इस आदमी की तलाश में है दुनिया, हमेशा से

जब तक दुनिया में बुराई है, जब तक दुनिया में पाप है, जब तक दुनिया में असत्य और अधर्म है; तब तक जो शांत हैं, जो प्रेमपूर्ण हैं उन्हें भी लड़ना पड़ेगा. लड़ना उनकी इच्छा नहीं है, हमेशा उनकी मजबूरी है. लेकिन उस लड़ाई में भी प्रेम को और करुणा को खो देने का कोई कारण नहीं है.

एक मेरे मित्र जापान से लौटे. वे वहां से एक मूर्ति खरीद लाए. वह मूर्ति उनकी समझ के बाहर उन्हें मालूम पड़ी. पर बहुत प्यारी लगी तो वे उस मूर्ति को ले आए.

मेरे पास वे मूर्ति लाए और कहने लगे, मैं इसका अर्थ नहीं समझा हूं. यह बड़ी अजीब मूर्ति मालूम पड़ती है. मूर्ति सच में ही अजीब थी. मैं भी देख कर चौंका. और मैं देख कर खुशी और आनंद से भी भर गया. मूर्ति अदभुत थी.

वह मूर्ति थी एक सिपाही की मूर्ति, लेकिन साथ ही वह एक संत की मूर्ति भी थी. उस मूर्ति के एक हाथ में थी तलवार नंगी और उस तलवार की चमक उस मूर्ति के आधे चेहरे पर पड़ रही थी, और वह आधा चेहरा ऐसा मालूम पड़ता था जैसे अर्जुन का चेहरा रहा हो.

जैसे तलवार की चमक थी वैसा ही वह आधा चेहरा जिस पर तलवार चमक रही थी, वह आधा चेहरा भी उतना ही चमक से भरा हुआ था. उतने ही शौर्य से, उतने ही ओज से, उतने ही वीर्य से.

और दूसरे हाथ में उस मूर्ति के एक दीया था. और दीये की ज्योति की चमक चेहरे के दूसरे हिस्से पर पड़ती थी. और वह दूसरा हिस्सा बिलकुल ही दूसरा था.

वह चेहरा ऐसा मालूम पड़ता था जैसे बुद्ध का रहा हो इतना शांत, इतना मौन, इतना करुणा से भरा हुआ. और वह एक ही आदमी का चेहरा था. और एक हाथ में तलवार और एक हाथ में दीया.

वे मेरे मित्र पूछने लगे, मैं समझा नहीं, यह कैसा आदमी है?

मैंने कहा इसी आदमी की तलाश में दुनिया है हमेशा से. एक ऐसा आदमी चाहिए जो तलवार की तरह अडिग भी हो, जो तलवार की तरह ओज से भी भरा हो, समय पड़ने पर जो तलवार बन जाए. लेकिन उस आदमी के भीतर शांति का और करुणा का दीया भी हो.

जिस आदमी के भीतर करुणा का और शांति का और प्रेम का दीया है, उसके हाथ में तलवार खतरनाक नहीं है. उसके हाथ में तलवार भी मंगल सिद्ध होगी. शांत आदमी युद्ध के मैदान पर भी प्रेयरफुल होगा, वह प्रार्थना से भरा होगा.

वह जिनसे युद्ध में खड़ा होना पड़ा है, उसे मजबूरी में एक नेसेसरी ईविल की तरह, एक आवश्यक बुराई की तरह. वह उनके प्रति भी परमात्मा से, प्रार्थना से ही भरा हुआ होगा. वह उनकी सदबुद्धि और मंगल के लिए भी प्रार्थना करता होगा. उसके हाथ में तलवार होगी लेकिन हृदय में प्रार्थना होगी.

  • ओशो का प्रवचनांश

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