Mumbai Stampede : इंफ्रास्ट्रक्चर रातों रात नहीं बनेगा, शिक्षित होना ज़्यादा आसान

कुछ साल पहले जापान में भयंकर सुनामी आयी थी. उसके Videos दुनिया भर में viral हुए और देखे गए. मैंने अपनी ज़िंदगी मे इतना ख़ौफ़नाक मंज़र नहीं देखा. मनुष्य चाहे जितनी उन्नति कर ले, विज्ञान चाहे जो कर ले पर मनुष्य प्रकृति के सामने कितना लाचार है ये सुनामी के उन videos में दिखाई देता है.

इतनी बड़ी प्राकृतिक आपदा आने के बावजूद एक भी जापानी न मरा, न घायल हुआ. पूरे जापान में किसी किस्म की न कोई दहशत थी, न कोई भगदड़. पूरे जापान में कोई चीखा चिल्लाया नहीं. कोई बदहवास इधर उधर दौड़ा नही. किसी किस्म की कोई अफरातफरी नहीं हुई.

जानते हैं क्यों? क्योंकि हर जापानी को मालूम था कि किस परिस्थिति में क्या करना है. भूकंप या सुनामी आये तो क्या करना है. जान बचाने के लिए क्या करना है और क्या नहीं करना है. अपनी खुद की, फिर अपने परिवार की और फिर समाज के अन्य लोगों की क्या मदद करनी है, कैसे करनी है कितनी मदद करनी है, ये हर जापानी को सिखाया गया है. ये सीधे सीधे education का matter है. वहां पूरा समाज शिक्षित है कि कब किस परिस्थिति में कैसे behave करना है.

आज मुम्बई में एक रेलवे स्टेशन पे भारी भीड़ के कारण भगदड़ मचने से हादसा हुआ और 30 लोग कुचल के मारे गए. प्रथम दृष्टया हादसे के जो कारण समझ आये वो ये हैं कि भारी बारिश के कारण, भीगने से बचने के लिए लोग रेलवे पुल पे जमा होते रहे. जब बहुत अधिक भीड़ हो गयी तो उस भीड़ के दबाव में अफरातफरी मची और उसी अफरातफरी में 30 लोग कुचल के मारे गए.

अब आइये देखिए कि हमारा मीडिया, हमारे समाचार माध्यम इस घटना पे कैसे react कर रहे हैं? सब लोग इस घटना के लिए संकरे पुल को दोष दे रहे हैं. मान लीजिये कि जो पुल आज 20 फ़ीट चौड़ा है वो अगर 30 फ़ीट चौड़ा होता तो क्या उसपे भी मुम्बई के peak office hour में भारी मुसलाधार बारिश में इतनी ही भीड़ नहीं हो जाती?

मुम्बई में उतने आदमी तो सिर्फ 2 मिनट में आ जाते है रेलवे स्टेशन पे. मूल समस्या पुल का संकरा होना नहीं बल्कि लोगों का अशिक्षित untrained होना है. समाज मे basic बातें, उठना बैठना, चलना, queue बनाना, push न करना, patience रखना, जल्दबाजी न करना, अफवाहों पे ध्यान न देना ……. इन basic बातों की अज्ञानता है.

भीड़भाड़, संसाधनों की कमी, basic इंफ्रास्ट्रक्चर की भयंकर कमी, public ट्रांसपोर्ट और public यूटिलिटीज पे जनसंख्या का भयंकर दबाव, भारत में ये आम बात है. मुम्बई की भीड़ भाड़ में उस रेलवे स्टेशन पे वैसे एक नहीं 20 पुल भी बना देंगे तो कम पड़ जाएंगे.

बढ़ती जनसंख्या के अनुरूप इंफ्रास्ट्रक्चर बना लेना इतना आसान काम नहीं, पर भीड़ भाड़ में, विशेष परिस्थितियों में कैसे behave करना है ये संस्कार तो सिखाया जा ही सकता है. जापान ने सिखाया ही है अपने लोगों को. टोक्यो में मुम्बई से कम भीड़ नहीं होती. फिर क्या टोक्यो वाले उसी तरह behave करते हैं जैसे मुम्बई वालों ने किया आज?

समाज को शिक्षित करना किसका काम है? शिक्षा संस्थानों और समाचार माध्यमों का. पर आज आप समाचार माध्यमों की भूमिका उठा के देख लीजिए. कोई उन लोगों को दोष नहीं देगा जो वहां भीगने से बचने के लिए वहां जमा हुए और फिर अफवाह के कारण बदहवास हो इधर उधर दौड़ने भागने लगे.

इंफ्रास्ट्रक्चर रातों रात नहीं बनेगा. शिक्षित होना ज़्यादा आसान है.

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