अमिताभ जन्मोत्सव : Black, जिसने अमिताभ के चरित्र को दिया नया उजाला

कहते हैं बरगद के नीचे घास नहीं उगती क्योंकि उसका व्यक्तित्व इतना बड़ा होता है कि उसकी छांव में कोई और पौधा सर नहीं उठा पाता. अमिताभ के घर मे श्री हरिवंशराय बच्चन जी जैसा बरगद पहले ही था, पर अमिताभ ने इस वट वृक्ष व्यक्तिव के सामने स्वयं को पर्वत समान कर लिया.

खैर अलग-अलग पीढ़ी के लोग अलग-अलग फिल्मों के लिए जानते हैं कुछ लोग अमिताभ को शोले, कुली, मुकद्दर का सिकन्दर के लिए जानते है, तो कुछ अमिताभ को बागवान बाबुल के लिए जानते हैं. पर मैं उन्हें एक ही फिल्म के लिए याद करना चाहूंगा वो थी 2005 में आई एक मूवी BLACK.

अमिताभ और रानी मुखर्जी अभिनीत इस फ़िल्म में आएशा कपूर ने माइलस्टोन अभिनय किया था. उस मूवी को मैंने एक बार ही देखा. पर उसका एक एक संवाद और दृश्य आज भी मेरी आँखों के सामने है.

एक अंधी, बहरी, गूंगी लड़की, चीखती चिल्लाती अपने उस अंधेरे से लड़ती, जिस अंधेरे से उसे लड़ना आता ही नहीं. एक ऐसी दुनिया में जीने को मजबूर जहां न शक्ल है ना आवाज़ ना शब्द. आएशा कपूर ने उस विवशता और झुंझलाहट को इतना सजीव बना दिया के एक पल को खुद को अंधा, बहरा और गूंगा पाया.

तभी अमिताभ जो के मूक बधिरों के टीचर हैं आकर अंधेरे और सन्नाटे से जूझती उस लड़की का हाथ अपने होठों पर रख कर पहला शब्द बोलते हैं “वॉटर”. और जैसे अचानक लड़की के आस पास के नीम अंधेरे में चीज़ें नाम और शक्ल लेने लगती हैं. वो चीज़ों को छूती है फिर अमिताभ के होठों को और अमिताभ उसे एक एक शब्द देते जाते हैं. जिसे वो सुन नहीं सकती सिर्फ छू सकती है. और उसके आस पास एक दुनिया शक्ल लेने लगती है.
…. कमाल है शब्दों को स्पर्श से सिखाना… है ना अद्भुत.

फिर आता है वो क्षण जब अमिताभ अल्जाइमर के चलते अपनी याददाश्त खो देते हैं. और बोलने, सुनने और देख सकने के बाद भी सारी परिभाषाएँ खत्म हो जाती है.

तब वही पागल, अंधी, बहरी, गूंगी स्टूडेंट उनका हाथ अपने होठों पर रख कर बीज मंत्र फूंकती है “वॉटर” और बैकग्राउंड में रानी मुखर्जी का डायलॉग कि मैं तुम्हें वो सारे शब्द वापिस दूंगी जो तुमने मुझे सिखाए थे.

मैं आज भी इस दृश्य को देखता हूँ तो आंखे भीग जाती हैं.

एक प्रेम कहानी ना होते हुए भी कितना प्रेम, बिना एक्शन के भी कितना रोमांच है इस मूवी में. और मैं शर्त लगा सकता हूँ अगर ये किरदार अमिताभ ने न किया होता तो ब्लैक मूवी ऐसा विराट प्रभाव पैदा ही न कर सकती.

सदी के इस महान नायक को जन्मदिन की शुभकामनाएं. मैं सौभाग्यशाली हूँ कि मैंने ऐसे कलाकार के समकालीन वक्त में सांस ली है.

Happy Birthday to Amitabh Sir

जन्मोत्सव : रेखा जहां पर ख़त्म होती है, वहां से शुरू होते हैं अमिताभ

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY