जबलपुर में शुरू हुआ मप्र का पहला कौशल विकास केन्द्र

जबलपुर. कृषि यांत्रिकी विभाग द्वारा निजी कम्पनी महिन्द्रा एण्ड महिन्द्रा के सहयोग से स्थापित प्रदेश के पहले कौशल विकास केन्द्र कृषि अभियांत्रिकी का शनिवार को प्रदेश के किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री गौरी शंकर बिसेन ने उदघाटन किया. इस अवसर पर उन्होंने ई-किसान सारथी कार्यक्रम का शुभारंभ भी किया.

लोकार्पण समारोह के मुख्य अतिथि श्री बिसेन ने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों की आय दोगुनी करने के लिए प्रतिबद्ध है और इस दिशा में फसलों की उत्पादकता बढ़ाने से लेकर लागत में कमी लाने और कृषि उत्पादों को बेहतर मार्केटिंग उपलब्ध कराने के प्रयास भी कर रही है.

किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री गौरी शंकर बिसेन ने समारोह में कहा कि केन्द्र और राज्य शासन का सारा ध्यान कृषि क्षेत्र की तरक्की पर केन्द्रित है. उन्होंने जबलपुर में निजी क्षेत्र के सहयोग से खोले गये प्रदेश के पहले कौशल विकास केन्द्र को कृषि के क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में उठाया गया ऐतिहासिक कदम बताया. श्री बिसेन ने कहा कि राज्य शासन आदिवासी और वनवासी अंचलों में भी ऐसे केन्द्र खोलेगी ताकि इन क्षेत्र के युवा भी खेती किसानी में आधुनिक यंत्रों का उपयोग, उनकी मरम्मत और रखरखाव की ट्रेनिंग ले सकें तथा इस क्षेत्र में स्वरोजगार स्थापित कर सकें.

किसान कल्याण मंत्री ने लोकार्पण समारोह में बताया कि कृषि की लागत को कम करने की दिशा में राज्य शासन ने प्रदेश भर में कस्टम हायरिंग सेंटर की स्थापना भी की है जहां से किसान कृषि यंत्रों को किराये पर लेकर उनका उपयोग कर सकेंगे. उन्होंने बताया कि कस्टम हायरिंग सेंटर युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने में भी मददगार साबित हो रहे हैं. राज्य शासन द्वारा कस्टम हायरिंग सेंटर खोलने के लिए युवाओं को 25 लाख रूपये तक का ऋण उपलब्ध कराने की योजना भी संचालित की जा रही है. श्री बिसेन ने बताया कि वर्तमान में प्रदेश में करीब 1250 कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित किये जा चुके हैं.

किसान कल्याण मंत्री ने समारोह में किसानों की आय को दोगुना करने की दिशा में शासन द्वारा किये जा रहे प्रयासों का विस्तार से जिक्र करते हुए कहा कि फसलों की उत्पादकता बढ़ाने, कृषि की लागत कम करने, कृषि उत्पादों की मार्केटिंग के साथ-साथ खाद-बीज के संतुलित उपयोग और कीट व्याधि पर नियंत्रण करने पर भी ध्यान दिया जा रहा है. उन्होंने कहा कि मिट्टी परीक्षण शाला की स्थापना इस दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है और अब तक प्रदेश भर में करीब 315 मिट्टी परीक्षण शाला स्थापित की जा चुकी हैं.

किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री गौरी शंकर बिसेन ने इस अवसर पर कृषि क्षेत्र में निरंतर अनुसंधान की जरूरत बताते हुए इस दिशा में जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के प्रयासों की तारीफ की. उन्होंने जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए भी निरंतर और अधिक अनुसंधान की जरूरत बताई. श्री बिसेन ने कहा कि खेती किसानी को लाभ का व्यवसाय बनाने सरकार प्रतिबद्ध है. खेती-किसानी के क्षेत्र में जितना काम मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में हो रहा है उतना इसके पहले किसी भी सरकार ने नहीं किया. सरकार न केवल अनुभव के साथ खेती को आगे ले जाना चाहती है बल्कि निजी क्षेत्र को भी इससे जोड़ रही है.

किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री गौरी शंकर बिसेन ने कौशल विकास केन्द्र के समारोह को संबोधित करने के पहले करीब 3 करोड की लागत से बने केन्द्र का लोकार्पण किया. उन्होंने केन्द्र का अवलोकन कर यहां उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी भी ली. इस अवसर पर संचालक कृषि अभियांत्रिकी राजीव चौधरी ने बताया कि जबलपुर में खोले गये कौशल विकास केन्द्र में युवाओं को ट्रेक्टर की मरम्मत और रखरखाव का प्रशिक्षण दिया जायेगा.

उन्होंने बताया कि निजी क्षेत्र के सहयोग से प्रदेश में ऐसे पांच कौशल विकास केन्द्र और खोले जायेंगे. संचालक कृषि अभियांत्रिकी ने आयशर कंपनी के सहयोग से शुरू किये गये ई-किसान सारथी कार्यक्रम के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इस कार्यक्रम के तहत टोल फ्री नम्बर पर प्रदेश के किसी भी क्षेत्र से फोन करने पर किसानों को आधुनिक कृषि यंत्र किराये पर उपलब्ध कराये जायेंगे. उन्होंने बताया कि जबलपुर में ई-किसान सारथी कार्यक्रम आयशर कम्पनी के सहयोग से शुरू किया जा रहा है.

तीन एमओयू पर हस्ताक्षर

कौशल विकास केन्द्र कृषि अभियांत्रिकी के लोकार्पण के अवसर पर किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री गौरी शंकर बिसेन की मौजूदगी में तीन एमओयू भी हस्ताक्षरित हुए. निजी क्षेत्र की कम्पनियों वेदा फार्म इम्पलीमेंट, महिन्द्रा एण्ड महिन्द्रा, आयशर मोटर्स के साथ हुए इन एमओयू में कृषि अभियांत्रिकी संचालनालय के साथ ट्रिपल आई.टी. जबलपुर भी एक पक्ष था.

रिसर्च फार्म का किया अवलोकन

किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री गौरी शंकर बिसेन ने कौशल विकास केन्द्र का लोकार्पण और ई-किसान सारथी कार्यक्रम का शुभारंभ करने के पूर्व जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के रिसर्च फार्म का अवलोकन भी किया. अवलोकन के दौरान श्री बिसेन ने धान और सोयाबीन की विकसित की जा रही विभिन्न प्रजातियों को देखा और इस बारे में कृषि वैज्ञानिकों से जानकारी ली.

इस मौके पर जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. व्ही.एस. तोमर भी उनके साथ थे. श्री बिसेन ने कृषि वैज्ञानिकों से चर्चा में खेती की उत्पादकता बढ़ाने और उत्पादन लागत को कम करने की दिशा में ज्यादा अनुसंधान करने की जरूरत बताई. उन्होंने जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए भी नये सेक्टर की तलाश करने और अनुसंधानों पर बल दिया.

कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती मनोरमा पटैल, क्षेत्रीय विधायक अशोक रोहाणी, भाजपा के जिला अध्यक्ष शिवकुमार पटेल, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष भारत सिंह यादव, राजा बाबू सोनकर, कृषि अभियांत्रिकी विभाग के संचालक राजीव चौधरी मौजूद थे.

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