा लगता हो!

और लानत है आगरा के दो भाजपा सांसद, नौ विधायकों, एक मंत्री और पार्टी के पदाधिकारियों पर, जिनके होते हुये भी प्रशासन शिव चालीसा पढ़ने वालों को लिखित माफी मांगने के लिए मजबूर करने की हिम्मत कर सका और ‘शिव चालीसा पढ़ने पर लिखित माफी’ मांगने के समाचार अखबारों को अपनी सुर्खियां बनाने को मिले.

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