थूक कर भागने वाले ‘पत्तलकार’ को दूसरा जवाब : Statue Of Unity

स्वनामधन्य ‘पत्तलकार’ Rubbish कुमार के सुपारी जर्नलिज्म के खिलाफ मैंने जो अभियान छेड़ा है उसकी दूसरी किश्त हाज़िर है (जंजैहली बाइकिंग ट्रिप के कारण थोड़ा विलंब हुआ. क्षमा चाहता हूँ).

Rubbish कुमार ने अपनी फेसबुक पोस्ट में मोदी की जिन 7 असफल परियोजनाओं का ज़िक्र किया था, उसमे पहली थी वडोदरा में बनने वाली रेलवे यूनिवर्सिटी, जिस पर मैं, पिछले हफ़्ते लिख चुका हूँ.

[थूको और भागो! अरे, ई का पत्रकारिता हुई भई?]

Rubbish की लिस्ट में दूसरी फेल परियोजना Statue Of Unity है. ये सरदार वल्लभ भाई पटेल की एक प्रतिमा है, जो गुजरात में बनाई जा रही है. 182 मीटर यानि 597 फ़ीट ऊंची ये प्रतिमा जब बन के तैयार होगी तो विश्व की सबसे ऊंची और विशाल प्रतिमा होगी.

इसे 2989 करोड़ रूपए खर्च कर बनाया जा रहा है. सवाल है कि इतने पैसे एक प्रतिमा पर क्यों खर्च किये जा रहे हैं? मायावती ने भी तो यही किया था लखनऊ में. ये फ़िज़ूलख़र्ची क्यों? मायावती और मोदी जी मे क्या अंतर रहा?

[थूक कर भागने वाले ‘पत्तलकार’ को पहला जवाब : रेल यूनिवर्सिटी]

भैया मेरे… अंतर ये है कि मोदी गुज्जू हैं और गुज्जू तो बिना प्रॉफिट के आपकी कटी उंगली पे नहीं #$@. एक रूपए नहीं फालतू खर्चने वाले मोदी. Statue Of Unity को दरअसल एक बहुत बड़े पर्यटन आकर्षण (Tourist atrraction) के रूप में विकसित किया जा रहा है.

Tourist attraction क्या होता है और एक अकेला tourist spot कैसे किसी इलाके का कायाकल्प कर देता है इसका सबसे बड़ा उदाहरण है आगरे का ताजमहल. जब शाहजहां ने ताजमहल बनवाया था तब शायद वो ये नहीं जानता होगा कि ये मकबरा आगरे को अरबों-खरबों रूपए कमा के देगा.

बहरहाल वापस आते हैं Statue of Unity पर. ये एक पर्यटन परियोजना है जिसपर 2989 करोड़ रूपए खर्च होंगे. इसे सरदार सरोवर बाँध के सामने साधू बेट नामक स्थान पर, एक झील में एक टापू पर बनाया जा रहा है.

मुख्य प्रतिमा के अलावा टापू को main land से जोड़ने के लिए एक ब्रिज, सरदार पटेल का एक स्मारक, एक Visitor’s Center Building, एक स्मारक उद्यान, होटल, Convention Center, Amusement park और एक Research Center भी इसी 2989 करोड़ रूपए में बनाया जाएगा. पूरी दुनिया से लोग इसे देखने आएंगे. लाखों-करोड़ों देसी विदेशी टूरिस्ट आएंगे. दुनिया जहान की कॉन्फ्रेंस, कन्वेंशन सम्मेलन होंगे.

पूरी परियोजना 56 महीने में पूरी होगी. जिसमें से 15 महीने planning और 40 महीने निर्माण में लगेंगे… 2989 करोड़ में से 1347 करोड़ प्रतिमा बनाने में, 235 करोड़ Convention center और Exhibition हॉल बनाने में, 83 करोड़ ब्रिज बनाने में खर्च होंगे.

प्रतिमा बनाने का ठेका L&T को मिला है. प्रतिमा में कुल 75000 क्यूबिक मीटर कंक्रीट, 5700 मीट्रिक टन स्टील और 22500 टन Bronze sheets लगेंगी. प्रतिमा का बाह्य आवरण Bronze का होगा जिसे बनाने का ठेका L&T ने एक chinese company को दिया है.

अब तक 59 मीटर ऊंची प्रतिमा घुटनों तक बन चुकी है, Chinese कंपनी ने Bronze sheets कमर तक बना के पहुंचा दी हैं. निर्माण स्थल पर कुल 2400 कर्मचारी तीन शिफ्ट में दिन-रात कार्यरत हैं.

ठेके की शर्तों के अनुसार L&T को इसे 2019 तक बना के देना है. काम बड़ी तेजी से चल रहा है, पर जैसी कि कांग्रेस पार्टी की आदत है, वो राष्ट्र निर्माण के हर काम में टांग अड़ाती है, रोड़े अटकाती है, कांटे बोती है, सो साधू बेट में भी 926 एकड़ भूमि के अधिग्रहण के खिलाफ कॉन्ग्रेस का आंदोलन और litigation चल रहा है. फिर भी project समय से पूरा हो जाएगा ऐसा गुजरात सरकार का विश्वास है.

रही बात महान ‘पत्तलकार’ की सुपारी पत्रकारिता की, तो इनको सिर्फ झूठे अनर्गल आरोप लगाने हैं, मौके पर जा के न देखना है, न किसी से कुछ पूछना है.

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY