घर में नहीं हैं दाने, मां-बेटा चले भुनाने

पूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी के पुत्र और काँग्रे उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा है कि 6 महीने में देश बदल दूंगा. यह सुनते ही मुझे अमेठी का वो लोकसभा क्षेत्र याद आ गया जिस पर पिछले 37 सालों से राहुल गांधी परिवार का कब्ज़ा है.

ध्यान रहे कि इन 37 वर्षों में उत्तरप्रदेश में 10 साल तक कांग्रेस की पूर्ण बहुमत की सरकार रही तथा लगभग 17 वर्षों तक कांग्रेस के राजनीतिक गठबंधन साथियों सहयोगियों की सरकार रही. अर्थात इन 37 वर्षों में लगभग 27 वर्षों तक कांग्रेस का उत्तरप्रदेश की सत्ता में परोक्ष अपरोक्ष दखल रहा.

यही नहीं, पिछले 37 वर्षों में से 25 वर्षों तक देश में कांग्रेसी प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार भी रही. लेकिन इस दौरान देश या प्रदेश की बात तो छोड़िए. केवल एक उस अमेठी लोकसभा क्षेत्र की हालत नहीं बदल सका गांधी परिवार जिस अमेठी की जनता उन्हें लगातार 37 वर्षों से चुनकर संसद भेजती रही.

पिछले 13 वर्षों से तो स्वयं राहुल गांधी ही अमेठी का सांसद है. लेकिन राहुल गांधी तो छोड़िए, पूरे गांधी परिवार ने अमेठी की हालत को इस तरह सुधारा है कि आज भी वहां की हालत यह है कि लगभग 17 लाख मतदाताओं वाले अमेठी लोकसभा में नल के द्वारा स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति दुर्लभ है.

बिजली, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य सरीखी सुविधाओं की धज्जियां उड़ी हुई नजर आती हैं.

जो आदमी केवल 17 लाख मतदाताओं वाले अपने एक लोकसभा क्षेत्र के लोगों के लिए 13 वर्षों में पीने के साफ पानी के नल की, स्कूल, अस्पताल, बिजलीघर की, सड़क की व्यवस्था नहीं कर सका, वो 125 करोड़ लोगों के देश को 6 महीने में बदल देने का दावा कर रहा है.

ऐसे आदमी के ऐसे दावे को लोगों की आंखों में धूल झोंकने की कोशिश के सिवाय क्या समझा जाए?

अतः क्योंकि अमेठी की हकीकत कई बार आंखों से देख-सुन चुका हूं इसलिए 6 महीने में देश बदल डालने का राहुल गांधी का दावा जब देखा-सुना-पढ़ा तो अमेठी बहुत याद आयी और मुंह से बरबस ही निकल पड़ा कि…

घर में नहीं हैं दाने, मां-बेटा चले भुनाने…

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