ગુજરાતની ५ માતાઓ એ લીધાં લાડીલા વડા પ્રધાન મોદીજી નાં ઓવારણા

Modi In Disa Gujarat

ગુજરાતની ५ માતાઓ એ લીધાં લાડીલા વડા પ્રધાન મોદીજી નાં ઓવારણા… – क्या आप जानते हैं इसे हिन्दी में क्या कहते हैं… इसका अर्थ होता है गुजरात की 5 मांओं ने अपने प्रिय प्रधानमंत्री मोदीजी की सर से बलाएं उतारी…

आपने घर की बुज़ुर्ग महिलाओं को अक्सर अपने बच्चों की बलाएं अपने सर लेते हुए देखा होगा… ये मात्र एक परम्परा नहीं है.. इसके पीछे उन महिलाओं की अनकही दुआएं हैं… कि हमारे प्रिय प्रधानमंत्री आप अपनी राह पर ऐसे ही आगे बढ़ते रहो…. इस राह में आने वाली आपकी सारी मुश्किलों को हम अपने सर लेते हैं…

क्या हम आप यही नहीं कर रहे… आज मोदीजी के हर फैसले के विरोध में उतर आए हर व्यक्ति, चाहे सोशल मीडिया का हो, MSM का हो, या राजनेता हो… हम सब मिलकर एक एक का मुंह तोड़ जवाब दे रहे हैं…

साल भर होने आया है नोट बंदी को लेकिन इतने विरोध के बाद भी किसी ने हार नहीं मानी है… हम अपने प्रिय प्रधानमंत्री की राह में आने वाली हर बला को अपने सर लेते हुए संघर्ष कर रहे हैं…

तभी तो डीसा की धरती पर खड़े होकर पिछले वर्ष प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था – मैं आपके बीच में प्रधानमंत्री के रूप में नहीं, इस धरती की संतान के रूप में आया हूं. इस मिट्टी ने मुझे बड़ा किया है.

वही माँएं जब अपने बटुए में से बैंक के कार्ड्स निकालकर दिखाती हैं तो जो अनकहा रह जाता है, वो यही है कि जब हम जैसे छोटे मोटे कुटीर उद्योग चलाने वाले भी अब तो कार्ड से पैसों का लेन देन करते हैं… तो हमारे प्रिय प्रधानमंत्री आप तो आगे बढ़ते रहिये … आपके सर की सारी बलाएं हमारे सर…

जब नए नए मुख्यमंत्री बने थे तब की बात बताते हुए मोदीजी कहते हैं कि लोग तब भी उनका विरोध करते थे, मज़ाक उड़ाते थे कि ये आदमी कुछ नहीं कर पाएगा… और इसी डीसा की धरती पर इसी मैदान में उन्होंने अपना पहला सार्वजनिक कार्यक्रम किया था… तब भी लोगों का हुजूम उन्हें सुनने आया था और आज वो कई कई गुना बढ़कर उनके सामने उन्हें सुन रहा है…

इसके पीछे भी जो अनकहा है वो यही है कि आपने सब्र दिखाकर मेरा साथ दिया, मुझ पर विश्वास किया, तो आज बनासकांठा की बंजर भूमि पर पानी ही नहीं, दूध की नदिया बह रही है…..

माननीय प्रधानमंत्री… यूं तो आपका हर भाषण मेरे अंतस के तार को झंकृत कर जाता है और आप ही की तरह राष्ट्र के लिए जीवन को समर्पित करने के संकल्प को और दृढ़ करता है… लेकिन एक गुजराती होने के नाते जो विशेष वहाल आपके प्रति उस दिन जगा वो उस धरती के कारण ही जगा है जिसकी आप खुद को संतान बताते हैं…

मेरे गुजरात और गुजरात की इन पांच माँओं की तरफ से ही नहीं, बल्कि प्रकृति माँ के पांच तत्वों को साक्षी रखकर हम स्त्री शक्ति की तरफ से एक बार फिर मैं आपके सर से ઓવારણા लेती हूँ ताकि आपके सर की सारी बलाएं हमारे सर हो जाए… और आप हम सब की माँ, माँ भारती की सेवा निर्विघ्न रूप से करते रहें….

– माँ जीवन शैफाली

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