Sri M -1 : आसमानी हवन के साथ दुनियावी सत्संग

नि:शब्दता को जब शब्द पर सवार होने की आवश्यकता पड़ती है तो उसे किसी अघोरी की काया से भी गुज़रना पड़े तो हिचकता नहीं है… रूपांतरण की चरम सीमा पर आकर नीरवता का आकाश छन्न से टूट कर धरती पर बिखर जाता है जिस पर चलकर कोई तपस्वी अपनी पूर्णता के साथ प्रकट होता है … Continue reading Sri M -1 : आसमानी हवन के साथ दुनियावी सत्संग