राष्ट्रवाद की धधकती लेखनी को खामोश करने की कोशिश, क्या वामी-इस्लामी गिरोह के कब्ज़े में हैं FB!

भारत का वह वर्ग जो पिछले 3 वर्षो से अभिव्यक्ति की आज़ादी का रोना रो रहा और सिद्धान्तों की दुहाई देता रहा है वह आज सरेआम नग्न हो कर निर्लज्जता से सहिंष्णुता के आवरण को उतार के फेसबुक के बाज़ार में घूम रहा है.

यह माना जाता है कि फेसबुक सोशल मीडिया का वह सशक्त माध्यम बन गया है जहां पर राष्ट्रवादी विचारधारा की अलख जलाने वालों ने, न सिर्फ स्थापित मीडिया और स्थापित विचारधाराओं को चुनौती दी है, बल्कि धर्मनिर्पेक्षता की आड़ में छिपे वामी इस्लामिक गिरोह के राष्ट्रविरोधी गठजोड़ के कलुषित चेहरे को भारत की जनता के सामने उजागर किया है.

लेकिन आज का दिन फेसबुक के इतिहास का काला दिन है. आज फेसबुक भी इसी वामी इस्लामिक गठजोड़ के हाथों बिक गया जहां उसके हैदराबाद स्थित कार्यालय में इन वामी इस्लामियों ने कब्जा कर लिया है. इन लोगो ने राष्ट्रवाद और हिंदुत्व की आवाज़ों को सोची समझी रणनीति से कुचलना शुरू कर दिया है.

मेरे मित्र और हिंदुत्व व राष्ट्रवाद की धधकती लेखनी अजीत सिंह की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर फेसबुक ने आक्रमण कर उसे दबाने का कुत्सित प्रयास किया है. अजित सिंह की 4 आईडी तो फेसबुक के हैदराबाद स्थित नियंत्रकों ने कल ही 30 दिन के लिए बंद कर दी थी और उनकी बनाई गई 5वीं आईडी, जिस पर कोई भी पोस्ट नही लिखी गयी थी, वह भी एक ही घण्टे के भीतर 30 दिन के लिए बंद कर दी गयी है. जब कि उस आईडी का वेरिफिकेशन भी फेसबुक के नियंत्रकों को करा दिया गया था.

यह सिर्फ अजीत सिंह पर ही आक्रमण नही बल्कि इसी क्रम में डॉ त्रिभुवन सिंह, रंजय त्रिपाठी आदि भी पहले से ही ब्लॉक किये जा चुके है. यह आक्रमण किसी एक व्यक्ति पर नही है यह आक्रमण भारत की अभिव्यक्ति पर है, यह आक्रमण हिंदुत्व पर है, यह आक्रमण राष्ट्रवाद पर है.

आज सोशल मीडिया व स्थापित मीडिया में मात खाये वामी इस्लामिक गिरोह ने सोशल मीडिया को ही नियंत्रण में लेकर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की हत्या कर दी है. यदि आज हमने इस के खिलाफ सार्वजनिक व कानूनी रूप से विरोध नही किया तो यह निश्चित मानियेगा कि वे एक-एक का, चुन-चुन के हिंदुत्व व राष्ट्रवाद की बात करने वालो का गला घोंटेंगे.

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