जोगिया दौड़ा-दौड़ा के कुत्ते की मौत मार रहा है, पर मजाल कि कोई चूं भी कर दे

खबर आ रही है कि कैराना में आतंक के पर्याय मुकीम काला गैंग के एक महत्वपूर्ण सदस्य और मुकीम काला के सगे भाई वसीम काला को योगी जी की पुलिस ने ठोक दिया है.

जब से उत्तरप्रदेश में योगी सरकार बनी है, कैराना क्षेत्र के आतताइयों का ये 12वां एनकाउंटर हुआ है. अब तक जो आंकड़े हैं उस हिसाब से हर पंद्रहवें दिन एक एनकाउंटर हो रहा है.

अभी कुछ दिन पहले ही जोगी जी, रजत शर्मा के कार्यक्रम ‘आप की अदालत में’ कह रहे थे कि “इस धरती पे रहना है या नहीं? सोच लो…”. मुकीम काला अब तक इसलिये बचा हुआ है क्योंकि जेल में है.

अभी कैराना के एक मित्र से फोन पर जानकारी ली. भाई जान लोग पिछवाड़े में दुम दबाये बिलों में घुसे हुए हैं. जोगिया दौड़ा-दौड़ा के कुत्ते की मौत मार रहा है पर पूरे इलाके से कोई चूं की आवाज़ भी नहीं निकाल रहा.

नहीं तो ये वही उत्तरप्रदेश है जहां पुलिस मारना, पीटना, पकड़ना तो दूर, अगर हाथ भी लगा देती थी तो हज़ारों की भीड़ चढ़ के थाना घेर लेती थी और पुलिस वाले जान बचाने की जगह खोजते थे.

आज ये आलम है कि पूरे इलाके में योगी सरकार का वो इक़बाल है कि जब चाहती है, जहाँ चाहती है, घुस के छापा मारती है और ऐसे लाद के ले जाती है जैसे रिक्शे पे लाद के सूअर ले जाते हैं और रोना, पीटना, चीखना, चिल्लाना तो दूर, कोई चूं भी नहीं करता.

एक दर्जन एनकाउंटर हो गए कैराना में, और हरेक में यूपी पुलिस ने घरों से उठा के, कोने में ले जा के ठोक दिया और किसी के मुंह से आवाज़ नहीं निकली कि एनकाउंटर असली था या फ़र्ज़ी और न्यायिक जांच कराओ.

पर हमारे लोग अपनी दुर्दशा बहुत जल्दी भूल जाते हैं. आज एक मोहतरमा कह रही थी कि 2019 तो गया.

जाना भी चाहिए. गुलामी की आदत जो पड़ी है. बंगाल और केरल में जो हो रहा है सही हो रहा है. बल्कि मैं कहूंगा कि कम हो रहा है. अभी और पिटाई होनी चाहिए. तब शायद अक्ल आये.

कुछ व्यापारियों को दिल्ली में कांग्रेस और यूपी में मुलायम सूट करते हैं… ले आओ वापस… इनके लिए तो देश जाए भाड़ में, बस व्यापार चोखा रहे. इनका तो मंत्र है –

कोउ नृप होय हमें न हो हानि
पइसा रही त होइहों रानी

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