बुलेट ट्रेन के बहाने : ऐसे कर्ज़ क्यों मिलते हैं?

पवन हंस नाम सुना होगा आप ने? कई साल पहले इस कंपनी को इंग्लैंड की Westland कंपनी के हेलिकॉप्टर लेने पड़े थे. क्योंकि तत्कालीन ब्रिटिश प्रधानमंत्री का दबाव था. और उन्होने क्यों दबाव डाला था? क्योंकि कंपनी के पास ऑर्डर नहीं थे, कंपनी डूब रही थी.

कर्ज़ तब भी मिला था और वो हेलीकाप्टर लेने के लिए ही था. लेकिन कुल मिलाकर वो सौदा कुछ अच्छा नहीं रहा, हेलिकॉप्टर अच्छे नहीं थे, अक्सर कुछ न कुछ काम निकल आता. Westland भी बची नहीं, आगे बिक गई. Agusta Westland हो गयी. ये नाम तो सुना ही होगा आप ने हाल ही में?

बोफोर्स के समय स्वीडन के प्रधानमंत्री ने भी दबाव डाला था. Olof Palme नाम था उनका. बाद में उनकी हत्या हुई. हाल में M 777 के लिए भी ओबामा ने काफी दिलचस्पी ली थी. ये सभी सौदों में बेचने वाली कंपनी या देश कर्ज़ देकर ही कराते हैं और उसमें किसकी जरूरत कितनी है यह देखकर सौदा होता है. घूस जहां ली जाती है तो वो भी एक जरूरत ही है जो सौदे के पैमाने बदल देती है.

अस्तु, जो कर्ज़ा मिलता है उसे समझना है तो आप कार या बाइक या कुछ भी लोन पर खरीदते हैं तो आप को फ़ाइनेंस कंपनी उसी चीज की ख़रीददारी के लिए कर्ज़ देती है, आप उसे कोई अन्य चीज की ख़रीददारी में प्रयोग कर ही नहीं सकते. कार लोन से आप घर की मरम्मत नहीं कर सकते, ना ही उस रकम से आप माँ का इलाज कर सकते हैं. बस वही बात ऐसे कर्ज़ों की होती है.

बुलेट ट्रेन की कहानी कौन सी अलग होगी? वैसे, इसे लाने वाले थे कॉंग्रेस वाले. लोन तब भी मिलता, लेकिन उनकी किन शर्तों को सहमति थी, यह देखना रोचक होता. अब की शर्तें पता हैं और फिलहाल काफी बखान हो रहा है कि सब से सस्ता कर्ज़ा है.

याने गुज्जुभाई ने भाव-ताव कस कर किया होगा और जापान की गरज को अच्छे से बार्गेनिंग का मुद्दा बनाया होगा यह तो समझ में आता है. और एक बात है कि जापानी इसमें से ही कमा जाएँगे. याने देर हो गयी तो वे ही नुकसान में. देर कर के कीमत बढ़ते जाने का देसी फॉर्मूला यहाँ लगाया नहीं गया, ऐसे लग रहा है.

लेकिन सब जानकर भी सभी पार्टियों के नेता हर रेल दुर्घटना के समय यही कर्ज़ की बात करेंगे ही. यही पैसे यहाँ काम में लाते तो… यह राग आलापा ही जाएगा. क्यों? क्योंकि हमें कुछ मालूम नहीं होता और मालूम कर लेने की कोई इच्छा भी नहीं होती. उससे, गालियां देना बहुत आसान है, है कि नहीं?

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