दीपावली पर पटाखे प्रतिबंधित : क़ानूनपालिका को कानून से ही बाध्य करें

‘क़ानूनपालिका’ ने जो किया वो अवैधानिक भले ही न हो किन्तु न्यायसंगत तो बिल्कुल नहीं है. इसी ‘क़ानूनपालिका’ ने इस्लामिक मूल्यों को छेड़ने का साहस (तीन तलाक़ का खात्मा) अभी-अभी दिखलाया है जिससे कुछ हद तक पंथनिरपेक्षता पर विश्वास बढ़ा है. फ़िर भी ‘क़ानूनपालिका’ को इस्लामी एवं ईसाइयत से जुड़े ढकोसलों को छेड़ने में बहुत हिम्मत दिखानी बाकी है.

हिन्दू समाज दीपावली के पटाखों पर प्रतिबंध से उतना आहत नहीं है जितना बक़रीद की अस्वस्थ परम्परा एवं न्यू ईयर इव पर होते प्रदूषण पर ‘क़ानूनपालिका’ की चुप्पी से होता रहा है.

मैं समझता हूँ कि ‘क़ानूनपालिका’ के पटाखों पर लगाये गए प्रतिबंध का स्वागत करना चाहिए, साथ ही अपने ही राजनैतिक नेतृत्व पर दबाव बनाना चाहिए कि वह अन्य समुदायों की अस्वस्थ परम्पराओं को कानून बनाकर प्रतिबंधित कर दे.

ऐसे में कथित ‘क़ानूनपालिका’ भी तो मजबूर होकर संयमित व्यवहार करेगी, क्योंकि वह न्याय /अन्याय की नहीं बल्कि कानून की संरक्षक मात्र है.

हिन्दू समाज को यह परिपक्वता दिखानी होगी. अजान के शोर का जवाब DJ से देने की परंपरा हिन्दू समाज बहुत दिनों तक स्वीकार नहीं करेगा.. ‘क़ानूनपालिका’ को कानून से ही बाध्य करें.

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मेकिंग इंडिया के प्रबुद्ध लेखकों की तात्कालिक प्रतिक्रियाएं :

डॉ राजीव मिश्र : कोर्ट की अवमानना नाम की कोई चीज़ होती है, सुना है… जो कोर्ट एक मुकदमे का निर्णय देने में 50-50 साल लगाती हो, जो कोर्ट आतंकियों के लिए 2 बजे रात में खुल जाती हो, जो कोर्ट एक बिगड़ैल सिनेमा एक्टर को जमानत देने के लिए सारे नियम कानून ताक पर रखकर बैठी होती हो, पर एक निर्दोष देशभक्त सैनिक को बिना किसी आधार के एक आतंकवादी की तरह 8 साल जेल में रखे जाने पर न जागती हो… उसकी जो भी बची खुची इज्जत है, वह उतार ही ली जाए इस दीवाली में… हो ले अवमानना…
गिरधारी लाल गोयल : तम्बाखू से कैंसर होता है, ट्रैफिक से एक्सिडेंट होने में मौत होती हैं, शराब से फेफड़े गलते हैं, लिवर खराब होता है, मी लॉर्ड इनको भी रोकिए ना!
धीरज भार्गव : जिस प्रकार जल्लीकट्टू पर अध्यादेश लाकर केन्द्र सरकार ने तमिलनाडु के हिन्दुओं को राहत दी थी, उसी प्रकार कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ अध्यादेश जारी कर हिन्दुओं को अपना त्यौहार स्वतंत्रता के साथ मनाने का अधिकार देना चाहिये… यदि इस केन्द्र सरकार को विकास पैदा करने से फुरसत मिल गई हो, इसमें अब भी थोड़ा हिंदू प्रेम बचा हो तो.

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