पक्ष भी भाजपा, विपक्ष भी भाजपा!

ये जो अरुण शौरी और यशवंत सिन्हा जैसे पुराने वरिष्ठ भाजपाई नेता रह-रह के सरकार विरोधी बयान देते रहते हैं इसमे मुझे एक डिज़ाइन नज़र आता है. हो सकता है कि ये सब एक बहुत सोची समझी well planned रणनीति के तहत हो रहा हो.

सैन्य विज्ञान में शत्रु को भ्रमित करने के लिए, उसका ध्यान भटकाने के लिए, गतिविधि कहीं और दिखाई जाती है और हमला कहीं और कर दिया जाता है. राजनीति और कूटनीति में भी सब कुछ सीधा, सरल सपाट नही होता. जो कुछ सतह के ऊपर दिखाई देता है, सतह के नीचे सब कुछ वैसा ही नही होता.

2014 के बाद से अमित शाह और मोदी की रणनीति और कार्यशैली पर नज़र दौड़ाइये. 2014 से पहले नारा तो दिया गया था कांग्रेस मुक्त भारत का, पर आज के राजनैतिक परिदृश्य पर नज़र दौड़ाइये. कांग्रेस ही नही समूचा विपक्ष ही साफ कर दिया है. सिर्फ गैर भाजपा विपक्ष का सफाया नही किया है, बल्कि भाजपा के अंदर भी मोदी के विपक्ष का सफाया हो गया है.

पर प्रकृति का नियम है.

There can never be a Vacuum. बहुत देर तक निर्वात की स्थिति कभी नही रहती. कोई न कोई आ ही जाता है भरने. जहां पहले विपक्ष था आज वहां Vacuum है. इस से पहले कि कोई और भरे, क्यों न अपने ही लोगों से भर दिया जाए?

आज क्या स्थिति है? पक्ष भी भाजपा, विपक्ष भी भाजपा…

जो काम विपक्ष को करना चाहिए वो अरुण शौरी और यशवंत सिन्हा और सुब्रह्मण्यम स्वामी कर रहे हैं. जो काम राहुल सोनिया और चिदंबरम को करना चाहिए, जो काम मुल्लायम और मायावती को करना चाहिए वो यशवंत सिन्हा कर रहे हैं.

Sonia, Rahul and Chidambram are gasping… उनका टेंटुआ ऐसा दबा रखा है मोदी ने कि उनको सांस नही आ रही… यही हाल मुलायम मायावती का है. शरद पवार खुद मोदी की गोद में बैठने को तैयार हैं. विपक्ष में है कौन? उद्धव ठाकरे? केजरीवाल? इनकी औकात एक शहर के मेयर जितनी भी नही.

लालू यादव? तेजस्वी और राबड़ी??? विपक्ष में है कौन? सीताराम येचुरी और वो अतुल अंजान???

विपक्ष में है कौन? मोमता दी??? उनको इन दोनों ने बंगाल में ऐसा घेर लिया है कि सांस लेने की फुरसत नहीं…

आज की स्थिति ये है कि पक्ष भी भाजपा और विपक्ष भी भाजपा.

मुझे कतई आश्चर्य नही होगा यदि अगले डेढ़ साल में अरुण शौरी और यशवंत सिन्हा की टीम में ऐसे ही कुछ और वरिष्ठ सहयोगी जुड़ जाएं, कुछ ऐसे ही vague, ऊलजुलूल, तथ्यहीन आरोप लगाते रहे जो समय के साथ अपने आप ही झूठे अनर्गल सिद्ध होते रहें…

आप ध्यान दीजिये कि मीडिया राहुल गांधी के बयान को इतनी तवज़्ज़ो नही देता जितनी उसने अरुण शौरी और यशवंत सिन्हा को दी है.

विपक्ष पर भी भाजपा कब्जा कर रही है, धीरे धीरे… नये विपक्षी नेता सब नौसिखिये छोकरे हैं, राहुल गान्ही, टिप्पू जादो, जोतिरादित्त सिंधिया, तेजस्वी, तेजप्रताप और मीसा जादो, और गौरव गोगोई सरीखे.

पक्ष भी भाजपा, विपक्ष भी भाजपा!

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