कौलान्तक पीठ – 4 : हिमालय के प्रखरतम महायोगी की महासमाधि

Mahayogi Satyendranath

कौलान्तक पीठाधीश्वर महायोगी सत्येन्द्र नाथ जी महाराज योग क्षेत्र के चमकते सूर्य हैं. उन सा योगी युगों युगों में ही धरती पर जन्म लेता होगा. एक अद्भुत सा जीवन है महायोगी सत्येन्द्र नाथ जी महाराज का, जिनको इसलिए समझना मुश्किल है क्योंकि उनका महामस्तिष्क मानवीय सीमाओं से परे हैं.

एक ओर महायोगी कहते फिरते हैं कि वो बहुत ही साधारण से हिमालय के जोगी हैं. वहीँ दूसरी ओर उनका महाविराट स्वरुप देख कर साधक की आँखें फटी की फटी रह जाती है. पर यदि साधक हो तो! क्योंकि भले ही कोई कुछ कहे लेकिन सच ये है कि कोई यदि इस दुनिया का सबसे बड़ा विचारक हो, चिन्तक हो, दुनिया उसे मानती हो, तो वो भी सत्य स्वरुप को नहीं समझ सकता.

मेरा ये दावा नहीं है कि महायोगी अवतार हैं. लेकिन साहित्यक भाषा में ऐसा मानव अवतारी ही माना और कहा जाता है. योग के न जाने कितने रूपों को महायोगी जी जानते है. पर बात वही कि बताएँगे किसको? सामान तो है, दुकानदार भी, पर बिडम्बना ये है कि ग्राहक ही नहीं हैं.

शायद यही कारण है कि महायोगी हिमालय के सबसे बड़े योगी होने के बाद भी बिलकुल गौण हैं. जिस हिमालय को महायोगी पर नाज है. जो हिमालय महायोगी को अपना पुत्र कहता है. ..शायद उसी हिमालय ने महायोगी को इतना जटिल बना दिया कि उनको कोई समझ ही नहीं पा रहा. लेकिन मुझे विश्वास है कि एक दिन प्रबुद्ध साधकों का एक बड़ा समूह महायोगी जी के रहस्यों से जुड़ कर. महासमाधि के महारहस्य को जान जायेगा.

भारत में ऐसे बहुत ही कम साधक होंगे जिनको बाल्यकाल से समाधि का अनुभव हुआ हो. ..लेकिन सिद्ध परम्परा के चंद्रमा, कौलान्तक पीठ को वाममार्गी घृणित तंत्र मंत्र से मुक्ति दिलानेवाले महायोगी सत्येन्द्र नाथ जी सहज समाधि को उपलब्ध मायाधारी योगी हैं.

शायद उनको प्राकृतिक तौर पर ही समाधि लगती है क्योंकि वो समाधि के लिए कोई महाभ्यास नहीं करते. मैंने उनके साथ जितना भी समय बिताया, तब यही जान पाया हूँ कि एक दुबला पतला सुन्दर सा बालक महायोगी और पीठाधीश्वर वो भी सबसे रहस्यमयी पीठ का? उस पीठ के हजारों नहीं लाखों दुश्मन है. ..लेकिन जब वास्तविकता से पाला पड़ा तो मुझे सूर्य कहाँ से उदय होता है ये पता चला!

महायोगी जी की समाधि का तरीका देख कर तो मैं सोचता हूँ कि मुझ जैसे आदमी के लिए ये संभव ही नहीं हैं. लेकिन महायोगी जी जब समझाते हैं तो लगता है कि मैं भी एक न एक दिन पहुँच ही जाऊँगा. . ..कभी कभी समाज में महायोगी जी को देख कर बहुत हंसी आती है. कोई भी साधारण सा पुजारी, पंडा, पुरोहित, बड़े बड़े तर्क महायोगी को दे कर ये जताने का प्रयास करते हैं कि वो ही सबकुछ जानते हैं महायोगी जी तो बच्चे हैं. .

योगीजी सचमुच बच्चे ही हैं, उनको जबाब ही नहीं देते. .बस हाथ जोड़े हाँ में हाँ मिला देते हैं. ..ऐसे पुरुष में समाधि के ज्वलंत बीज देख कर भ्रमित हो जाना सहज ही है. ..ये तो छोडिये ज्योतिष और समय साधना..!. काल पुरुष की महापूजा के महारहस्यों को जानने वाले महायोगी जी का दुर्भाग्यवश कभी किसी ज्योतिषी से मिलना हो जाये तो समझ लीजिये महायोगी जी के राहु-केतु खराब हो गए. .

वो आते ही बताना शुरू कर देंगे मंगल से ये होता है. शनि ये कर देगा. . ये वाला रंग ऐसे हो तो ये प्रभाव होगा. ..मेरा ये सब देख कर मस्तिष्क चकराने लगता है कि ये माजरा क्या है. ..सनातन विद्याओं के रक्षक को ये क्या समझा रहे हैं. ..उस पर अपनी की हुई मूर्खता पर इतने प्रसन्न होते हैं कि मानो कोई बहुत बड़ी जंग जीत ली हो. ..पहले अपने अहंकार से ही नहीं जीत सकते. .तो धर्म को क्या जानेगे. .यहाँ तक की कोई-कोई तो पंडा पुरोहित या कथित योगी तो ये समझाना शुरू कर देते हैं कि यदि आप इतने बड़े योगी है तो समाज में क्या कर रहे हैं. .?. ..जंगलों या हिमालय में ही रहना चाहिए. आपको इन चीजों से. . . .समाज से क्या लेना देना..?..

और अपनी महिमा में कहेंगे कि हमने पीएचडी की है. ..विदेशों में जा कर लेक्चर देते है. .वैदिक ज्योतिष योग आयुर्वेद के हम महापंडित हैं. . अब आप ही बताइये ऐसे में महायोगी जी क्या कर सकते हैं?

– रविन्द्र शर्मा

कौलान्तक पीठ -1 : रहस्यमय श्वेत वर्ण धारी सत्यस्वरूप शिवस्थली हिमालय

कौलान्तक पीठ -2 : हठयोगियों का गुप्त संसार, साधकों का स्वप्न स्थल

कौलान्तक पीठ-3 : महारहस्य पीठ और महायोगी सत्येन्द्र नाथ

(साधकों तक अधिक से अधिक जानकारी पहुंचाने के उद्देश्य से ये लेख कौलान्तक पीठ की वेबसाइट से साभार लिया गया है)

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