राहुल को पता ही नहीं कि मोदी को मोदी क्यों कहते हैं

पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान नरेंद्र मोदी गुजरात के बलसाड़ के नजदीक एक चुनावी सभा को संबोधित करने पहुँचे. भाषण खत्म होने के बाद मंच पर उपस्थित उस जिले के उम्मीदवार के.सी. पटेल और उस क्षेत्र के कुछ विधायकों के साथ हाथ मिलाकर एक फोटो भी खिंचवायी जिसमें सभी ने एक दूसरे के हाथ पकड़े, हाथ ऊपर करके पोज़ दिए थे.

फोटो सेशन के बाद उनमें से एक विधायक ने मोदी के कान के पास जाकर कुछ अर्ज किया जिसका जवाब मोदी ने सिर हिलाकर हामी के रूप में दिया.

मंच से नीचे उतर कर मोदी ने देखा एक व्यक्ति अपने साथ एक वृद्ध महिला को लेकर उनके पास लाने का प्रयास कर रहा है. अपनी एसपीजी सुरक्षा की परवाह ना करते हुए मोदी, विधायक के साथ उस वृद्ध महिला तक पहुँचे और झुक कर चरण स्पर्श किए. लगभग पाँच मिनट तक बातचीत करने के बाद वे अपने हेलिकॉप्टर की तरफ बढ़ गए.

आप सोचते होंगे इसमें अनोखी बात क्या है?… तो इसमें अनोखी बात कुछ भी नहीं है… अनोखी बात अभी आगे है…

अब दूसरी घटना… यह घटना भी उसी समय के आसपास की है… यानी पिछले लोकसभा चुनाव की, और स्थान भी गुजरात ही है. कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी दाहोद लोकसभा क्षेत्र के देवगढ़ बरिया नामक स्थान पर एक चुनावी रैली को संबोधित करने पहुँचे.

राहुल मंच पर बैठे थे और उनसे थोड़ी ही दूरी पर एक महिला राहुल के सुरक्षा कर्मियों से गुहार लगा रही थी कि उसे मंच के उपर जाने दिया जाए. सुरक्षा कर्मियों ने उसे जाने नहीं दिया.

इस पर उस महिला ने अपना परिचय दिया… “मेरा नाम डॉ प्रभा किशोर तावियाड़ है और मैं इसी दाहोद लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस की प्रत्याशी हूँ. राहुल जी तक आप लोग सिर्फ संदेश पहुँचा दें.”

सुरक्षा कर्मियों ने महिला की बात नहीं मानी, इस बीच राहुल का ध्यान इस वार्तालाप की ओर गया, उन्होंने देखा भी परंतु कोई प्रतिक्रिया नहीं दी. आखिरकार वो मंच पर नहीं पहुँच पाई.

रैली खत्म होते ही राहुल गांधी अपने हेलिकॉप्टर की ओर बढ़े, डॉ प्रभा उनके पीछे पीछे दौड़ी, लेकिन जब तक वो राहुल के करीब पहुँचती वो हेलिकॉप्टर में बैठ चुके थे.

ना तो प्रभा राहुल से मिल पाईं, ना ही राहुल को ये पता चला कि वो किस प्रत्याशी के समर्थन में रैली करने आये थे?

अमेरिका के कैलिफोर्निया में जब एक प्रश्नकर्ता ने पूछा कि लोकसभा चुनाव में इतनी बुरी तरह से हुई हार की वजह क्या थी, तो राहुल ने उत्तर दिया था कि 2012 के बाद कांग्रेसी नेताओं में घमंड आ गया था और वे जमीन से जुड़े कार्यकर्ताओं से कट गए थे.

पर यहाँ सवाल है कि वे कांग्रेसी नेता कौन थे जिनमें घमंड आ गया था और लोगों से कट गए थे? कांग्रेस पार्टी में सोनिया गांधी और राहुल के अलावा और कौन है? ऐसा कौन नेता हैं जो अपनी मर्जी से कुछ कर भी सकता है जिसे वे घमंडी कह रहे हैं?

सभी नेता तो गांधी परिवार के चाकर हैं, गांधी परिवार के इशारे के बिना वे तो एक कदम नहीं बढ़ा सकते हैं. दिग्विजय सिंह, चिदंबरम, सुशील कुमार शिंदे और मणिशंकर अय्यर जैसे नेता क्या अपनी मर्जी से करतूतें करते रहे थे… या बयानबाजी करके कांग्रेस को हार दिलायी थी?

क्या राहुल अपनी माता सोनिया गांधी को घमंडी कह रहे थे या स्वयं को? उन्होंने खुद के गिरेबान में झाँक लिया होता तो आज ये बहानेबाजी की नौबत ही नहीं आती. खैर उपर वाला जो करता है अच्छा ही करता है.

राहुल से किसी ने कहा होगा कि मोदी अपने गुजरात चुनाव अभियान की शुरुआत द्वारिका से करने वाले हैं तो आनन फानन में उनकी कंपनी ने मोदी से पहले बाजी मार लेने के इरादे से द्वारिका को ही चुना और झटपट वहाँ जाकर मंदिर में पूजा अर्चना कर आए… तिलक लगी तस्वीरें मीडिया में छा गई, राहुल गांधी को लगा उन्होंने हिन्दुओं का दिल जीत लिया.

पर राहुल को नहीं पता कि मोदी को मोदी क्यों कहते हैं?

मोदी द्वारिकाधीश के दर्शन तो किए ही, द्वारिका को मैरिन ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट की सौगात भी दी, द्वारिका ओखा ब्रिज की आधारशिला रखी… लोग मोदी-मोदी करने लगे.

पहले तो जीएसटी को लागू करवा कर एवं इसके फायदे गिनवाकर देश की जनता को झुमाने वाले मोदी, आज जब जीएसटी से परेशान देश के एवं विशेषकर गुजरात के छोटे-बड़े दुकानदारों, व्यापारी वर्ग और उद्योगपतियों को जब द्वारिका की देव भूमि से झुमाया तो लोग मोदी-मोदी करते नहीं थके.

घमंड और अहंकार से कोसों दूर मोदी जब एक विधायक की वृद्ध माँ से मिलने के लिए अपने कार्यक्रम से समय निकाल सकते हैं वहीं राहुल के लिए अपनी सांसद उम्मीदवार की भी कोई फिक्र नहीं होती.

कहने का तात्पर्य कि घमंड और शो-बाज़ी तो राहुल गांधी आपके अंदर है और आप तोहमत किसी और पर लगा रहे हैं.

राहुल जी, आप गुजरात भी हारेंगे और पता है मुझे, इसका इल्ज़ाम भी आपके चाकर खुद अपने सिर पर लेकर आपको बरी कर देंगे… और यही बात आपको अपनी औकात देखने से रोकती है. आपके अंदर एक सशक्त नेता बनने के गुण नहीं है. जितना जल्दी हो सके यह बात समझ लीजिए. किसी और को पार्टी का कमान संभालने दीजिए.

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