शाकाहार बनाम मांसाहार

दरअसल मांसाहार व शाकाहार को हिंसा व बिना-हिंसा से प्राप्त किए गए भोजन के रूप में परिभाषित किया जाना चाहिए. अभी तक चली आ रही मांसाहार व शाकाहार की थियरी फेल हो रही है. लोग जागरूक हो रहे हैं, विज्ञान परते खोल रहा है. यदि अंडा मांसाहार है तो दूध, शहद इत्यादि भी मांसाहार होना चाहिए.

बेहतर कि शाकाहार व मांसाहार को हिंसा के आधार पर परिभाषित किया जाए. यदि बछड़े का हक मारकर या गाय को इंजेक्शन ठोंक कर दूध निकाला गया तो यह मांसाहार की श्रेणी में आना चाहिए.

यदि किसानों को आत्महत्या के लिए मजबूर होना पड़े तो अनाज खाना भी मांसाहार माना जाना चाहिए.

अनाज उगाते समय रासायनिक खादों व कीटनाशकों के प्रयोग से जीवों की हत्या करने को मांसाहार की श्रेणी में रखा जाना चाहिए.

शरीर नहीं जानता कि उसे जो तत्व मिल रहे हैं वह मांस से आए हैं या शाक से, शरीर सिर्फ तत्वों को जानता है.

शरीर यह नहीं समझता कि कौन सा मिनरल, विटामिन, प्रोटीन इत्यादि मांस से आया है या शाक से.

मांसाहार व शाकाहार को हिंसा के आधार पर ही अलग किया गया होगा. क्योंकि हिंसा को छोड़कर मांस व शाक में अंतर नहीं.

कौन कैसे जान छोड़ता है, इसी से तय होता है वो हमारी सभ्यता में खाद्य है या नहीं

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