असुर: एक खोज, …और वे झारखंड के जंगलों में खोज रहे हैं असुर!

असुर (Asshur/ Assur/ Ashur/ Asur)… इसमें पर्शियन Ahura नहीं है कि ‘स’ और ‘ह’ का लफड़ा है… असुर में ‘स’ ही है… और उच्चारण भी ‘स’ ही है… बोले तो ‘असुर’!! असुर में जाने के पहले कुछ इधर-उधर की बातें कर लेते हैं.

भारत की बात करें तो ‘असुर’ से सब कोई परिचित हैं… रामायण, महाभारत, पौराणिक चरित्रों में असुरों का जिक्र होते ही रहा है… वर्तमान की बात करें तो कुछ खोजी टाइप के लोगों ने असुरों को ढूंढ़ ही निकाला समान नाम सहित… कहाँ?… तो झारखंड के जंगलों में…

झारखंड के नेतरहाट तरफ सर्वाइवल कंडीशन में जी रहे असुर जनजाति के लोग… कुछेक 9000 के आस-पास इनकी आबादी बची हुई है… और जब इनका ज़िक्र आया तो महिषासुर, भैंसासुर, रावण के खूब नाती-पोते, बोले तो वंशज एकदम से उफिया जइसन निकलने लगे… ये लोग अभी दशहरा के समय खूब सक्रिय हो जाते हैं… पिछले कुछेक वर्षों से तो देख ही रहे होंगे.

चलिये इसको गोली मारिये… अब जरा कुछ फिल्मी हो जाते हैं…

आप लोग हॉलीवुड सिनेमा के तो दीवाने होंगे ही… एक्शन, थ्रिलर, माइथोलॉजिकल से लेकर रोमांटिक सिनेमा तक… हम भी हैं दीवाने… और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर बनी एक्शन फिल्में कुछ-कुछ देख-दाख लिया करता हूँ… तो आप लोग भी ई सिनेमा सब देखे होंगे लाइक ग्लेडियेटर, 300, स्पार्टकस, 10,000 BC, वगैरह… वगैरह…

इन सब में बड़ी कॉमन बात है कि कुछ भयंकर टाइप के भीमकाय करिया, बलिष्ठ, हट्ठे-कट्ठे हब्शी अफ्रीकन लोग गोरे लोगों की तरफ से लड़ने का काम करते थे या गुलामी करते थे… स्वामिभक्ति का आलम ये कि ये हब्शी क्रूरता की किसी भी हद तक जा सकते थे.

बताया ये भी जाता कि इन हब्शियों को प्ले-बॉय बोले तो सेक्स-मशीन की तरह वहाँ की रानियां प्रयोग में लाती थी… इनका तो लगता था कि बस जंजीरों में जकड़े रहो, पिंजड़े में कैद रहो और जब लड़ाई हुए तो स्वामी के तरफ से खूब लड़ो… कोलोजियम की लड़ाई में ये हब्शी मनोरंजन का हिस्सा खूब हुआ करते थे.

खैर छोड़िये… इधर-उधर की बातें बहुत हो गई… अब आते हैं मुख्य विषय पर, मने कि ‘असुर’ पर.

पिछले लेख में हमने हैम की औलादों का जिक्र किया था… अब इस पोस्ट में नूह के दूसरे पुत्र ‘शेम’ के पुत्रों की चर्चा करते हैं.

तो शेम के पाँच पुत्र हुए. Elam, Asshur, Arphaxed, Lud और Aram. इन पाँचों ने अलग-अलग देश बनाये.. नाम के अनुसार क्रमशः देखे.. Elam, Assyria, Chaldea, Lydia और Lavantine.

शेम के दूसरे पुत्र ‘असुर’ पर जाने के पहले तीसरे पुत्र Arphaxad के बारे में बता दें कि इनके वंश में ही आगे चलकर अब्राहम (Abraham) जन्म लिए.. जो कि अभी के अब्राहमिक रिलीजन के पितामह हैं.

खैर… तो इससे पहले आपने जाना था कि नूह ने अपने तीन पुत्रों के मध्य पृथ्वी को तीन हिस्सों में बांटा था… तो शेम के हिस्से में एशिया रीजन आया था… और ये लोग सेमेटिज कहलाये और सेमेटिक भाषा बोलते थे… वर्तमान में जो पूरा मिडिल ईस्ट उठा लीजिये तो ये इलाका शेम के पुत्रों का हुआ और ये यही आबाद हुए और गाँव/ शहर/ मुल्क बसाये.

शेम के पुत्र ने डाली असुर साम्राज्य की नींव

तो द्वितीय पुत्र असुर ने ‘असुर साम्राज्य’ की नींव डाली जो कालांतर में ‘असीरिया’ के नाम से प्रसिद्ध हुई… अभी भी सीरिया में असुर शहर है जिसको यूनेस्को ने वर्ल्ड हेरिटेज के तौर पर सुरक्षित रखा है (सन 2003)… तो असुर पहले शहर हुआ, फिर असुर शहर के लोग असुर कहलाये और बाद में असीरियन…

अब बेबीलोनियन और सुमेरियन खुदाई से प्राप्त साक्ष्यों की मानें तो ‘असुर’ असीरियन लोगों के सबसे बड़े भगवान थे… असीरियन बहुदेववादी थे जिसमें किंग्स ऑफ गॉड ‘असुर’ थे… और गॉड असुर के नाम से ही पहला शहर बसा फिर असुर/ असीरियन साम्राज्य… और ये बहुत ही महान साम्राज्य साबित हुआ प्राचीन समय में… वर्तमान समय में देखे तो इराक, सीरिया, उत्तर-पश्चिम ईरान और टर्की इनके क्षेत्र रहे.

असुर-नसीरपाल!!!

गॉड असुर जो थे, उनको कुछ इस तरह दर्शाया गया है… ईगल (गरुड़) के पंख दोनों साइड से निकले हुए. साँढ़ के सींग का मुकुट… एक हाथ में धनुष पकड़े हुए और दूसरे हाथ से आशीर्वाद देते हुए… किसी किसी में एक हाथ में सन-डिस्क पकड़े हुए भी दिखाया गया है… किसी-किसी में पूरा गरुड़ का ही मुख लगा हुआ और बाकी मनुष्य के शरीर के साथ चित्रित किया गया है.

इधर भारत के जो असुर हुए, वो नाम के बाद असुर जोड़ते थे… जैसे कि महिषासुर, तारकासुर, सम्बरासुर, आदि आदि… लेकिन इधर, मने असुर साम्राज्य के जो शासक हुए, वे नाम के आगे असुर लगाते थे, जैसे…
असुर-उबल्लित(Ashur-Uballit)
असुर-अहड्डिया(Ashur-Ahaddiya)
असुर-बनिपाल (Ashur-Banipal)
असुर-नसीरपाल (Ashur-Nasirpal)

इन अंतिम दो नामों पर ज़रा गौर करिये… असुर बनि-पाल और असुर नसीर-पाल… कुछ दिमाग की घण्टी नहीं बजती इनका नाम सुन के?

अब इसमें भी ये कि असुर-बनिपाल के राज में ही असुर साम्राज्य अपने बुलंदियों पर था… सबसे ज्यादा असुर साम्राज्य का विस्तार असुर-बनिपाल ने ही किया. ये असुर साम्राज्य के सबसे बलशाली व प्रतापी राजा हुए. इन्हें शेरों का शिकार करना सबसे ज्यादा पसंद था. और ये बहुत क्रूर भी थे. भित्ति-चित्रों के माध्यम से असुर-बनिपाल की क्रूरता का बखान भी किया गया है.. और ये जिन एशियाई शेरों का शिकार करते थे, वे शेर अब गुजरात के गिर जंगलों में ही कुछ शेष बचे हुए हैं.

अब थोड़ा पैच करते हैं…

महाभारत काल में श्री कृष्ण जी से यवन देश का राजा काल-यवन युद्ध लड़ने आता है… जरासंध से मिली जुली रहती है इसकी… यवन देश मने उधर ही असीरिया तरफ का देश (सीरिया)… तो वो असुर साम्राज्य का ही एक योद्धा था…

फिर एक जगह जिक्र आता है जब कुमार देवव्रत याने भीष्म हस्तिनापुर के सेनापति होते है तब असुरों ने हस्तिनापुर (आर्यावर्त) की सीमा पर उत्पात मचाया था. तब भीष्म ने अपना पराक्रम दिखाते हुए इन असुरों के दांत खट्टे किये थे और इस बात पर भी संधि कराने पर बाध्य किये थे कि आज बाद आर्यावर्त की सीमा में प्रवेश नहीं करोगे… आर्यावर्त की सीमा बोले तो? बोले तो गांधार (अफगानिस्तान) महाजनपद के उधर, बोले तो बेबीलोन, बोले तो ईरान/ इराक, बोले तो असीरियन साम्राज्य, बोले तो ‘असुर साम्राज्य’!!

दूसरी बात…

अगर हम ‘असुर’ गॉड की बात करे तो गरुड़धारी भगवान… धनुषधारी भगवान… सूर्य का तेज लिए भगवान… कहने को तो सूर्यवंशी कह सकते हैं… अब इधर भारत में 18 पुराण में से एक पुराण ‘गरुड़ पुराण’ भी है. जो किसी की मृत्यु के पश्चात हम आत्मा शांति के लिए पाठ करते हैं… दूसरी बात कि गरुड़ भगवान विष्णु के वाहन रहे है… हमारे बूढ़ा बाबा (महादेव) का वाहन भी हम गरुड़ को ही मानते हैं.

बौद्ध काल में तुर्की के मैदानी इलाकों से (असुर साम्राज्य) से बहुत ही बर्बर जातियों के आक्रमणकरी शक, हूण आदि आते थे, जो कत्ले-आम करते हुए खूब लूटपाट रक्तपात करते थे और चले जाते थे… इनसे आर्यावर्त के सीमांत राज्य बहुत ही परेशान रहते थे… इन बर्बरों को नागार्जुन ने बौद्ध धर्म में दीक्षित कर थोड़ा सभ्य बनाया… जो थोड़े से बने वो बने… लेकिन बाकी सब को इस्लाम ने अपने लपेटे में ले लिया और इसके बाद तो ये और भी बर्बर हो गए. और इन्होंने सीमांत राज्यों को पार करते हुए मुख्य भूमि पर भी रक्तपात शुरू कर दिए.

झारखंड के जंगलों में असुर?

सिंधु घाटी सभ्यता को जलाने वाले यही असुर थे… बाद में जब हमने फिर स्थिर हो तक्षशिला, विक्रमशिला, नालंदा विश्वविद्यालय जैसी संस्थाओं का निर्माण किया तो इसको भी जलाने वाले उन्हीं असुरों के वंशज थे… और वे झारखंड के जंगलों में असुर खोज रहे हैं?

अभी एक बहुत हल्का सा उदाहरण लीजिये…

मेरे गाँव का एक लड़का क्रिकेट खेलते हुए मस्त लंबे-लंबे छक्के मारता है… सब उसको धोनी-गांगुली न बोल के ‘पोलार्ड-पोलार्ड’ बोलते है.. और उ लइका अब पोलार्ड के ही नाम से जाना जाता है.

अभी एक जगह हत्या हुई जिसमें आदमी का सर धड़ से अलग कर दिया गया था… सबके मुँह से यही निकल रहा था… “साला एकदम ISIS वलेन जइसन काट दिया है बे!!”

तो इसमें कौन सी आश्चर्य की बात है कि ऐसा कुछ जब होता होगा तो लोगों के मुँह से अनायास ही निकलता होगा.. “साला एकदम असुरे हो का बे!!”

अब कभी-कभी क्या होता है कि कुछ कलर-कॉम्प्लेक्शन्स से पीड़ित लोग हमको वेस्ट-इंडीज़ के लोगन से तुलना कर देता है.

“एकदम्मे असुर हो का बे!”

अब चूँकि बाइबिल के अनुसार हैम की औलादों को शेम और जेफेथ के औलादों की सेवा करनी ही थी तो उनकी सेनाओं में इन हैम की औलादों की संख्या बहुतायत में होती थी..!!.. मारना-काटना, क्रूरता खूब होती थी… ट्रेनिंग ही इन्हें ऐसा दी जाती थी! अब जैसा हमको बोल देते हैं वैसा ही कभी कह के चिढ़ाते होंगे “एकदम्मे असुर हो का बे!!”

बाकी का आगे तो समझ ही गए होंगे.

अभी भी इन असुरों के गुण गए नहीं है… इनके फ़ॉलोवर्स तो और उछल-उछल के आसुरी गुण प्रकट करते रहते हैं… बूढ़े-बुजुर्ग ऐसे ही इनकी एक्टिविटी से असुर न कहते होंगे… और कुछ आसुरी विधा से प्रभावित बुद्धिजीवी (सीधा-सीधी वामपंथी समझिए) झारखंड के जंगलों में जा के असुर ढूंढ़ रहे हैं.

असुर-एक खोज…. देवासुर संग्राम फिर से होना माँगता भाऊ.

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