अपने ही देश में हिंदूओं को अपना त्यौहार स्वतंत्रता के साथ मनाने का अधिकार क्यों नहीं!

सरकार, संसद, कानून और सेना के होते हुए भी करोड़ो बांग्लादेशी/रोहिंग्या देश और दिल्ली में घुसकर डॉ नारंग की हत्या, लूट/आगजनी कर सकते हैं. कोलकाता में हाई कोर्ट के आदेश के बाद भी पुलिस अनुमति के नाम पर 1 अक्टूबर को दुर्गा प्रतिमा का विसर्जन रोका जा सकता हैं. रोहिंग्याओं के समर्थन में मुम्बई के आजाद मैदान में महिला पुलिसकर्मियों के कपड़े फाड़े जा सकते हैं. शहीद स्मारक को तोड़ा जा सकता है. तब ये सेकुलर कोर्ट और जज चुपचाप बैठे रहते हैं. कश्मीरी हिन्दुओं की सुप्रीम कोर्ट में याचिका इस आधार पर रद्द कर दी जाती है कि इतने सालो बाद गवाह और सबूत कहां मिलेंगे. पर याकूब के लिये मिलॉर्ड रात 2 बजे कोर्ट में सुनवाई के लिये पहुंच जाते हैं!

वैसे प्रदूषण तो पेट्रोल, डीजल, कीटनाशक, धर्मस्थलों पर 5-5 बार दिनभर शोर मचाने, पशुओं की हत्या और बूचड़खानों से भी होता है, तो क्या कोर्ट ने दिल्ली में इस पर भी रोक लगा दी है?जबकि यूपी में अवैध बूचड़खाने बंद करने को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने योगी सरकार के आदेश को अवैध ठहरा दिया था!

3 तलाक के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा था कि यदि ये धर्म से जुड़ा मुद्दा होगा तो वो इस मामले की सुनवाई नहीं करेगा. पर जब पूरे देश के राष्ट्रवादियों और प्रबुद्ध वर्ग ने सोशल मीडिया पर इस सेकुलर न्यायपालिका को गरियाया तब मीलॉर्ड की आंखे खुली!

मप्र सहित देश के अनेक राज्यों में पॉलिथीन बेन हैं पर हर जगह उसका खुलेआम इस्तेमाल हो रहा है. फसल कटने के बाद खेतो में बचे अवशेषों को जलाने पर रोक है पर पंजाब सहित पूरे देश में खेतों में बचे ये अवशेष जलाये जा रहे हैं और पूरे देश में जमकर प्रदूषण फैलाया जा रहा हैं कानून और प्रशासन को ताक पर रखकर. तो हम भी दिवाली वाले दिन दिल्ली और पूरे देश में जमकर फटाके फोड़कर इस सेकुलर कोर्ट और जज को उसकी हैसियत बता सकते हैं. हर कानून के पालन करने का ठेका केवल एक वर्ग ने नहीं ले रखा है!

जिस प्रकार जल्लीकट्टू पर अध्यादेश लाकर केन्द्र सरकार ने तमिलनाडू के हिंदूओं को राहत दी थी. उसी प्रकार कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ अध्यादेश जारी कर हिंदूओं को अपना त्यौहार स्वतंत्रता के साथ मनाने का अधिकार देना चाहिये यदि इस केन्द्र सरकार को विकास पैदा करने से फुरसत मिल गई हो इसमें अब भी थोड़ा हिंदू प्रेम बचा है तो.

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