जिनपर आयकर विभाग के छापे पड़ रहे, वो कहेंगे ‘नोटबंदी फेल या पास’

Rabies kumar को मैं यूँ ही नही महान पत्तलकार कहता हूँ. नेता-परेता नोटबन्दी को असफल बताते हैं. पर उनको मैं दोष नही देता. वो विपक्ष में बैठे हैं. सरकार के कामों की आलोचना करना उनका काम है. पर Rabies कुमार पत्रकार है. एक प्रमुख न्यूज़ चैनल का प्रधान संपादक है.

वह चैनल के नीति नियंताओं में है. उसका काम है सिर्फ और सिर्फ सच बोलना. ना काहू से दोस्ती और ना काहू से बैर… मगर Rabies कुमार गला फाड़ के रेंकता है… नोटबन्दी फेल हो गयी.

नोटबन्दी कितनी फेल हुई ये आगरा के बसंत ऑइल मिल्स के मालिक प्रमोद अग्रवाल से पूछना चाहिए. आगरा के ही बीएनआर ग्रुप के मालिक अजय अग्रवाल और उनके बेटे अनुभव अग्रवाल से पूछना चाहिए. इन दोनों से पूछो कि नोटबन्दी फेल हुई या पास हुई. मथुरा के गगन वनस्पति से पूछो की नोटबन्दी फेल है या पास. आगरा के ही केएस ऑइल्स से पूछो कि नोटबन्दी फेल है या पास.

गत 27 सितंबर 2017 मने पिछले हफ्ते इनकम टैक्स के विभाग के एडिशनल डायरेक्टर (Investigation) की 200 से ज़्यादा कर्मचारियों की टीम ने आगरा में इन चारों ग्रुप्स के आगरा, मथुरा, अलीगढ़, गाज़ियाबाद, हाथरस और दिल्ली स्थित ठिकानों पे एकसाथ छापेमारी की.

दरअसल ये लोग खुद को बहुत श्याणे समझते हैं. नोटबन्दी के दौरान इन्होंने अपने कर्मचारियों के खातों में 2-3 लाख रु जमा करा दिए. एक-एक ग्रुप में हज़ारों कर्मचारी हैं. अकेले बसंत ऑइल मिल्स ने 1000 से ज़्यादा खातों में 2-3 लाख रु जमा कराए. इसके अलावा इन्होंने सौ से ज़्यादा फ़र्ज़ी खाते खुलवा के 100 करोड़ रु से ज़्यादा की रकम बैंक्स में जमा करा दीं.

असली खेल इसके बाद शुरू हुआ. जिस कर्मचारी को 2 लाख दिए थे वो प्रतिदिन बैंक और ATM के सामने घंटों लाइन लगा के 4000 रु रोज़ाना निकाल के मालिक के पास जमा कराता था… 3 महीने वो जो बैंक्स और ATMs के सामने लंबी-लंबी लाइनें लगती थीं उनमे 80% यही लोग थे जो अपने हरामखोर मालिक का काला धन अपने खातों में छिपाते जमा कराते निकालते रहे.

रिज़र्व बैंक ने आंकड़ा दिया कि 99% कैश तो बैंक्स में वापस आ गया. कैसे आया, ये आपने देख ही लिया.

उन दिनों जब ये खेल चल रहा था, मैंने लिखा था कि मोदी सब देख के बड़ी कुटिल मुस्कुराहट मुस्किया रहे हैं.

फिर इनकम टैक्स विभाग ने अपना काम शुरू किया. वो जिन लोगों ने अपने खातों में 2-3 लाख जमा कराया था उनको बुला के डंडा किया. कहां से आया? किसका है? कर्मचारी बेचारा गरीब आदमी. हड़क गया और उसने बाकायदा affidevit दे के सेठ जी का नाम बक दिया.

27 सितंबर से आगरा में कार्यवाही शुरू हुई. बताया जाता है कि अकेले बसंत ऑइल मिल्स ने ही उस दिन 100 करोड़ रूपए कैश काला धन सरेंडर किया. इसके अलावा बेनामी संपत्तियों, फ़र्ज़ी कंपनियों, हज़ारों फ़र्ज़ी खातों में अकेले बसंत ऑइल मिल्स से ही 1000 करोड़ से ऊपर के दस्तावेज मिले हैं.

आगरा के ही बीएनआर ग्रुप की जांच में भी 1000 करोड़ से ऊपर के काले धन का पता चला है.

दिल्ली के मेरे एक मित्र जिनके बेटे इनकम टैक्स कमिश्नर हैं, उन्होंने बताया कि अकेले आगरा में ही 100 से ज़्यादा ऐसी कंपनियां आयकर विभाग के राडार पे हैं. पूरे देश में ऐसे लाखों खाते है, लाखों कंपनियां हैं.

आपने अपना 100 करोड़ रूपए का काला धन किसी गरीब के खाते में, या फ़र्ज़ी खाते में, या किसी फ़र्ज़ी कंपनी के खाते में जमा करा दिया तो इसमें नोटबन्दी फेल कहां हुई?

अबे बावले, नोटबन्दी A++ ले के, 10 CGPA ले के पास हुई.

आपने अपना काला धन बैंक में जमा करा दिया. बैंक में जमा हुए रुपये का रंग कोई काला सफेद नहीं होता. पर उस पैसे को सूँघता हुआ मोदी आपके घर आने वाला है… ठीक वैसे ही जैसे आगरा मथुरा में प्रमोद अग्रवाल और अजय अग्रवाल के घर आया.

अब जिम्मेवारी अग्रवाल जी की है कि वो अपने पैसे को कैसे white money सिद्ध करते हैं. आगरा के ही एक मित्र बता रहे थे कि अकेले आगरा से 50,000 करोड़ का काला धन और बेनामी सम्पति और फ़र्ज़ी कंपनियों का फर्जीवाड़ा निकलेगा. देश तो बहुत बड़ा है.

नोटबन्दी के बाद जो 16 लाख करोड़ रु बैंक्स में जमा हुए उसमें कितना काला है कितना सफ़ेद, ये तो मोदी सूंघ के बताएगा. उसके बाद बोलना कि नोटबन्दी फेल हुई या पास.

Rabies कुमार को मैं जो महान पत्तलकार बोल के गरियाता हूँ, वो इसीलिए कि वो सब कुछ जानते हुए भी नोटबन्दी को फेल बताता है. फेल हुई या पास, ये तो आगरा वाले बताएंगे.

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