जीवनदीप : जीवन का दीप झिलमिलाता रहे कुलदीप का

Jivandeep
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इनसे मिलिए यह हैं कुलदीप (12 वर्ष), जरहाभाठा, बिलासपुर निवासी (छत्तीसगढ़ ) ऑटो ड्रायवर कोमल दिवाकर जी के बेटे. कल इनके पिता से बात हुई तो पता चला कुलदीप पिछले सप्ताह भर से सिम्स हॉस्पिटल बिलासपुर में भर्ती है, कारण था ब्लड में प्लेटलेट्स के स्तर का तेजी से गिरना. तुरंत मैं अपने दोस्तों के साथ मिलने गया, फाइल्स देखी तो समझ आया कि कुलदीप को “एप्लास्टिक अनीमिया’ (कैंसर का एक टाइप) नाम की बीमारी हो गयी है.

3 महीने पहले कुलदीप का ब्लड अचानक से कम होने लगा था. कई हॉस्पिटल में टेस्ट से पता चला कि इसे “एप्लास्टिक अनीमिया’ हो चुका है. प्रायः इस तरह के मेजर केसेस में बोन मैरो ट्रांसप्लांट ही एकमात्र उपाय होता है. पहले ही कुलदीप के इलाज पर इतने पैसे खर्च हो चुके थे फिर भी ऑटो ड्रायवर पिता किसी भी तरह लोगो से सहयोग ले कर स्थानीय डॉक्टर की सलाह पर कुलदीप को उसके पिता सीएमसी वेल्लूर हॉस्पिटल ले कर गए. वहां कुलदीप और उसके छोटे भाई को भर्ती करके कई टेस्ट किये गये, और अंत में वहा के अनुभवी डॉक्टर्स ने भी पुष्टि कर दी, कि कुलदीप के बचने का एक मात्र उपाय सिर्फ और सिर्फ बोन मेरो ट्रांसप्लांट ही है. चूँकि छोटे भाई का बोन मेरो टेस्ट, कुलदीप से मैच हो चुका था तो डोनर खोजने की समस्या भी खत्म हो गयी.

पर असली समस्या तब सामने आई जब डॉक्टर ने कुलदीप के पिता के हाथों में बोन मेरो ट्रांसप्लांट के लिए 14 लाख रूपये के खर्च का एस्टीमेट थमा दिया. जी हाँ दोस्तों बोन मेरो ट्रांसप्लांट में करीब करीब खर्च 14 से 20 लाख रूपये तक आ जाता है, और ऊपर से मरीज को कम से कम हॉस्पिटल में 3 महीने भर्ती रहना होगा वो अलग. हॉस्पिटल के सारे कागजात लेने कल शाम को मैं कुलदीप के घर गया था, तो देखा एक बाथरूम जितने बड़े घर में कुलदीप अपने छोटे भाई और पिता के साथ रहता है.घर भी बेजा कब्ज़ा वाली जमीन पर बना हुआ अन्य झुग्गी बस्ती वालों के बीच.

इस परिवार का दूसरा दुखद पहलु यह है कि कुलदीप की माँ अब इस दुनिया में नहीं है.एक साल पहले अचानक किडनी फेल हो जाने से वह चल बसी.पत्नी के गुजरने के बाद ऑटो ड्रायवर पिता कोमल ही अपने दोनों बच्चो के लिए माँ-बाप दोनों का किरदार निभा रहे हैं.ऑटो चलाकर दोनों बच्चो की पढ़ाई से लेकर के इलाज का खर्च उठाने की कोशिश कर रहे हैं. मल जी बहुत सरल स्वभाव के हैं.. पर मैंने उनके इस स्वभाव के पीछे का दर्द महसूस किया है. एक डर उनके मन में है …कि अपनी पत्नी को ना बचा सका .. कहीं अब अपने बच्चे को हमेशा के लिए ना खो दूँ.

सरकारी चिकित्सा नियमों के हिसाब से कुलदीप के बोन मैरो ट्रांसप्लांट के लिए राज्य सरकार की तरह से डेढ़ लाख की राशि स्वीकृत की जा रही है. पर तब भी हम 14 लाख रूपये इकट्ठे करने के लक्ष्य से काफी दूर हैं. इसलिए कुलदीप के बोन मेरो ट्रांसप्लांट को मैंने एक पर्सनल चैलेंज के रूप मे ले लिया है. चाहे जो हो जाए पर एक महीने के भीतर यह पूरी रकम इकठ्ठा करके कुलदीप को वेल्लूर भेजने की जिद है.. क्योंकि कैंसर की बीमारी किसी को ज़्यादा मौके नहीं देती है. पूरी तैयारियों के साथ भीड़कर किसी भी तरह इस लक्ष्य को हासिल करना है और कुलदीप को जल्द से जल्द ट्रांसप्लांट करवा कर वापस बुलाना है.

आप सभी के सहयोग और सपोर्ट से इतना दावे के साथ कह सकता हूँ कि हम बहुत ही जल्द इस लायक हो जायेंगे की कुलदीप का इलाज करवा सकें. अगर आपको लगता है कि मेरी यह कोशिश किसी की जान बचा रही है तो सिर्फ इस लेख को टैग या शेयर कर देना आप ..मेरा हौसला और बढ़ जाएगा, उम्मीदें दुगुनी हो जायेंगी. इस जंग को जीतने के लिए मुझे पता है कि आगे क्या करना है और अब आपके ऊपर भी छोड़ रहा हूँ दोस्तों ..आप समझिये कि आप क्या कर सकते हैं!! बस एक पल के लिए ये सोच लीजियेगा कि अगर यही आपके बेटे के साथ होता तो आप क्या कोशिश करते उसकी जान बचाने के लिए ..इतना सोच लेने से ही आपको अपनी क्षमता का एहसास हो जाएगा ..और उसी क्षमता की बदौलत आप कुलदीप की मदद जरुर कर पायेंगे..

Jivandeep

उम्मीद यही कहती है कि इस बार भी आसमान में एक गहरा सुराख होगा. एक ज़िंदगी बचाने में और कामयाब होंगे हम, किसी का विश्वास टूटने से बचा लेंगे, गरीब है तो क्या हुआ.. हम सब के हौसलों में तो बहुत दम है.

अगरआप किसी भी तरह की आर्थिक या अन्य मदद करना चाहते हैं तो यहाँ अपना सहयोग जमा कर सकते हैं..
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कोमल दिवाकर (पिताजी) (Komal Diwakar), मो. 9981669989
SBI बैंक खाता नंबर- 37158533060
IFSC कोड- SBIN0004571 ,
नेहरु चौक कलेक्ट्रेट ब्रांच , बिलासपुर (छत्तीसगढ़)
किसी भी जानकारी के लिए आप मुझसे (रविन्द्र सिंह क्षत्री- 7415191234) संपर्क कर सकते हैं.

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