क्या करेंगे शस्त्र रख कर? खतरे के समय तो जमा करा लेती है पुलिस

फाइल फोटो : शस्त्र पूजा करते प्रधानमंत्री

विजय दशमी पर शस्त्रपूजा के बारे में बहुतों ने लिखा. मैं टाल गया क्योंकि एक उदासी सी है. वैसे तीन सालों से इस विषय पर अनवरत लिखता आया हूँ. लेकिन आज कुछ अलग लिखूंगा.

पहले ही यह स्पष्ट कर देना आवश्यक है कि यहाँ ज़्यादातर सफ़ेदपोशों को संबोधित कर रहा हूँ जिनके लिए दंगा वास्तव तो है लेकिन क्या करना है यह स्पष्ट नहीं है. बाकी लोग जानते हैं क्या करना, उन्हें इस लेख से कुछ अधिक हासिल नहीं होना है.

किस काम शस्त्र, जिसे उठा भी न सकें

बहुत लोग तलवार की प्रशंसा कर रहे हैं. मैं नहीं. और उसका कारण भी दे रहा हूँ. पहली बात तो यह है कि यह अभ्यास मांगता है. कई लोगों को इस कदर तलवार पकड़े देखा है कि… जाने दीजिये. तो बात यह है कि तलवार अभ्यास का शस्त्र है. कम से कम डेढ़ से लेकर दो-ढाई किलो तक वजन होता है. कलाई के बल घुमाते रहने को ताकत चाहिए हाथों में भी और कंधों में भी. एक जगह खड़े रहकर लड़ने का शस्त्र नहीं है ये तो चापल्य और फुटवर्क भी चाहिए. ये सभी दमख़म भी मांगते हैं.

बिना इसके आप फेल होंगे. क्या फायदा तलवार रखकर? कोढ़ में खाज, सरकार ने पिछले साल से इसे प्रतिबंधित और लायसेंस अनिवार्य कर दिया है. पूर्वजों की हैं तो लायसेंस चाहिए. नहीं निकला तो आप गुनहगार होंगे अगर पकड़े जाएँगे तो.

और अगर दंगा होने की गुंजाइश हो तो पुलिस आप से जमा करवाएगी. हाँ, मैंने तलवार के फौलाद के दर्जे की या उसके बैलेन्स की बात ही नहीं की है. अब पुराने समय के कारीगर भी नहीं रहे.

कोई लोग खुकरी की बात करते हैं. वो और specialized शस्त्र है. कहाँ, कौन सिखाएगा आप को? और सही खुकरी कहाँ से पैदा कराएंगे? उसका बैलेन्स या alignment और फौलाद का दर्जा भी मायने रखता है. बड़ी है तो लायसेंस यहां भी चाहिए.

शस्त्र लेने से महंगा लायसेंस मिलना

आग्नेयास्त्रों की बात करना ही बेकार है. लायसेंस मिलना शस्त्र लेने से महंगा काम है. और अगर अफसर ईमानदार है तो कोई चांस नहीं. नियम आप के डर को नहीं जानते, और समूह के डर का कानून संज्ञान नहीं लेता. और तो और, गोलियां भी महंगी होती हैं.

अगर चलाने का अभ्यास न हो तो आप के हाथ में हथियार कोई काम का नहीं. झटका मारेगा तो संभालने का अभ्यास न होगा तो गोली कहीं और चली जाएगी, आप सकते में आ जाएँगे. और दंगे की आशंका हो तो पुलिस जमा कराएगी. और भी खतरे हैं जिनका सार्वजनिक उल्लेख ठीक नहीं.

अवैध आग्नेयास्त्र रखने का मैं पक्षधर नहीं. इसमें और एक बात है कि आप को प्रैक्टिस करने में दिक्कत होगी. आवाज होगी जो आप की चुगली करेगी. क्या करेंगे?

0.22 एयर राइफल तक जिसे खरीदने गत वर्ष तक लायसेंस आवश्यक नहीं था, विगत अगस्त में उसके लिए लायसेंस अनिवार्य बनाया गया. अब ज़रा सोचिए, वो कोई चमकोगीरी करने वाले लड़कों ने एयर राइफल की ट्रेनिंग देने वाले कैंपस चलाये थे, याद है? उससे टेररिस्टों से लड़ने की बात कर रहे थे. उसके बाद इन एयर राइफल्स पर भी पाबंदी लग गयी.

दु:ख की बात यह है कि मैं भिड़ंत का भी समर्थक नहीं हूँ. क्योंकि कई लोगों से खून नहीं देखा जाता, क्या लड़ेंगे भिड़ंत में? अंतर आवश्यक है.

अब क्या बचा है ? इस पर काफी खोज की और कई लोगों से विमर्श किया. बात यह है कि आगे क्या किया यह पूछा तो लोगों ने फोन उठाने बंद कर दिये. राम भली करें.

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