बस तैयारी कर लें तो इन्हीं लोगों से निर्माण कराएंगे अयोध्या, काशी, मथुरा के मंदिर

वाकई माहौल बदल रहा है. एक युग के बाद सद्बुद्धि आ रही है. अगला समय हिन्दू राष्ट्र का ही है. कॉन्ग्रेसी तो बदल ही रहे थे, अब वामी भी हिंदुत्व की पॉलिटिक्स की तरफ बढ़ रहे है. वह वामी/कॉन्ग्रेसी जो हिंदू देवताओं/जीवन पद्धतियों और पूजा प्रणालियों का मखौल उड़ाते थे, अब हिन्दुओं को तुष्ट करने के लिए पूजा-पाठ का पाखंड करते घूम रहे है.

गॉड इज़ फ्रॉड… रिलीजन इज़ ओपियम कहने वाले लेफ्टिस्ट इस वर्ष बंगाल दुर्गा-पूजा पंडालो में जबरदस्त सक्रिय दिखे. यही नहीं, ऐसा करने का निर्देश उनके केन्द्रीय नेतृत्व ने दिया है. आमतौर पर पूजा पाठ और धार्मिक आयोजनों से दूर रहने वाली वामपंथी पार्टियों का यह कृत्य मोदी मैजिक का परिणाम माना जा रहा है. हालांकि इसमें श्रद्धा की जगह धूर्तता है, फिर भी मैं इसे सकारात्मक लेता हूँ.

कम से कम उन्हें यह मानने को मजबूर होना पड़ा कि वे अपनी मक्कारी नहीं थोप पाएंगे. उनके लिए दुर्गा पूजा ही आम लोगों से जुड़ने का सबसे बड़ा जरिया साबित होने जा रही है. उनके सारे हथकंडे फेल होने के बाद वे अब केवल दिखाने/जोड़ने के लिए नवरात्रि मना रहे है.

माकपा राज्य सदस्य मंडल सचिव मंडल के एक वरिष्ठ सदस्य ने कहा, पार्टी धार्मिक कर्मकांड के ऊपर भरोसा भले ही ना करें पर सभी विधायक और कार्यकर्ताओं को आयोजनों में हिस्सा लेने में छूट दे रही है.

पार्टी की दलील है तृणमूल कांग्रेस और भाजपा की ओर से तथाकथित सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के प्रयासों को देखते पार्टी ने अपने नजरिए में बदलाव किया है. इसी के चलते वह बंगाल में सभी पूजा पंडालों में अपने कार्यकर्ताओं के साथ एक्टिव रही. इसे आम लोगों से जुड़ने का एक बेहतरीन मंच मानकर के प्रयास करने किया.

दूसरी तरफ आपने क्रिप्टो-इस्लामिक होते हुए भी राहुल गांधी को भी अभी-अभी किसी मंदिर में पूजा करते देखा ही होगा. अखिलेश यादव जो कि कट्टर हिंदुत्व-विरोधी के रुप में जाने जाते हैं पिछले दिनों मन्दिर में पूजा करते दिखे थे. तमाम नामी-गिरामी और बड़े नेता इधर टेलीविजन और अन्य कार्यक्रमों में पूजा-पाठ करते हुए लगातार दिख रहे हैं.

सत्तर साल बाद यह शुभ लक्षण हम सब के प्रयासों से ही प्रकटे हैं. जिसमें संघकार्य, भाजपा, मोदी और हमारी एकजुटता का करिश्मा है. कुल मिलाकर, अगर हम सब एक रहे और हिंदू वोट-बैंक तैयार कर लें तो अयोध्या राम मंदिर, काशी-विश्वनाथ मंदिर, मथुरा कृष्ण मंदिर इन्हीं लोगों से निर्माण कराएंगे. हिंदू विरोधी सेकुलरिज्म पॉलिटिक्स का अंत होने ही वाला है, बस वोट बैंक बढ़ाइए.

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