केरल के सोलर घोटाले की जांच रिपोर्ट पर चुप बुद्धिजीवी, प्रभावित जो होते हैं पद-पुरस्कार

अमित शाह के पुत्र जय शाह पर लगे तमाम आरोपों में एक आरोप ये भी है कि उनकी कंपनी को सोलर पावर प्लांट का कोई अनुभव नहीं था. वो स्टॉक ब्रोकिंग फर्म थी. उसके बावजूद उसे सोलर पावर प्लांट मिला. और उसे लगाने के लिए दस करोड़ का लोन भी सरकारी कंपनी से मिला. आज एक वास्तविक सोलर घोटाले की चर्चा

सरिता नायर केरल की हैं. गरीब परिवार में जन्मी लेकिन मेधावी छात्रा रही. कम उम्र में पिता की मौत हो गयी. और कम उम्र में ही शादी हुई. लेकिन पति से हमेशा विवाद रहने की वजह से सरिता ने अलग होकर जीवन जीना शुरू किया. इंटर पास करने के बाद वो पॉलीटेक्निक से डिप्लोमा कर चुकी थीं.

उन्हें एक बैंक में नौकरी मिली जहाँ वो बीजू राधाकृष्णन के संपर्क में आयी. 2005 में उन्होंने कई कस्टमर्स को क्रेडिट कार्ड के जरिये धोखा दिया, पैसों की ठगी की. और फिर जेल यात्रा की. लेकिन जल्द ही राजनीतिक संपर्कों ने उन्हें रिहा करा लिया.

सुन्दर सरिता अपने गुणों का उपयोग करना जानती थी. 2011 में उसने और बीजू राधाकृष्णन ने मिलकर एक कंपनी खोली सोलर टीम प्राइवेट लिमिटेड. सरिता और बीजू ने ठगी के लिए एक अनोखी योजना बनाई. सरिता ने चीफ मिनिस्टर के स्टाफ से मेल जोल बढ़ाना शुरू किया. और उनके जरिये अपनी पहुँच केरल में तत्कालीन मुख्यमंत्री और कांग्रेस के नेता ओमान चांडी तक बनाई.

सरिता और बीजू ने तमाम सरकारी फंड्स में डोनेशन देने की पेशकश की. पार्टियां आयोजित की. उसमें तमाम मंत्रियों-अधिकारियों को बुलाया गया. पैसों और शबाब से तमाम मंत्रियों तक पहुँच बनाई गयी.

इसके बाद इन दोनों ने केरल के धनी लोगों, बिजनेसमैन, उद्योगपतियों से संपर्क करना शुरू किया. सरिता अपने आपको चार्टेड अकाउंटेंट के रूप में पेश करती, बीजू स्वयं को वालंटियरली रिटायर आईएएस अफसर बताता. जो सोलर और री-न्यूएबल एनर्जी में पीएचडी कर रहा था.

ये दोनों लोगों को सोलर पावर प्लांट लगाने का ऑफर देते. उन्हें इसके लिए सरकारी ज़मीन दिलवाने का ऑफर देते. सब्सिडी की पेशकश देते. उनके सामने मंत्रियों, चीफ मिनिस्टर को फोन करते. उनके लिए सोलर प्लांट की बात करते और उनकी भी बात करवाते.

उसके बाद ऐसे इंटरेस्टेड लोगों से आगे रिश्वत देकर मंजूरी हासिल करवाने के नाम पर पचास लाख, सत्तर लाख जैसी रकमें वसूल करते. इस सोलर घोटाले में सैकड़ों लोग कुछ ही महीनो में इस धोखाधड़ी के शिकार हो चुके थे. लेकिन काले धन के चलते किसी ने इनके खिलाफ कंप्लेंट नहीं की.

लेकिन फिर एक ने हिम्मत की. उसकी कंप्लेंट पर छह महीने कार्यवाही नहीं हुई. फिर दूसरी कंप्लेंट आयी. और सरिता को सोलर घोटाले गिरफ्तार कर लिया गया. 2013 में जब सरिता गिरफ़्तार थी, बीजू ने उसे छोड़कर दूसरी शादी कर ली.

दरअसल सरिता के साथ लिव इन रिलेशन था, उसकी शादी पहले हो चुकी थी. उसकी पत्नी 2006 में रहस्यमयी हालात में मर चुकी थी. अब बीजू ने एक ऐक्ट्रेस के साथ रहना शुरू किया था.

इस धोखे से आहत सरिता ने सोलर घोटाले की पोल खोलती एक चिट्ठी कोर्ट को भेजी. वो चिट्ठी नहीं एक बवाल था जिसने आने वाले समय में केरल की पूरी राजनीति को हिला दिया.

सरिता ने उस चिट्ठी में लिखा कि कैसे उसकी कंपनी के जरिये लोगों को सोलर पावर प्लांट दिलवाने के लिए ओमान चांडी ने 2 करोड़ की रिश्वत ली. और सिर्फ रिश्वत ही नहीं ली. सरिता को सेक्सुअल फेवर भी देना पड़ा.

और केवल चांडी को ही नहीं. चांडी तक पहुँच बनाने के लिए उनके स्टाफ को भी. तमाम मंत्रियों, विधायकों, सांसद को. अधिकरियों को भी.

उस चिट्ठी ने हड़कंप मचा दिया. लेकिन ओमान चांडी ने इस्तीफ़ा नहीं दिया. उलटे सरिता पर मानहानि का केस किया. बीजू पर उसकी पत्नी की हत्या का मुकदमा शुरू हुआ. उसे और उसकी नयी पत्नी को भी हिरासत में ले लिया गया.

फिर चुनाव हुए. सोलर स्कैम, और सोलर सरिता ने चांडी की पार्टी को बुरी शिकस्त दी. नयी सरकार आयी. वामपंथी सरकार. उसने न्यायिक कमीशन बैठाया. उस कमीशन ने इस सोलर घोटाले पर चार दिन पहले अपनी रिपोर्ट दी.

कांग्रेस जो अमित शाह के पुत्र के केस में जाँच की मांग कर रही थी, उसके अपने पूर्व मुख्यमंत्री के खिलाफ हुई जाँच में रिपोर्ट चार दिन पहले आयी. रिपोर्ट ने न सिर्फ रिश्वतों का आरोप सही बताया बल्कि सेक्सुअल अब्यूज़ को सही बताया.

शिवराजन कमीशन ने अपनी रिपोर्ट में पूर्व चीफ मिनिस्टर, उनके तीन स्टाफ, पावर मिनिस्टर, कई विधायक, MP पर रेप का मुकदद्मा दर्ज करने की सिफारिश की. इन के अलावा उस समय के होम मिनिस्टर पर पुलिस जाँच को प्रभावित करने के आरोप को सही पाया. लगभग आधी सरकार दोषी. रिश्वत और रेप की दोषी.

जाँच का नतीजा आ गया. कांग्रेस ने नतीजे को राजनीति से प्रेरित बताया. वामपंथी सरकार को दुर्भावना से काम करने वाला बताया. ऐसी गन्दी राजनीति की तीखी आलोचना की.

अमित शाह के पुत्र पर हंगामा मचाने वाले बुद्धिजीवियों को सोलर घोटाले की इस जांच रिपोर्ट से लकवा मार गया. वो अपनी जुबान नहीं खोलना चाहते. पद और पुरस्कार प्रभावित होते हैं.

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY