कैकयी के मुहर्रमी मातम के बाद भी, अब अर्थव्यवस्था लेकर निश्चिंतता

आर्थिक मामलों का जानकार मैं नहीं हूं. वित्तमंत्री अरुण जेटली का भी समर्थक या प्रशंसक कतई नहीं हूं. अतः देश की अर्थव्यवस्था, उसकी चाल ढाल, उसके चेहरे और चरित्र पर प्रख्यात अर्थशास्त्री एवं राजनीतिक चिंतक विचारक एस गुरुमूर्ति जी की टिप्पणियों, विश्लेषणों और भविष्यवाणियों पर आंख मूंद कर विश्वास करता हूं.

पिछले लगभग दो-ढाई दशकों से उनकी टिप्पणियों, विश्लेषणों को गम्भीरता से देखता पढ़ता रहा हूं और दावे के साथ कह सकता हूं कि देश की अर्थव्यवस्था से सम्बंधित उनके आंकलन, विश्लेषण, भविष्यवाणियां कभी गलत सिद्ध नहीं हुईं.

अतः आजकल कैकेयी की तरह कोपभवन में दिन काट रहे यशवंत सिन्हा को देश की अर्थव्यवस्था पर मुहर्रमी मातम मनाते देखा तो जानने का प्रयास किया कि एस गुरुमूर्ति का इस सन्दर्भ में क्या विचार है.

पता चला कि उन्होंने यशवंत सिन्हा के मातम को अपनी टिप्पणी लायक तक नहीं समझा और बहुत हल्के में केवल अपने एक ट्वीट में ही निपटाते हुए उनको विपक्ष के लिए लाभदायक, एक कुंठित व्यक्ति बताते हुए भाजपा को सलाह दी कि वो यशवंत सिन्हा को अनदेखा ही करे.

अपने दूसरे ट्वीट में अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्था जेपी मोर्गन के प्रमुख जेमी डिमॉन के हवाले से उन्होंने आश्वस्त किया कि देश की अर्थव्यवस्था तेज़ी से बढ़ रही है.

गुरुमूर्ति जी की इस टिप्पणी के बाद मैं तो शत प्रतिशत निश्चिन्त हूं कि देश की अर्थव्यवस्था बिल्कुल सही पटरी पर है.

ध्यान रहे कि एस गुरुमूर्ति यदि चाहते तो अटल सरकार में ही मंत्री पद पा चुके होते. लेकिन राजनीतिक लोभ लोलुपता स्वार्थ से परे रहनेवाले एस गुरुमूर्ति ऐसे दिखावों से बहुत दूर रहते हैं.

इसलिए निष्पक्ष, निर्भीक, बेलाग, बेबाक टिप्पणियों से कभी परहेज नहीं करते. प्रधानमंत्री मोदी भी गंभीर आर्थिक मामलों पर उनसे विचार विमर्श करते रहते हैं जिसका प्रचार गुरुमूर्ति नहीं करते.

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