पागल नहीं, कांग्रेस शासन में मर गया था विकास, अब जाकर शुरू हुई हैं साँसें

pc : pib.nic.in

आज मोदी जी ने गुजरात में खम्बात की खाड़ी में घोघा से दाहेज के बीच RoRo ferry service का शुभारंभ किया. इस से घोघा से दाहेज की दूरी जो कि सड़क मार्ग से 300 किलोमीटर से कुछ ज़्यादा ही थी वो अब सीधे जल मार्ग से, घट के सिर्फ 30 किलोमीटर रह गयी है. इस Ferry service में 100 से ज़्यादा लोडेड ट्रक, बस, कार, और 250 यात्री लाने ले जाने की क्षमता है.

एक मित्र संदीप बसलस ने सवाल किया है कि गुजरात में सरकार तो पिछले 17 साल से भाजपा की ही है, तो आखिर ये सेवा शुरू करने में 17 साल क्यों लगे? मोदी जी को तो ये बहुत पहले शुरू कर देना चाहिए था… संदीप भाई ने बड़ा वाजिब सवाल किया है… मोदी जी आखिर 17 साल क्या करते रहे? इस परियोजना में 17 साल क्यों लग गए?

17 साल इसलिए लगे कि इस परियोजना के लिए समुद्र में एक बहुत बड़े हिस्से में dredging करने की ज़रूरत थी. Dredging करना मने समुद्र में पानी के नीचे, जहां जहां गहराई कम है, वहां से मशीनों से खुदाई कर समुद्र तल से मिट्टी या रेत हटा के जहाजों के आने जाने का मार्ग बनाना पड़ता है…

अब समुद्र में खुदाई कोई राज्य सरकार नहीं कर सकती. ये महकमा केंद्र के अधीन आता है. और इसके लिए बीसियों किसिम की Environmental Clearence लेनी पड़ती हैं. 2002 में मोदी जी चुनाव जीते और फिर अगले दो साल तक गुजरात दंगों और कच्छ के भूकंप से जूझते रहे और उनकी सारी ऊर्जा भूकंप से तबाह हुए कच्छ और भुज को बनाने में लग गयी.

फिर 2004 में UPA का शासन आ गया और सोनिया और उनके मौनमोहन सिंह जी गद्दी पे आ बिराजे. उन दस सालों में मोदी जी ने कोई एक-दो नही बल्कि ऐसे बीसियों project बना के मौनमोहन सरकार के पास भेजे पर उन्होंने एक की भी clearence नहीं दी.

मोदी जी ने गुजरात के प्रत्येक घर को pipe line द्वारा LPG gas पहुंचाने की योजना बनाई जिसकी मंजूरी केंद्र सरकार ने नहीं दी. सरदार सरोवर की ऊंचाई बढ़ाने और dam पे gate लगाने की अनुमति मांगी जो UPA की केंद्र सरकार ने नहीं दी… ऐसी ही सैकड़ों परियोजनाएं अटकी रही…

आपको याद होगा कि 2014 में जैसे ही मोदी जी ने शासन सम्हाला उसके दो महीने के भीतर गुजरात की नई CM ने सरदार सरोवर की ऊंचाई बढ़ाने के लिए gate लगाने का काम शुरू किया… ये gate खड़े करने में ही 3 साल का समय लगता है और इन gates के न लग पाने के कारण ही गुजरात में सुजलाम सुफलाम पेय जल योजना आज तक अटकी पड़ी रही, केंद्र की UPA सरकार इसमे रोड़े अटकाती रही और गुजरात के लोग प्यासे मरते रहे.

इसी तरह ये घोघा दाहेज ferry जो अब शुरू हुई, इसके पहले यहां 30 km लंबा एक Barrage एवं Bridge बनाने की परियोजना थी जिसे केंद्र ने नामंजूर कर दिया.

फिर मोदी जी ने ये RoRo (Rolling on Rolling off) Ferry योजना का प्रस्ताव भेजा… सामान्य ships में सामान से लदा container क्रेन से उठा के शिप पे लादा जाता है पर RoRo में ट्रक-बस खुद चल के ship पे चढ़ जाती है…

इस परियोजना में एक बड़ा शिप चला के उसमें सामान से लदे Truck Bus Car जहाज़ पे चढ़ाने का प्रस्ताव था जिसके लिए एक भारी भरकम Jetty बनानी थी और समुद में बड़े और भारी ships के आने जाने और बंदरगाह पे dock करने के लिए dredging की ज़रूरत थी जिसकी Environmental Clearence केंद्र सरकार ने नहीं दी…

आपको याद होगा कि UPA के अंतिम दिनों में पर्यावरण मंत्री जयंती नटराजन को इसी लिए हटाना भी पड़ा क्योंकि वो 3 साल से सभी projects की files दबा के बैठी थीं… यहां तक कि बहुत से 6 lane road के projects भी पर्यावरण मंत्रालय की वजह से पूरे 10 साल delay हुए.

अंततः ये प्रोजेक्ट तभी पूरा हुआ जब केंद्र में मोदी जी आये और प्रकाश जावड़ेकर ने इसकी पर्यावरण clearence दी, केंद्र के जहाजरानी विभाग ने dredging करने के लिए 117 करोड़ का बजट दिया तब जा के गुजरात सरकार की ये महत्वाकांक्षी परियोजना अब जा के पूरी हो पाई.

विकास पागल नहीं हुआ बल्कि विकास 2004 से 2014 के बीच मर गया था, अब जा के विकास की सांस आनी शुरू हुई है.

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