GST : देश को पहली बार मिला, व्यवस्था परिवर्तन करने वाला नेतृत्व

गाज़ीपुर के मेरे एक मित्र हैं. सीनियर पत्रकार हैं. मेरे लिए बहुत सम्मानित हैं. उनके साथ रोज़ का उठना बैठना है. कल उन्होंने लिखा कि GST के कारण मऊ का हैण्डलूम साड़ी उद्योग एकदम बर्बाद हो गया. जहाँ पहले रोज़ाना 10-12 ट्रक साड़ी मऊ से बाहर जाती थी, आजकल सिर्फ एकाध ट्रक ही जा रहा है.

मैंने कहा, कितना GST लग गया हैंडलूम की साड़ी पे? अरे बहुत लगा होगा तो 5 या 12%. इस से 100 रूपए की साड़ी 112 की हो गयी. यही न? तो 12 रूपए के कारण हिंदुस्तान की औरतों ने साड़ी खरीदना पहनना बंद कर दिया? तब तो औरतें सिर्फ पेटीकोट पहिर के घूमती होंगी आजकल? पर मैंने तो ऐसी कोई औरत नहीं देखी?

बहरहाल, गूगल किया और पाया कि हैण्डलूम की सस्ती साड़ी पे तो GST है ही नही. 0% टैक्स है. जब कोई टैक्स लगा ही नहीं तो फिर काहे बर्बाद हुई गवा मऊ का साड़ी उद्योग?

मैंने उनसे कहा कि तथ्यात्मक लेखन कीजिये. आप बुद्धिजीवी हैं, पत्रकार हैं. कव्वा कान ले गया, ये सुन के कव्वे के पीछे मत दौड़िये. पहले अपना कान चेक कीजिये. रिसर्च कीजिये.

पता लगाइये की क्या वाकई लूम बंद हुए. बंद हुए तो क्यों बंद हुए? GST में तो कोई टैक्स है नहीं साड़ी पे, तो फिर आखिर क्या कारण हो सकता है? और 5 रूपए महंगी हो भी जाये तो क्या वाकई देस की औरतें साड़ी खरीदना बंद कर देंगी?

बुद्धिजीवी लोगों को तथ्यात्मक लेखन करना चाहिए. अफवाहों पे ध्यान मत दीजिये. फैक्ट्स चेक कीजिये. आज तक देश मे अंधी पीस रही थी, कुत्ते चाट रहे थे.

कल किसी ने लिखा कि देश मे ऐसे बहुत से उद्योगपति थे जो हमसे आपसे तो टैक्स वसूल रहे थे पर सरकार को एक पैसा नहीं दे रहे थे. सिर्फ अपना घर भर रहे थे. अब 70 साल बाद कोई तो आया जो व्यवस्था परिवर्तन में लगा है.

उद्योग व्यापार का एक बहुत बड़ा वर्ग आज तक ऐसा था जो बिना बिल पर्चे के, बिना कोई टैक्स दिए व्यापार कर रहा था. अब सबको बिल काटने पड़ रहे हैं. टैक्स भरने की चिंता है. एक नई व्यवस्था देश मे लागू हुई है. कुछ शुरुआती दिक्कतें तो आएंगी ही. पर कुछ समय में सब ठीक हो जाएगा.

लोगों को टैक्स देना पड़ रहा है तो जान निकल रही है. लिखते हैं कि रेस्त्रां में बिल देते समय ये महसूस हुआ कि मोदी और जेटली ने भी साथ बैठ के खाना खाया. 280 रूपए की दाल फ्राई और 65 रूपए का लच्छा परांठा ऑर्डर करते समय कष्ट नहीं हुआ पर GST देने में प्राण निकल रहे हैं?

पर ये किसी ने नही पूछा कि मोदी जी वायुसेना के लिए राफेल लड़ाकू विमान किस पैसे से खरीद रहे हो? फौजियों को बुलेट प्रूफ जैकेट और बुलेट प्रूफ हेलमेट खरीदने को पैसा कहाँ से लाये?

मोदी जी ये जो गरीब औरतों को एलपीजी सिलिंडर चूल्हा बांट रहे हो, किस पैसे से बांट रहे हो? ये जो गरीबों को 5 करोड़ घर बनाने की बात करते हो, कहां से लाओगे पैसा.

ये जो 8 लेन और 16 लेन की सड़कें बना रहे हो, इसके लिए कहां से लाये पैसा? ईरान को जो 5000 करोड़ रूपए के पुराने लदे कर्जे की किश्त चुकाई वो कहां से चुकाई.

आज तक ये देश इसी बात को रोता रहा कि हर बार चुनाव में सिर्फ सत्ता परिवर्तन होता है, व्यवस्था परिवर्तन नही होता. पहली बार देश को एक लीडरशिप मिली है जो पूरे मनोयोग से व्यवस्था परिवर्तन में लगी है.

ऐसे-ऐसे लोग बिल काट के टैक्स भरने की तैयारी कर रहे हैं जिन्होंने आज तक कभी बिल बुक ही नही छपवाई. देश संक्रमण काल से गुज़र रहा है. ये प्रसव पीड़ा है. आने वाला कल सुखद होगा.

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY