आंग सान सू ची के सामने देश है : लोग अपने काम ‘नोबेल’ या ‘फ़्रीडम ऑफ ऑक्सफ़ोर्ड’ के लिए नहीं करते

सिटी ऑफ ऑक्सफ़ोर्ड ने आंग सान सू ची को 1997 में दिया गया ‘फ़्रीडम ऑफ ऑक्सफ़ोर्ड’ सम्मान वापस ले लिया है क्योंकि कथित तौर पर रोहिंग्या मुद्दे पर उन्होंने समुचित क़दम नहीं उठाए.

सिटी काउंसिल को तो फिर अपने औपनिवेशिक इतिहास को देखते हुए पूरे ब्रिटेन को सारे ग़ुलाम देशों पर किए गए अत्याचार के प्रायश्चित हेतु सामूहिक आत्महत्या करने का प्रस्ताव पारित करना चाहिए!

अपने इतिहास की किताबों से अपने कुकर्मों को हटाने वाले शहरों और देशों के लोग मानवाधिकार पर ज्ञान बाँटते हैं तो बहुत क्यूट लगते हैं.

सू ची नोबेल भी लौटा देगी, क्योंकि लोग अपने काम नोबेल के लिए नहीं करते. उनके सामने एक देश है, उसकी जनता है जिसके प्रति वो ज़िम्मेदार है. उसके क़दम क्या होंगे ये सोचने और करने का हक़ सिर्फ उस देश की सत्ता को है. सिटी काउंसिल अपने फार्सिकल अवार्ड अपने पास रखे.

‘ऑक्सफोर्ड सिटी काउंसिल’ ने सू ची को लोकतंत्र के लिए लंबा संघर्ष करने को लेकर 1997 में ‘फ्रीडम ऑफ ऑक्सफोर्ड’ से सम्मानित किया था. काउंसिल ने सोमवार (दो अक्टूबर) को सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया कि आंग सान सू ची के पास अब यह सम्मान रहना उचित नहीं है.

काउंसिल के नेता बॉब प्राइस ने आंग सान सू ची से ‘फ्रीडम ऑफ ऑक्सफोर्ड’ वापस लेने के कदम का स्वागत किया है. उन्होंने पुष्टि की कि यह स्थानीय प्रशासन के लिए ‘अप्रत्याशित कदम’ है. सिटी काउंसिल अब 27 नवंबर को एक विशेष बैठक करेगी जिसमें यह पुष्टि होगी कि उनसे यह पुरस्कार वापस ले लिया जाए.

नोबेल शांति पुरस्कार विजेता आंग सान सू ची का सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड से गहरा नाता रहा है. वह अपने परिवार के साथ पार्क टाउन में रह चुकी हैं. वह 1964-67 के दौरान सेंट हग कॉलेज जा चुकी हैं. हग कॉलेज अपने प्रवेश द्वार पर लगी सू ची की तस्वीर पहले ही हटा चुका है.

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