खूब बनाओ सड़कें, पुल और फुट ओवर ब्रिज, पर उन पर चलना भी सिखाओ

सीधी बात… no बकवास! क्यों हुआ मुम्बई के एलफिंस्टन रोड स्टेशन पर हादसा? क्यों मची भगदड़ रेलवे स्टेशन पे? क्यों कुचले गए लोग?

एलफिंस्टन रोड नहीं, मुम्बई के प्रत्येक उपनगरीय रेलवे स्टेशन पर एक नहीं 10 पुल बना दो, मरने वाले इसी तरह बूटों तले कुचल के मरेंगे. Peak Hour में हर रेलवे स्टेशन के हर प्लेटफॉर्म पर हरेक मिनट में एक लोकल ट्रेन आती है. हर ट्रेन से सैकड़ों नहीं, हज़ारों यात्री चढ़ते-उतरते हैं.

फुट ओवर ब्रिज जो बनाये गए हैं, या आगे जो भी बनाये जाएंगे, वो लोगों के आने जाने के लिए बनेंगे. Peak Hours में इतनी भीड़ में लोग चलते रहने चाहिए. Flow बने रहना चाहिए. अगर ये flow मिनट भर को भी रुका तो तुरंत जाम लग जायेगा. पूरा परिसर यात्रियों से ठसाठस भर जाएगा.

जिस दिन हादसा हुआ, उस दिन आखिर हुआ क्या? मूसलाधार बारिश होने लगी. लोगों के आने-जाने के लिए बना पुल Rain Shelter में तब्दील हो गया. लोगों से ठसाठस भर गया. लोग बारिश रुकने का इंतज़ार कर रहे थे.

पैदल चलने वालों के जाम की स्थिति थी. पर रेलों का आना जाना बदस्तूर जारी था. नए यात्रियों का आना भी बदस्तूर जारी था. पुल और उसपर चढ़ने उतरने वाली सीढियां जाम थीं.

तभी नए आने वाले यात्री भी उसी सीढ़ी पे चढ़ने, उसी भीड़ में शामिल होने को उतावले धक्का मुक्की करने लगे. इसी धक्का मुक्की आवाजाही में किसी एक का पैर फिसला होगा और वो उस भीड़ में गिर गया होगा. उसके ठीक पीछे खड़ा व्यक्ति भी उसी धक्कामुक्की के कारण उसके ऊपर गिरा होगा. और उसके बाद लोग गिरते चले गए होंगे.

हर भगदड़ में यही होता है. याद कीजिये लखनऊ रेलवे स्टेशन पर हुई मायावती की रैली की भीड़ में हुई भगदड़. या फिर कुम्भ के मेले के दौरान इलाहाबाद स्टेशन में हुई भगदड़, जिसमें 42 लोगों की कुचल कर मौत हो गई थी और कितने ही घायल हुए थे.

या फिर वो तमाम हादसे जो हमारे धार्मिक समागमों, मेलों, भंडारों में भीड़ भाड़ के कारण होते हैं. फिर वो कृपालु महाराज का भंडारा हो या फिर हिमांचल के नयना देवी मंदिर की सीढ़ियों पे हुआ हादसा जिसमें 146 की मौत हुई थी और 150 से ज़्यादा घायल थे.

रेलवे नए पुल बना लेगी, पर नयना देवी का मंदिर कितनी नई सीढियां बना देगा? वो कैसे बढ़ा लेगा अपनी सीढ़ियों की चौड़ाई? या इलाहाबाद प्रयाग कैसे चौड़ी कर लेगा अपनी सड़कें जिस से कि एक करोड़ लोग चल पायें कुम्भ में?

हर जगह सीढियां, सड़कें और पुल नहीं बन पाएंगे या चौड़े होंगे… 125 करोड़ लोगों के इस देश मे जगह और संसाधन और इंफ्रास्ट्रक्चर हमेशा सीमित ही रहेगा. लोगों को चलना, उठना बैठना, व्यवहार करना ही सीखना होगा.

रेलवे को इन्फ्रास्ट्रक्चर सुधारने की ज़रूरत है इस से तो कोई इनकार नहीं कर सकता. ऐसे पुल सिर्फ मुम्बई नहीं बल्कि देश के प्रत्येक शहर के रेलवे स्टेशन पे बनाने की ज़रूरत है. ये सरकार कुछ सालों में बना भी देगी.

पर इसके बावजूद किसी दिन किसी रैली या किसी रेलवे एग्ज़ाम के परीक्षार्थियों या फौज या पुलिस भर्ती के अभ्यर्थियों की कोई भीड़ फिर ऐसे ही किसी पुल पे एकत्र होगी, और ऐसे ही भगदड़ मचेगी.

Infrastructure बनाना बहुत ज़रूरी है, बनाओ खूब सड़कें, पुल और फुट ओवर ब्रिज बनाओ, पर उनपर चलना भी सिखाओ. Discovery channel पे मसाइमारा के Wilderbeasts और आदमी में कुछ तो फर्क होना चाहिए.

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