GST : निश्चिंत रहें, सब सीख जाएंगे ईमानदारी से खाना कमाना जीना

दिल्ली में, लालकिले के पीछे, आउटर रिंग रोड पर हर रविवार एक बाज़ार लगता है, जिसका नाम है चोर बाज़ार. अब भगवान ही जाने कि इसका नाम चोर बाज़ार कब से पड़ा, क्यों पड़ा? क्या इतिहास है इसका? कब शुरू हुआ. GST तो अब आया, मैं तो पिछले 35 या 40 साल से देख रहा हूँ.

सुना है कि इसमें एकदम नई हालत में पुराने ब्रांडेड जूते, गाड़ियों के टायर, कपड़े और दुनिया जहान का नया पुराना सब सामान बिकता है.

अब जब नाम ही चोर बाज़ार है तो चलिए कुछ देर को हम मान ही लेते हैं कि यहां चोरी का माल ही बिकता है. दुनिया जहान के चोर, गिरहकट, जेबकतरे, झपटमार, लुटेरे, रेलों से आपके सूटकेस उड़ाने वाले, आपके सिर या सीट के नीचे से जूता चुरा लेने वाले, मंदिरों गुरुद्वारों से जूते चुरा लेने वाले सब अपना माल यहीं बेचते-खपाते हैं.

अब कोई सरकार, GST वाली सरकार आ गयी जिसने ये सारी चोरी चकारी, डकैती, छिनैती, झपटमारी, लूट बंद करा दी, तो ज़ाहिर सी बात है कि ये चोर बाज़ार उजड़ जाएगा. लाखों चोर बेरोज़गार हो जाएंगे. चोरो के घरों में फ़ाक़ाकशी होने लगेगी. चूल्हे ठंडे पड़ जाएंगे.

चोर बाज़ार उजड़ जाएगा. चोर बाज़ार से Nike Adidas का जूता खरीद के इतराने वाले लौंडे, बेचारे नंगे पांव फिरने को मजबूर हो जाएंगे.

कभी घूम के आइये चोर बाज़ार… सारा माल तो चोरी का नहीं… कुछ तो एकदम नया माल भी बेचते हैं… अब जब बाज़ार उजड़ेगा तो वो भी तो उजड़ ही जायेंगे.

तो अब सरकार को क्या करना चाहिए?

इन बेचारे चोरों की रोज़ी रोटी, इनके मासूम बीबी बच्चों का खयाल रखते हुए चलने दे ये लूट पाट चोरी चकारी? आखिर लाखों लोग बेरोज़गार हो जाएंगे चोरी लूट डकैती रुक गयी तो…

अच्छा, वाकई ये चोरी रुक गयी तो ये लोग भूखे मर जायेंगे या कुछ समय बेरोज़गार रहने, भूखे मरने के बाद मेहनत ईमानदारी से खा कमा लेंगे. ईमानदारी से खाना कमाना सीख जाएंगे???

GST लागू होने के बाद से देश में टैक्स चोरों और टैक्स चोरी का माल बेचने खरीदने वालों का संक्रमण काल चल रहा है. तीन-छह महीने में सब ईमानदारी से खाना कमाना जीना सीख जाएंगे. निश्चिंत रहें.

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