इस दिवाली ज़्यादा पटाखे चलेंगे, और ज़िम्मेदार होगा सुप्रीम कोर्ट

इसी साल सुप्रीम कोर्ट ने पटाखा विक्रेताओं से एक सुनवाई में कहा ‘आपके पास भारतीय सेना से ज़्यादा पटाखे हैं. ये पटाखे पूरा देश भस्म कर सकते हैं’. माननीय के इस कथन से आप उनकी बुद्धि के अद्भुत स्तर का अनुमान लगा सकते हैं.

जो आंकड़े कोर्ट में पेश किए गए, वे और भी मज़ेदार हैं. इसके अनुसार अकेले दिल्ली-एनसीआर में ही पचास लाख किलो पटाखों का स्टॉक है और दिवाली में हर दिन दस लाख किलो पटाखे दिल्ली में जला दिए जाते हैं. शायद जज साहब को पता नहीं होगा कि दस लाख किलो किसे कहते हैं.

ये पचास लाख किलो वाला मामला ही आज दिल्ली के पटाखा व्यापारियों के लिए गले की हड्डी बन गया. बिसात पहले से ही बिछा दी गई थी और अब चालें बखूबी चली जा रही हैं. कोर्ट का डंडा सभी राज्यों पर चल गया है. दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण की स्थिति वाकई बहुत खराब है और हम हिन्दू ये भी जानते हैं कि ज्यादा पटाखे प्रदूषण में बढ़ोतरी ही करेंगे. हमें पता है कि मोहल्ले में बुजुर्ग और गर्भवती महिलाएं भी हैं.

लेकिन हम इस आदेश का पालन कतई नहीं करेंगे. हमें ज्यादा पटाखे छोड़ने का कोई शौक नहीं है. हम ये विरोध स्वरूप करेंगे. हिन्दू को प्रतिक्रियावादी होना ही पड़ेगा. इस दिवाली यदि पटाखे ज्यादा चलाए जाएंगे तो इसका जिम्मेदार सुप्रीम कोर्ट ही होगा. हमारा आक्रोश अब आतिशबाजी से व्यक्त होगा और होना ही चाहिए.

‘आप पूरे देश को जला सकते हैं’ वाली हास्यापद बात कहने वाले कभी जानने का प्रयास नहीं करते कि बकरीद पर जानवरों के बच गए अंगों का निस्तारण कैसे किया जाता है. एक रिपोर्ट छपी थी जिसमे बताया गया था कि मलेशिया और इंडोनेशिया में पशुओं को काटने और उनके अंगों के निस्तारण के कड़े नियम है जिनका पालन करना ही होता है.

रिपोर्ट में कहा गया कि एशिया और अफ्रीका में डिस्पोजल के लिए कोई व्यापक प्रबन्ध नहीं किये जाते. बचे अंगों को खुले में फेंक दिया जाता है. ये अंग खतरनाक बैक्टेरिया को जन्म देते हैं. अफ्रीका में घातक रोग ‘इबोला’ के संक्रमण का कारण यही था. लेकिन जज साहब को क्या मतलब होगा यदि ऐसी बीमारी भारत मे पनप जाए तो.

बॉलीवुड की कई हस्तियों ने पटाखा मुक्त दीपावली की अपील की है. इनके नाम बताए दे रहा हूँ ताकि विभिन्न माध्यमों से आप इनका ‘पटाखा’ फोड़ सके. आमिर खान, राजकुमार राव, जूही चावला, करन जौहर, ईशा गुप्ता, सैफ अली खान, आथिया शेट्टी आदि.

इनमें से अधिकांश को नहीं मालूम कि देश मे पटाखों को लेकर क्या चल रहा है. इनमें से अधिकांश मांसाहारी है लेकिन दीपावली पर जानवरों की फिक्र करते हैं. रामजी का दिन है तो धूम से मनेगा. भारत देश रामजी की अयोध्या वापसी पर मोमबत्ती जलाकर केक काटने से तो रहा.

इस दीपावली खूब आतिशबाजी करें लेकिन कम आवाज़ के बम चलाए. हम सभी के आसपास कई बीमार बुजुर्ग रहते हैं. उनका भी ख्याल करें. शुभ दीपावली.

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