नवल गीत : धन्नो की आँखों में रात का सुरमा और चाँद का चुम्मा

गुलज़ार ने बच्चों के मनोविज्ञान पर फिल्म बनाई थी. नाम रखा किताब. मास्टर राजू की मासूमियत से सजी बहुत ही प्यारी और समझदार फिल्म. संगीत जाहिर सी बात है कि आर डी बर्मन का ही था. फिल्म में आरडी ने एक कमाल गाना बनाया था- धन्नो की आंखों में रात का सुरमा और चांद का चुम्मा. रेल गीत. रेल के रूट में ड्राइवर की प्रेमिका का आना और ड्राइवर का इस खुशी में गाना.

इस बिल्कुल अजीब इजाद सिचुवेशन में आर डी गुलजार के बोलो को अपने खुरदरे कंठो में उतारते है. आरडी ने इस गाने में केवल एक ही इंस्टूमेंट्स को बेस रखते हुए पूरा गाना निकाल दिया था. ये साउंड किसी ने उस दौर में शायद सुना तक नही था. वो खास साउंड निकला था एक विदेशी इंस्ट्रूमेंट से जिसका नाम था फलेंगर. आर डी ने इसे भारत के बाहर किसी को बजाते सुना था और इतना पसंद आया कि इसे भारत ले आये.

खास बात ये है कि इस इंस्ट्रूमेंट फलेंगर का साउंड बड़ा बेसुरा था. स्टूडियो में पहली बार सुनते ही सबकी हंसी निकल गई पर आरडी तो आरडी थे. घुन के पक्के. जिद में इसके केवल साउंड का किसी गाने में यूज नही किया, एक पूरा का पूरा गाना ही इसके ऊपर बिठा दिया और आज इस गाने को इसके इस खास इंस्ट्रूमेंट और उससे निकले खास साउंड की वजह से ही याद रखा जाता है. आरडी इसलिए भी तो बहुत जिगरी है कि उसने हर काम को करते हुए अपने उस मौजूदा समय और दौर के टेस्ट की बजाय हमेशा आगे के समय का सोचा.

आरडी के बाद इस तरह की कारीगरी अब ए आर रहमान करते है. सबको पता ही है कि उनके सारे गानो में जो वाद्य बजते है, ज्यादातर वो प्रोग्रामिंग से ही बजते है. सॉफ्टवेयर से. मतलब लाइव रिकॉर्डिंग का इस्तेमाल रहमान ने शुरू से ही बहुत कम किया. यूं भी कह सकते हैं कि रहमान ने ही बाकी के सभी संगीतकारों को लाइव रिकॉर्डिंग की बजाय प्रोग्रामिंग में जाने का रास्ता दिखाया.

बावजूद इसके रहमान के स्टूडियो में दुनिया भर के नये तरह के वाद्य है. दुनिया के हर कोने में इस्तेमाल होने वाले किस्म-किस्म के वाद्य वो लाकर उसके साउंड का इस्तेमाल अपने इंट्रो, गैप म्यूजिक और बीट्स में करते है. हर वाद्य के साउंड और नई चीज को अपने गानो में डालने से वो कभी चूकते नहीं हैं.

दिल्ली-6 के गाने रहना तू और मिले सुर मेरा तुम्हारा के नए वर्जन मे रहमान ने इसी तरह एक बिल्कुल नये इंस्ट्रूमेंट से हमारा परिचय कराया. इस इंस्ट्रूमेंट का नाम था कन्टिनम फिंगरबोर्ड जिसे कम्प्यूटर और इलेक्ट्रॉनिक के एक इंजीनियर प्रोफेसर लिपोल्ड हेकन ने बनाया था. फलेंगर की तरह ही कन्टिनम फिंगरबोर्ड का साउंड ऐसा था कि उसे किसी फिल्मी गाने में इस्तेमाल करना मुश्किल था पर रहमान ने तो रहना तू गाने के अंत में इसे लगातार पूरे डेढ़ मिनिट तक बजाया. फिर बहुत से लाइव शो में भी रहमान इसे खुद बजाते हुए दिखे.

इस तरह के प्रयोगों से कला समृद्ध होती है. इस तरह के प्रयोगों का हमेशा स्वागत होना चाहिए. रहमान की पहली फिल्म रोजा 1992 में आई थी और आरडी की लास्ट फिल्म 1994 में. हो सकता है रोजा के गाने आरडी ने सुने हो या शायद ऐसा भी हुआ होगा कि न सुने हो. 92 से 94 के बीच के इन दो सालों में रहमान पर आरडी का कुछ भी कहा हुआ जानकारी में नहीं है पर कितना अच्छा होता अगर दोनों को एक दूसरे की सोहबत नसीब होती.

ये अक्टूबर के शुरूआती दिन है और मौसम में अब धीरे धीरे सर्दी की चरमराहट आना शुरू हो रही है. बदलता मौसम हमारे स्वभाव और आदतों पर असर डालता रहता है. बदलता मौसम कभी हमें रूमानी बनाता है तो कभी जज़्बाती. हर बदलते मौसम में हमारे सुने जाने वाले गीतों का चयन भी बदलता रहता है. अक्टूबर के ये शुरूआती दिन और ये बदलता मौसम मुबारक हो.

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