अभी बिगड़ा ही क्या है! सारा ही डैमेज कण्ट्रोल तो हो सकता है ना!

आलू की बुवाई का सीजन चालू हो चुका है… आलू के बारे में मैं हर समय एलर्ट और सर्वे जैसे मोड पर ही रहता हूँ… सो अभी दोपहर में बुवाई के मूड का जायजा लेने के लिए कुछ लोगों से बात की.

एक कट्टर भाजपा समर्थक और अपने समाज व वर्ग में असर रखने वाले किसान से बात हो रही थी… वह अटल जी के समय को भाव विभोर हो याद करके, मोदीजी के लिए जिन शब्दों का प्रयोग कर रहा था वैसे शब्द शायद विरोधी भी इस्तेमाल ना कर पाएं…

स्वाभाविक रूप से उन शब्दों को सुन कर अंदर से धक्का मुझे भी लगा… लेकिन जिन तथ्य और तर्कों को लेकर वो बात कर रहा था, वो यूँ ही हवा में उड़ाने वाली बातें भी नहीं थीं… हालांकि मुझे पता है वो बहुत ज्यादा कट्टर भाजपाई है सो ज्यादा समझाने की जरूरत भी नहीं समझी…

कुछ देर बाद एक दूसरे किसान को फोन लगाया… तृतीय वर्ष OTC और संघ के एक अनुषांगिक संगठन को देखता है… बहुत सम्पन्न भी है… उसकी साथ हुयी बातें और भी खतरनाक थीं…

किसानों की हालत से क्षुब्ध यह किसान कह रहा था – “भाई साहब अब तो इनको गुजरात हारना चाहिए तभी 2019 मिलेगा… नहीं तो सबसे बड़ी चोट हमारा उत्तरप्रदेश ही देगा…”

तभी हमारे गाँव का एक साथी किसान मिला. उसका बेटा छात्र संघ का निर्दलीय चुनाव लड़ रहा है… बता रहा था ABVP वालों ने टिकट देने के लिए दो लाख मांगे थे… अब मुझे इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्र संघ के परिणाम का पूरा नजारा प्रत्यक्ष दिख रहा था.

एक वकील साहब और बड़े किसान से बातें हुईं… पैतृक कांग्रेसी हैं… कह रहे थे, “यार हम तो समझ रहे थे तुम्हारे मोदी कांग्रेस को तो क्या, सारे दलों को ही वाकई खत्म कर देंगे… लेकिन ये तो खुद ही बच जाएँ वो ही बहुत बड़ी बात होगी…

मूड एकदम ऑफ़ हो चुका था… दिमाग में सन्नाटा सा छा गया था… लगा कि आज का तो दिन ही खराब है, सो घर आ कर टीवी खोला तो उस पर गुरदासपुर वाली लाईन देख तो दिमाग का फ्यूज ही उड़ गया था…

सारी बातों ने मिल कर पेट में पानी सा कर दिया था… समझ में नहीं आता यहां मित्र लोग कौन सी दुनिया में जी रहे हैं… कुछ कहो तो मित्र लोगों ने एक ‘शल्य’ शब्द पकड़ लिया है…

और चुप यूँ नहीं रहा जाता कि अभी तो चुनाव में 500 दिन से भी ज्यादा का समय बाकी है… अभी आखिर बिगड़ा ही क्या है… सारे का सारा ही डैमेज कण्ट्रोल तो हो सकता है ना!…

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