लुटेरों-डकैतों के अपने घर नहीं होते, मुग़ल वापस जाते कहां!

कर्नाटक के कांग्रेसी मुख्यमंत्री टीपू सुलतान को महिमामंडित कर रहे हैं तो इसमें नया क्या है? आज़ादी के बाद सर्वाधिक महिमामंडन किसका किया गया? मुगलों का… आज़ादी के बाद लम्बे समय तक किसकी सरकार थी? कांग्रेस की… और इसमें भी सबसे बड़ी विडंबना देखिये, यह सब हुआ तब जब देश का बंटवारा धर्म के नाम पर हो चुका था और पाकिस्तान बन चुका था.

क्या किसी स्वतंत्र राष्ट्र ने, अपने ही देश को दशकों तक क्रूरता से गुलाम बनाये रखने वाले किसी विदेशी अत्याचारी शासक के नाम पर, अपनी ही राजधानी में मुख्य सड़कों का नामकरण किया है? नहीं… मगर दिल्ली में अकबर से लेकर औरंगज़ेब के नाम वाले मार्ग मिल जायेंगे.

उन सभी के नाम पर मजार और चर्च हैं और वे सब अब भी फलफूल रहे हैं, जिन्होंने सिवाय हिन्दुओं के जबरन धर्म परिवर्तन के, कोई और संत वाला काम नहीं किया.

ऐसा इतिहास लेखन करवाया गया कि अकबर तो महानतम सम्राट स्थापित हो गया और जिनका लोहा विश्व ने माना ऐसे चन्द्रगुप्त और विक्रमादित्य इतिहास के किसी पन्ने के किसी पैराग्राफ में समेट दिए गए.

वामपंथी शिक्षा से आने वाली पीढ़ियों के दिमाग को इतना भ्रमित कर दिया गया कि वे कभी यह ना पूछ सकें कि आखिरकार बाबरी मस्जिद अयोध्या में ही क्यों? और इलाहाबाद प्रयाग में ही क्यों बसाया गया था?

आज़ादी के बाद देश को किसी ना किसी तरह, कई मामलों में गुलाम ही रखा गया. आप सवाल नहीं पूछ सकते. मुग़ल तो बड़ी बात हैं यहां तक कि गांधी-नेहरू पर कोई प्रश्न चिह्न नहीं खड़े कर सकते. और अगर आपने कोई प्रासंगिक सवाल पूछने की हिम्मत भी की तो आपको फासिस्ट और संघी कहकर कठघरे में खड़ा कर दिया जाएगा.

हाँ, आप सदियों से करोड़ों हिन्दुओं के दिल में बसे श्री राम पर सवाल खड़े कर सकते हो. हिन्दू संस्कृति का उपहास उड़ा सकते हो. हर उस काम और विचार को प्रोत्साहित किया गया जिसने हिन्दुओं की आस्था पर चोट पहुंचाई. उलटे ऐसे लोगों का प्रगतिशील नाम रखा गया, जिससे नाम से ही धोखा हो जाए.

ऐसे लोगों को संस्कृति और शिक्षा के उच्च पदों पर आसीन किया गया. जिनका एक ही मकसद होता देश को सांस्कृतिक-धार्मिक रूप से जल्द से जल्द गुलाम बनाना. इन काले अंग्रेजों ने वो सत्यानाश किया जो मुग़ल और अंग्रेज भी नहीं कर पाए थे. आज भी उनका एक ही मकसद है, बचे हुए हिन्दुस्तान को किसी भी तरह इस्लाम और ईसाइयत के बीच बाँट देना.

पिछले दिनों ताजमहल पर मुगलों के नाम पर अपनी जान छिड़कने वालों से सोशल मीडिया में सटीक सवाल पूछे गए. सभी सवाल बड़े रोचक होते. हर सवाल के मूल में था कि अगर लुटेरे मुग़ल इतने ही कलाप्रेमी थे तो अपने देश में कोई झोपड़ा भी क्यों नहीं बना पाए थे.

इसी बात को आगे बढ़ाते हुए मैं पूछता हूँ कि, अंग्रेज़ तो वापस चले गए थे मगर मुग़ल कभी वापस क्यों नहीं गए? वो जाते कहाँ, लूटेरों-डकैतों के अपने घर नहीं होते!

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY