काले धन के ख़िलाफ़ सरकार को मिली बड़ी सफलता

नई दिल्ली. काले धन के ख़िलाफ़ लड़ाई में सरकार को बड़ी सफलता मिली है. विमुद्रीकरण के बाद 13 बैंकों ने 5,800 संदिग्ध कंपनियों के लेनदेन के बारे में जानकारी मुहैया कराई है.

बैंकों द्वारा दी गई जानकारी में बताया गया है कि इन कंपनियों के 13,140 बैंक खातों में 4,574 करोड़ रुपये जमा कराए गए. इसके बाद 4,552 करोड़ रुपये निकाले गए. सरकार मामले की जांच करा रही है.

खुलासे में पता लगा है कि कई कंपनियों के 100-100 खाते थे. कुल 2,09,032 कंपनियों पर संदिग्ध गतिविधि की जानकारी के बाद रोक लगा दी गई है. इनमें से एक कंपनी के लगभग 2134 खाते थे. नोटबंदी के बाद इन फर्जी कंपनियों ने करीब 4573.87 करोड़ रुपए का लेन-देन किया था.

इसके अलावा प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मोहम्मद अयूब मीर को ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी किया है. मीर पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का सदस्य है. फेमा (फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट ऐक्ट) के तहत दिल्ली के दो हवाला कारोबारियों बेच राज बेंगानी और हरबंस सिंह को भी नोटिस भेजा गया है.

नोटबंदी के दौरान काले धन को सफेद करने में संलिप्त बैंक अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा रही है. ईडी ने एक्सिस बैंक के कर्मचारी नितिन गुप्ता समेत अन्य बैंक अधिकारियों की 8.47 करोड़ कीमत की संपत्ति जब्त कर ली है.

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने मोहम्मद अली मीर को नई दिल्ली से गिरफ्तार किया था. पुलिस ने मीर को हरबंस सिंह से हवाला के 7 लाख रुपए लेते हुए पकड़ा था. इस सूचना के आधार पर ईडी ने फेमा के तहत जांच शुरू कर दी थी. जांच के दौरान मीर ने लश्कर-ए-तैयबा के साथ जुड़े होने की बात कबूली. वह आतंकी संगठनों के लिए हवाला के जरिए धनराशि इकठ्ठा कर रहा था. हरबंस सिंह ने भी पूछताछ में बताया कि वह बेच राज बेंगानी के निर्देश पर हवाला भुगतान करता था.

बेच राज बेंगानी हवाला कारोबार में लंबे समय से है. फेरा 1973 के तहत बेच राज के खिलाफ 50 लाख का जुर्माना भी लगाया जा चुका है. अयूब मीर और हरबंस सिंह को दिल्ली के एडीशनल सेशन जज ने पोटा के सेक्शन 3(5) और 22(3) के तहत दोषी करार दिया था.

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY