देश की अस्मिता बचाने, वामपंथी माफिया से लेखकों का संरक्षण करे सरकार

हिंदुस्तान में आज़ादी के बाद से कायदे का साहित्यकार सिर्फ उसी को माना गया जो मार्क्सवाद से प्रभावित होकर लिखे. गरीबी, उत्पीड़न, हिन्दुओं के कर्मकांड, अंधविश्वास, जातिगत असमानतायें और बुराईयों पर जमकर लिखे, जिससे उसके वामपंथ के सेवक होने की पुष्टि हो सके. ऐसे ही लेखकों को बढ़ावा मिला और नवलेखक भी गाहे ब गाहे … Continue reading देश की अस्मिता बचाने, वामपंथी माफिया से लेखकों का संरक्षण करे सरकार