भारत की तीनों सेनाओं का रूस के साथ संयुक्त अभ्यास ‘इंद्र’ शुरू, चिंतित चीन

व्लादिवोस्तोक. भारत और रूस के बीच अब तक का सबसे बड़ा युद्धाभ्‍यास आज से शुरू होने जा रहा है. यह इसलिए सबसे ज्‍यादा महत्‍वपूर्ण है, क्‍योंकि पहली बार इस साझा युद्धाभ्‍यास में भारत की तीनों सेनाएं (थल, वायु एवं नौसेना) हिस्‍सा लेने जा रही हैं. भारत और रूस का नाम जोड़कर इस युद्धाभ्‍यास को ‘इंद्र’ का नाम दिया गया है. सामरिक लिहाज से भी इसे अहम माना जा रहा है.

10 दिन तक चलने वाला यह युद्धाभ्‍यास व्लादिवोस्तोक के पास जापान के सागर में आयोजित किया जा रहा है. व्लादिवोस्तोक शहर में रूस की पैसेफिक कमान का मुख्यालय है. यह एक तटीय शहर है, जो चीन और उत्तरी कोरिया के ट्राइ-जंक्शन पर है. इसलिए इस युद्धाभ्यास का महत्व और अधिक बढ़ जाता है. चीन पहले ही तनाव में आ चुका है.

थलसेना, वायुसेना और नौसेना के 880 सैनिकों को इस युद्धाभ्यास के लिए रवाना किया गया है. अकेले थलसेना के ही 450 सैनिक इस युद्धाभ्यास में हिस्सा ले रहे हैं. नौसेना के दो युद्धपोत, सतपुड़ा और कदमत भी इस युद्धाभ्यास के हिस्सा हैं. वायुसेना के करीब 80 जवान हिस्सा ले रहे हैं.

रूसी सेना ने कहा कि इस 10 दिवसीय सैन्य अभ्यास का लक्ष्य समुद्री डाकूओं और अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादियों का संयुक्त विरोध है. इस सैन्य अभ्यास में भारतीय पायलट रूसी वायु विमानों का उपयोग करेंगे.

रूस और भारत के थल बल जांच, खोज, घेराबंदी और परिवहन गलियारे को खोलने जैसे अभ्यास करेंगे. वायु बल जमीन पर अवैध सशस्त्रों पर हमला करने का अभ्यास करेंगे. साथ ही जल बल वायु रक्षा, बचाव, परिवहन और समुद्री डाकुओं द्वारा नियंत्रित जहाजों को रोकने के अभ्यास में भाग लेंगे.

रूसी रक्षा मंत्री ने अपनी वेबसाइट में जनकारी दी कि रूस के प्रशांत बेड़े के जहाजों, रूस के पूर्वी सैन्य क्षेत्र के पदाति बलों और हवाई बलों ने इस सैन्य अभ्यास में भाग लिया, जबकि नौसेना कमांडो, “सतपुड़ा” जहाज और “कडमैट” जहाज समेत भारतीय स्थल सेना, नौसेना और वायु सेना के 910 सैनिकों ने इस सैन्य अभ्यास में भाग लिया.

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