योम किप्पुर : ईश्वर से गलतियों की माफी की प्रार्थना

Yom Kippur

योम किप्पुर प्रायश्चित, दैवीय निर्णय और आत्माओं के संताप का दिन माना जाता है. इस दिन प्रत्येक व्यक्ति को अपने पाप को धोने व अपनी गलतियों को स्वीकार करने का एक अवसर प्राप्त होता है. इसे रोश हाशनाह (यहूदी नव वर्ष) के आठ दिन बाद मनाने की परंपरा है.

बाइबिल में केवल व्रत का ही उल्लेख है. इस व्रत के महत्व को अपने द्वारा किए गए गलत कार्यों को गिनने और गलतियों को गंभीरता से विचारने से जोड़ा गया है. इस दिन यहूदी ईश्वर से अपने पापों की माफी की उम्मीद करते हुए प्रार्थना करते हैं.

योम किप्पुर पर अधिकांश समय धार्मिक सेवा में लगाया जाता है और लगातार 25 घंटों का व्रत रखा जाता है. सबसे बड़ी बात यह है कि योम किप्पुर से धार्मिक लोग ही नहीं, बल्कि धर्मनिरपेक्ष आबादी भी जुड़ते हैं.

योम किप्पुर एक तरह से सामाजिक जुड़ाव है, यही कारण है कि यह रोश हाशनाह और अन्य त्योहार की तुलना में खास हो जाता है. इस दिन पूरा देश 25 घंटे के व्रत में होता है. मनोरंजन के तमाम केंद्र बंद हो जाते हैं. यहां तक कि इस दौरान टेलिविजन और रेडियो का प्रसारण भी बंद कर दिया जाता है. न्यूज का प्रसारण तक नहीं होता है. पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बंद रखा जाता है. सड़कें पूरी तरह से बंद हो जाती हैं.

इजरायल में योम किप्पुर का खास मतलब है जो कि 1971 के युद्ध से जुड़ा है. उस साल योम किप्पुर के दिन ही मिस्र और सीरिया ने इजरायल पर अचानक हमला कर दिया था.

– साभार इजरायल हिंदी में

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