इनके साथ क्या किया जाए, आपको करना है ये फैसला

लोकसभा चुनाव आने अब महज़ 17 महीने बचे हैं. यानी साढ़े तीन साल में मोदी सरकार ने जो शानदार कार्य किया है उसका लेखा जोखा लेकर वो 2019 में जनता के सामने जायेगी. बीते साढ़े तीन साल भ्रष्टाचार के एक भी आरोप लगे बिना सरकार चलाना कोई बच्चों का खेल नहीं है.

इन बीते तीन सालों में विपक्ष के पास मुद्दे के नाम पर केवल मोदी का सूट-बूट… विदेश यात्राएं… असहिष्णुता… अभिव्यक्ति की आज़ादी… मुसलमानों का उत्पीड़न… बीफ… लव जिहाद… घर वापसी जैसे मुद्दे थे.

जबकि मोदी ने बीते तीन सालों में 60 से ज्यादा देशों में घूम-घूम कर भारत के साथ उनके नए और बहुआयामी संबंधों की शुरुआत की. जापान से बुलेट ट्रेन का सौदा किया तो वहीं चीन जैसे देश भी भारत में भारी निवेश को तैयार हुए. इज़राइल जैसे देश ने अत्याधुनिक हथियारों की technology देने की बात की तो फ़्रांस से हेलिकोप्टर की डील हुई. कनाडा से यूरेनियम मिलने की बात तय हुई.

वहीं घरेलू मोर्चो पर भारत सरकार ने उज्जवला योजना में 5 करोड़ गरीब महिलाओं को मुफ्त एलपीजी कनेक्शन बांटे. आवास योजना में सस्ते घर बनाने के लिए 250000 तक अनुदान राशि स्वीकृत की. मुद्रा योजना ने लाखों बेरोजगार युवाओं को अपना रोज़गार शुरू करने का अवसर दिया. भारत के हजारों गाँवों में बिजली पहुंचाने का कार्य इन्ही तीन वर्षों में किया गया.

यानी सुरक्षा का मामला हो या विदेश नीति हो या फिर नक्सल अभियान हो या फिर कड़ी आर्थिक नीतियाँ… मोदी सरकार ने हर मोर्चे पर शानदार काम किया है. बड़े-बड़े साहसिक फैसले लिए हैं. ऐसे फैसले एक झटके में लिए हैं जिसे पूर्ववर्ती सरकारें 60 सालों में नहीं निपटा पायी. आप बंगलादेश के साथ भारत के सीमा विवाद को देखिये जिसे मोदी जी ने सत्ता सम्हालते ही सुलझा दिया.

पूरा सेक्युलर विपक्ष… सेक्युलर मीडिया… वामपंथी… मुसलमान… वेटिकन के पैसे पर पलने वाले चर्च… बंगलादेशी घुसपैठियों का पक्ष लेने वाले मीडिया के दलाल… इन सबके होश उड़े हुए हैं कि अब 2019 में जनता के सामने कौन सा मुद्दा लेकर जाएँ???

नोट बंदी को मोदी सरकार की सबसे बड़ी विफलता बताने वाला विपक्ष तीन महीने तक विधवा विलाप करता रहा कि सरकार नोट बंदी का फैसला वापस ले… लेकिन सरकार टस से मस नहीं हुई… उलटे अपने वोट बैंक समझे जाने वाले यानी सोने का व्यापार करने वालों की दुकानों पर ही इनकम टैक्स की रेड करवा दी… वो भी यूपी चुनावों से ठीक पहले…

सभी को यही लगा कि यूपी में एक वोट भी नहीं मिलेगा इस भगवा पार्टी को… लेकिन परिणाम आया तो सभी दल चारों खाने चित! कांग्रेस को महज़ 7 सीटें मिली थी और असहिष्णुता का रोना रोने वाले वामपंथियों को 400 कुछ वोट मिले थे…

अब फिर से नयी नौटंकी शुरू है… देश की जीडीपी गिर गयी… मोदी ने सब बर्बाद कर दिया… ये बात वो लोग कह रहे हैं जिनके शासन में देश का रिजर्व रखा सोना विश्व बैंक में गिरवी रख दिया गया था.

कांग्रेस के ही एक विद्वान प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से जब गिरती अर्थव्यवस्था के बारे में पूछा गया तो उनका कहना था कि मेरे पास कोई पैसे का पेड़ नहीं है… इनके युवराज से जब देश की गरीबी के बारे में पूछा गया तो उनका कहना था कि गरीबी-वरीबी कुछ नहीं होती…ये सिर्फ एक मानसिक अवस्था है.

ऐसे बयान देने वाले लोग आपसे 2019 में आपके दरवाजे पर वोट मांगने आयेंगे… इनके साथ क्या करना है ये फैसला आपको करना है…

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