हौसलों की उड़ान : मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना से सफल उद्यमी बनीं जबलपुर की प्रीति

जबलपुर. हौसलों की उड़ान से आसमान छू लेने की उक्ति जबलपुर की प्रीति सिलोरिया पर पूरी तरह खरी उतरती है. उन्होंने सरकार की मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना के तहत ऋण हासिल कर अपनी फ्लोर मिल स्थापित की और आज वे एक सफल उद्यमी के रूप में खुद को स्थापित करने में कामयाब हुई हैं.

इस जद्दोजहद के दौरान उनके जीवन साथी जितेन्द्र ने प्रीति का पूरा साथ दिया और मुश्किल घड़ियों में भी कामयाबी की बुलंदियों को छू लेने के उनके जज्बे को बरकरार रखने में मदद की.

जबलपुर से फूड टेक्नोलॉजी में डिप्लोमा करने वाली प्रीति विवाह के बाद वर्ष 2009 में दिल्ली में कोकाकोला कम्पनी में क्वालिटी कैमिस्ट के रूप में काम करने लगीं. उनके पति जितेन्द्र भी दिल्ली में ही एक फर्म में नौकरी करते थे. प्रीति के मन में अपना स्वयं का व्यवसाय स्थापित करने की इच्छा काफी समय से थी पर इसके लिए जरूरी धनराशि का अभाव उनके उत्साह को कुन्द कर देता था.

इंटरनेट पर सर्च के दौरान प्रीति को मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना की जानकारी मिली और यह मालूम हुआ कि योजना के तहत उन्हें व्यवसाय की स्थापना के लिए ऋण हासिल हो सकता है. यहीं से उनके सपनों ने आकार लेना शुरू किया. जिला उद्योग केन्द्र जबलपुर द्वारा योजनान्तर्गत मई 2016 में प्रीति को उद्यम स्थापना के लिए 23 लाख रूपए का ऋण मंजूर किया गया और अगस्त में उन्हें बैंक से यह ऋण प्रदान किया गया.

प्रीति बताती हैं कि इस नई शुरूआत के समय वे और उनके पति दोनों काफी तनाव में थे और अपने इस महात्वाकांक्षी प्रोजेक्ट की सफलता को लेकर शंकाओं से ग्रस्त भी. आखिरकार प्रीति ने अपना ड्रीम प्रोजेक्ट 9 नवम्बर को शुरू किया. आरंभिक कठिनाईयों ने उनकी अदम्य इच्छा शक्ति और जीवट की कठिन परीक्षा ली. इसके बावजूद नवउद्यमी प्रीति ने असाधारण जिजीविषा का परिचय देते हुए अपना धैर्य बनाए रखा और पूरे उत्साह से अपने उद्यम की स्थापना की कोशिशों में जुटी रहीं.

उनके धैर्य, साहस और जिजीविषा के चलते प्रीतिभोज आटा अस्तित्व में आया. हासिल ऋण से खरीदी गर्इं अत्याधुनिक मशीनों से गेहूं की पिसाई कर वे प्रतिदिन पांच टन आटा तैयार करती हैं. उनके प्लाण्ट में तैयार होने वाले आटे प्रीतिभोज की बेहतरीन गुणवत्ता और बहुराष्ट्रीय कम्पनियों जैसी आकर्षक पैकेजिंग ने जल्द ही बाजार में जगह बनानी शुरू कर दी.

आज जब उनका प्रोजेक्ट शुरू हुए केवल 9 माह ही हुए हैं जबलपुर और आसपास के बाजारों में प्रीति के प्रीतिभोज ने तेजी से लोकप्रियता की पायदानें चढ़ना शुरू कर दिया है. उनके उत्पाद को जबलपुर के गणतंत्र दिवस समारोह में उद्योग केन्द्र की झांकी में जगह मिली.

प्रीति बताती हैं कि इससे उनके द्वारा तैयार किए जा रहे आटे को खासी पहचान मिली है. आज उनके प्लाण्ट में 10 कर्मचारी काम करते हैं. इस उत्पाद की वेबसाइट भी है और प्रीतिभोज नाम से उन्होंने फेसबुक पेज भी तैयार किया है जिसमें उत्पाद के बारे में समस्त ब्यौरा उपलब्ध है.

प्रीति के उद्यम में उनके पति जितेन्द्र भी उनका पूरा साथ देते हैं और प्रीतिभोज आटे की बाजार में लोकप्रियता बढ़ाने में उनका अहम् योगदान रहा है. तथापि प्लाण्ट से सम्बन्धित सभी इंतजामों की देखरेख और कर्मचारियों से काम लेने की जिम्मेदारी पूरी तरह प्रीति ही संभालती हैं.

वे आज अपने उद्यम की कामयाबी से काफी खुश हैं और इसका श्रेय मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना को देते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के प्रति आभार जताती हैं. वे कहती हैं कि मुख्यमंत्री की इस योजना के सहारे ही हमने एक सर्वथा अपरिचित क्षेत्र में कदम रखने का हौसला किया और आखिरकार कामयाबी भी हासिल की. नवउद्यमी प्रीति चाहती हैं कि राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ उठाने के लिए युवा आगे आएं और उनकी तरह सफलता के नए आयाम स्थापित करें.

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