क्रांतिधर्मी संतत्रयी : जयप्रकाश, नानाजी देशमुख, राममनोहर लोहिया

जयप्रकाश नारायण, नानाजी देशमुख और राममनोहर लोहिया के बीच समानता तो है, एतदर्थ इन तीनों को निःसंकोच तुलना-त्रयी कहा जा सकता है. तीनों समाजवादी हैं, किन्तु राष्ट्रवादी हैं. तीनों को हिंदुत्व संस्कृति भायी हैं, किन्तु धर्मनिरपेक्षता को वे ‘मिस’ नहीं कर सकते थे. तीनों को सत्ता से मोह नहीं था, चाहते तो केंद्रीय सत्ता में अहम किरदार निभा सकते थे! परंतु जेपी प्रधानमंत्री नहीं बने, नानाजी का नाम मोरारजी-मंत्रिमंडल के लिए शामिल होने पर भी वे उधर नहीं गए. …. और लोहिया जी की बात ऐसे ही निराली है. तीनों भारत के रत्न हैं, हालांकि भारत सरकार ने जेपी को ही ‘भारत रत्न’ के लिए चुना. खैर, यही तो राजनीतिक मीमांसा और पिपासा जो है!

11 अक्टूबर : जयप्रकाश और नानाजी की जयंती है, तो इसी तारीख को लोहिया जी की पुण्यतिथि. जेपी यानी जयप्रकाश ने छात्र आंदोलन में शरीक होकर गुजरात से लेकर जहाँ बिहार में अब्दुल गफ़ूर की सरकार को उखाड़ फेंकने को लेकर जैसे सिर पर क़फ़न ही बांध लिये. विख्यात फ़ोटोग्राफ़र रघु राय के चित्रों में दर्ज़ जिस लाठी की मार से जेपी गंभीर रूप से घायल हुए, उनके लिए क़फ़न ही साबित हुई और यही तो ‘सम्पूर्ण क्रांति’ की आग़ाज़ साबित हुई, जिसने प्रियदर्शिनी इंदु गांधी की चूलें हिला कर रख दी.

इसी बीच लोहिया भी इंदु से हिसाब मांगने लगे. बकौल लोहिया– ‘ज़िंदा कौमें पाँच बरस इंतज़ार नहीं करती.’ …. तो महाराष्ट्रीयन नानाजी ने भारत भ्रमण कर तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बतौर प्रवक्ता बन समाजवादी राष्ट्रवाद का प्रचार-प्रसार कर देशभक्ति की लौ जगा दी. नानाजी की 101 वीं जयंती वर्त्तमान भारत सरकार के माने तो अहम है, जिनमें सिद्धांत और प्रतिबद्धता अनोखापन लिए है. हालांकि लोहिया के अंदर आर एस एस का आदर्शवाद रूप गृह था, किन्तु जब गांधीजी की हत्या पर आर एस एस को घसीटा गया था, तो जेपी ने डंके की चोट पर न केवल आर एस एस का बचाव किया था, अपितु चट्टान की भांति अडिग होकर कहा था– ‘अगर वो अपराधी है, तो मैं भी अपराधी हूँ.’

जेपी की जन्मस्थली मूलतः बिहार के सारण (छपरा) जिले के सिताब दियारा है, तथापि इस दियारा का कुछ हिस्सा उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में भी है. कुल मिलाकर तीनों की हृदयस्थली बिहार और उत्तर प्रदेश रही हैं !

राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर ने जेपी को लेकर कई कविताएँ लिखी है, किन्तु स्वयं जेपी ने चंडीगढ़ जेल में 9 अगस्त 1975 को जो कविता खुद पर लिखी थी, वह प्रस्तुत कविता वर्त्तमान बोध में जेपी, नानाजी, लोहिया यानी तीनों के प्रसंगश: सटीक अवधारित होती है, द्रष्टव्य :-

“जीवन विफलताओं से भरा है,
सफलताएँ जब कभी आईं निकट,
दूर ठेला है उन्हें निज मार्ग से.

तो क्या वह मूर्खता थी ?
नहीं.

सफलता और विफलता की
परिभाषाएँ भिन्न हैं मेरी !

इतिहास से पूछो कि वर्षों पूर्व
बन नहीं सकता प्रधानमन्त्री क्या ?
किन्तु मुझ क्रान्ति-शोधक के लिए
कुछ अन्य ही पथ मान्य थे, उद्दिष्ट थे,
पथ त्याग के, सेवा के, निर्माण के,
पथ-संघर्ष के, सम्पूर्ण-क्रान्ति के.

जग जिन्हें कहता विफलता
थीं शोध की वे मंज़िलें.

मंजिलें वे अनगिनत हैं,
गन्तव्य भी अति दूर है,
रुकना नहीं मुझको कहीं
अवरुद्ध जितना मार्ग हो.
निज कामना कुछ है नहीं
सब है समर्पित ईश को.

तो, विफलताओं पर तुष्ट हूँ अपनी,
और यह विफल जीवन
शत–शत धन्य होगा,
यदि समानधर्मा प्रिय तरुणों का
कण्टकाकीर्ण मार्ग
यह कुछ सुगम बन जावे !”

–इसके साथ ही तीनों महापुरुषों व क्रांतिधर्मी संतत्रयी को हम जैसे शून्य में लीन राष्ट्रसेवकों की ओर से सादर आदरांजलि. श्रद्धा सुमन.

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सदानंद पॉल (SADANAND PAUL) शिक्षाविद् , साहित्यकार, पत्रकार, गणितज्ञ, नृविज्ञानी, भूकंपविशेषज्ञ, RTI मैसेंजर, ऐतिहासिक वस्तुओं के संग्रहकर्ता हैं. स्वतंत्रतासेनानी, पिछड़ा वर्ग, मूर्तिकार, माटी कलाकार परिवार में 5 मार्च 1975 को कटिहार, बिहार में जन्म हुआ. पटना विश्वविद्यालय में विधि अध्ययन, इग्नू दिल्ली से शिक्षास्नातक और स्नातकोत्तर, जैमिनी अकादेमी पानीपत से पत्रकारिता आचार्य , यूजीसी नेट हिंदी में ऑल इंडिया रैंकधारक, भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय से रिसर्च फेलो. 11 वर्ष में महर्षि मेंहीं रचित सत्संग योग की समीक्षा पर नेपाल के प्रधानमन्त्री कुलाधिपति श्री एनपी रिजाल से आनरेरी डॉक्टरेट कार्ड प्राप्त, पटना विश्वविद्यालय पीइटीसी में हिंदी अध्यापन 2005-07 और 2007 से अन्यत्र व्याख्याता, 125 मूल्यवान प्रमाणपत्रधारक, तीन महादेशों की परीक्षा समेत IAS से क्लर्क तक 450 से अधिक सरकारी,अकादमिक,अन्य परीक्षाओं में सफलता प्राप्त. 23 वर्ष की आयु में BBC लंदन हेतु अल्पावधि कार्य , दैनिक आज में 14 वर्ष की अल्पायु में संवाददाता, 16 वर्ष में गिनीज बुक रिकार्ड्स समीक्षित पत्रिका भूचाल और 18 वर्ष में साप्ताहिक आमख्याल हेतु लिम्का बुक रिकार्ड्स अनुसार भारत के दूसरे सबसे युवा संपादक, विज्ञान-प्रगति हेतु प्रूफएडिटिंग, बिहार सरकार की ज़िलास्मारिका कटिहार विहंगम-2014 के शब्दसंयोजक, अर्यसन्देश 2015-16 के ग्रुपएडिटर.

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