100 लीटर दूध का दही जमाने, सिर्फ एक चम्मच जाग काफी, बस गर्म रखिये माहौल

आज से कोई 20 साल पुरानी बात है. मैं और मेरी धर्मपत्नी, हम दोनों कश्मीर गए थे और श्रीनगर के लाल चौक स्थित Tyndale Biscoe Mallinson स्कूल के प्रिंसिपल जनाब परवेज़ कौल साहब के मेहमान थे. स्कूल ने मुझे Teachers Day पर Stress Management पर एक लेक्चर देने के लिए आमंत्रित किया था.

शाम को उनके ड्राइंगरूम में कॉफ़ी पीते उन्होंने मुझे एक किस्सा सुनाया, जो तब का था जब कि वो नए-नए सोनीपत से श्रीनगर आये थे और कश्मीर के तौर तरीकों से अभी परिचित नही थे. सुबह स्कूल की Morning Assembly में वो बच्चों को संबोधित कर रहे थे.

उसी शाम भारत-पाकिस्तान का वन डे मैच होने वाला था, सो प्रिंसिपल साहब ने बस यूं ही बच्चों से पूछ लिया कि “आज शाम को तो बड़ा मज़ेदार मैच है… Who do you think is going to win the match…”, और 4000 बच्चों के मुख से आवाज़ आयी… पाकिस्तान… सोनीपत हरियाणा से आये व्यक्ति के लिए ये बड़ी स्तब्धकारी घटना हो सकती है. उन्होंने मुझे बताया कि “अजीत, बोलते समय ये याद रखना कि तुम काश्मीर में हो और यहां राष्ट्र गान (National Anthem) नहीं गाया जाता”.

कश्मीर की फ़िज़ा धीरे धीरे दबे पांव बदल रही है… ये वही कश्मीर है जहां बच्चा-बच्चा पाकिस्तान के जीतने की कामना करता है और जहां तिरंगा फहराने और राष्ट्रगान गाने के लिए कभी मुरली मनोहर जोशी और मोदी जी को एकता यात्रा निकालनी पड़ी थी और पूरी भारत सरकार के भारी सुरक्षा बंदोबस्त के बीच बमुश्किल 4 या 5 लोगों को लाल चौक तक ले जा के फौजी सुरक्षा में तिरंगा फहराया गया था.

उसी कश्मीर में आज दिल को सुकून देने वाली एक नई घटना हुई. किश्तवाड़ के Sr Secondary School में, आज सुबह लगभग सवा दस बजे, JKAS बोले तो Jammu Kashmir Administrative Services के Assistant Commissioner (Revenue) सैयद अली खान औचक निरीक्षण के लिए स्कूल पहुंचे. तभी राष्ट्रगान शुरू हो गया. सैयद अहमद खान राष्ट्रगान के अवहेलना करते हुए, छात्रों के बीच से होते हुए सीधे कार्यालय में घुस गए.

राष्ट्रगान खत्म कर स्कूल के लड़के भी उनके पीछे-पीछे कार्यालय में जा पहुंचे और उनसे जवाब तलब किया कि जनाब आप राष्ट्र गान के समय उसके सम्मान में सावधान खड़े क्यों नही हुए? आपके जैसा जिम्मेवार पद पर बैठा अधिकारी ऐसा व्यवहार करके हम स्टूडेंट्स को क्या संदेश देना चाहता है? आपके इस व्यवहार से हम क्या शिक्षा लें?

ACR महोदय कोई संतोषजनक उत्तर तो नही दे सके, लगे उल्टे स्टूडेंट्स को ही तड़काने हड़काने भड़काने… पर लड़कों ने तड़कने भड़कने से इनकार कर दिया और उनको उसी कार्यालय में बंद करके पहले तो बहुत कायदे से हूरा और थूरा और फिर उसी कार्यालय में बंद कर दिया.

अंततः स्थानीय थाने से पुलिस बल ने आ के सैयद अहमद खान साहब को मुक्त कराया और उनको स्टूडेंट्स के चंगुल से छुड़ाने के लिए पुलिस को हल्का बल प्रयोग मने लाठी चार्ज भी करना पड़ा.

यहां गौर तलब ये है कि किश्तवाड़ जम्मू रीजन का एक मुस्लिम बहुल क्षेत्र है जहां लगभग 60% से ज़्यादा संख्या मुस्लिम है और उस स्कूल में पढ़ने वाले वो लड़के भी ज़्यादातर मुसलमान ही थे, ACR साहब को राष्ट्रगान और तिरंगे का सम्मान करने का पाठ पढ़ाने वाले लड़के भी ज़्यादातर मुसलमान ही थे.

इसी से मिलती जुलती घटना 4 दिन पहले किश्तवाड़ के ही Degree College में हुई जहां एक प्रोफेसर ने जब हिन्दू देवी-देवताओं के विरुद्ध जब कुछ अपमानजनक टिप्पणियां की तो वहां भी लड़कों ने उनको धर्मनिरपेक्षता का पाठ पढ़ा दिया. उनके खिलाफ भी थाने में तहरीर दी दी गयी है, हालांकि अभी तक उनके खिलाफ पुलिस और प्रशासन ने कोई कार्यवाही नही की है.

4 दिन पहले अगर कार्यवाही हो गयी होती तो शायद सैयद अहमद खान साहब को अक्ल आ गयी होती और आज वो पिटते नही.

सोचने विचारने वाली बात ये है कि पिछले कुछ सालों में कश्मीर में आखिर बदला क्या है…. बदलाव ये आया है कि कश्मीर में दो किस्म के मुसलमान हैं… एक वो जो बाहर से यानी अरब और इराक से यहां आए और उन्होंने कश्मीर की स्थानीय हिन्दू जनता, कश्मीरी पंडितों, राजपूतों, और अन्य जातियों को मुसलमान बनाया.

कश्मीर का देसी मुसलमान धीरे-धीरे मुख्य धारा में लौट रहा है या लौटना चाहता है, पर ये जो सैयद, गिलानी, जिलानी जैसे नामों वाले लोग असली पाकिस्तान परस्त हैं, इनके चंगुल से आम कश्मीरी को बाहर निकालने की ज़रूरत है.

आज सुबह स्कूल में पिटने वाले महोदय भी सैयद ही थे जिनको स्थानीय मुसलमानों ने पीट दिया. 100 लीटर दूध की दही जमाने के लिए सिर्फ एक चम्मच जाग ही पर्याप्त होता है और वो जाग पड़ चुका है. बस माहौल गरमाये रखिये.

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