वामपंथी सिर्फ विश्वविद्यालयों में ही कर पा रहे मोदी के खिलाफ माहौल बनाने का प्रयास

बहुत से सोशल मीडिया यूज़र्स, जिन्हें अभी जुमा जुमा आठ दिन नहीं हुए पैदा हुए, वो जिनके दूध के दांत अभी टूटे नहीं हैं, वो फरमा रहे हैं कि इस वाइस चांसलर ने BHU को बर्बाद कर दिया.

मेरा BHU से पहला परिचय 1977 में हुआ था. पिता जी फौज में थे. 1975 में इमरजेंसी लगी थी देश में. 1977 में उनका ट्रांसफर चंडीगढ़ से गंगटोक – सिक्किम हो गया.

वहां उन दिनों KV (केंद्रीय विद्यालय) नहीं था, सो मजबूरन परिवार को बनारस छोड़ना पड़ा और हमारा एडमीशन KV, BHU campus में करा दिया गया. दुनिया MA, BA, पीएचडी करने आती है, हम दर्जा 7 से ही BHU में पढ़े.

उन दिनों लोकनायक जय प्रकाश नारायण का असर था देश भर की यूनिवर्सिटी में. छात्र आंदोलन बहुत जल्दी अराजकता में तब्दील हो गए. यही वो समय था जब राष्ट्रीय राजनीति में सबसे ज़्यादा राजनेता छात्र राजनीति से आये. पर यही वो समय था जब सबसे ज़्यादा अराजकता भी विश्व विद्यालय कैम्पस में हुई.

BHU का तो खासकर बुरा हाल था. कैंपस के हॉस्टल बम बनाने और टेस्ट करने की फैक्ट्री में तब्दील हो गए थे. पढ़ाई बिल्कुल ही बंद थी. इस दौरान एक समय ऐसा भी आया जब 3 साल तक BHU में परीक्षा ही नही हुई. लगातार 3 सेशन zero हुए.

अराजकता का ये आलम था कि छात्रावासों के ज़्यादातर कमरे पूर्व छात्रों ने कब्जा कर रखे थे. एक-एक लड़का 10-15 साल तक एक कमरे में काबिज़ रहता और यूनिवर्सिटी प्रशासन की क्या औकात कि कमरा खाली कराना तो दूर हॉस्टल में घुस भी जाये.

ये स्थिति 1977 से ले के 1985 तक रही. फिर 85 के आसपास आर पी रस्तोगी नामक एक वाइस चांसलर की नियुक्ति हुई. 85 में पहली बार लगा कि कोई वाइस चांसलर आया है.

उन्होंने आते ही सबसे पहले लट्ठ उठाया. BHU में सुरक्षा कर्मियों के रूप में एक्स सर्विसमैन रिटायर्ड फौजियों की नियुक्ति हुई. खास कर जिला गाज़ीपुर से गहमर जैसे गांवों से छांट-छांट के ठाकुर और अहीर भर्ती किये गए और उनके हाथ में डंडा नहीं बल्कि मिर्ज़ापुर से लट्ठ थमाए गए.

सबसे पहले उन्होंने यूनिवर्सिटी के सारे होस्टल खाली कराये. आदेश जारी हुआ कि सब लड़के, शरीफ हो या बदमाश, चलो बाहर. जो शराफत से चला गया वो बच गया. और फिर जो नहीं निकला उसपे वाइस चांसलर का कहर बरपा.

वाइस चांसलर की नई फौज ने लौंडों को गिरा के बेरहमी से मारा. घसीट-घसीट के मारा. वो कमरे जिनपे पुराने लड़कों का 15 साल से कब्जा था उन्हें खाली कराया गया. उसके बाद नए सिरे से हॉस्टल में कमरों का आवंटन हुआ. बदमाश कुख्यात लौंडे हाथ गोड़ तोड़ के घर भेज दिए गए.

आज के जमानिया, गाज़ीपुर के जो ये नेता जी हैं न, ओम प्रकाश सिंह जी, ये भी छात्र नेता थे. इनको उस ज़माने में इतना मारा था कि ये तो मर ही गए होते. कहा जाता है कि उस समय चंद्र शेखर सिंह जी बलिया वाले, जो बाद में PM हुए, के हस्तक्षेप से इनकी जान बची.

वाइस चांसलर रस्तोगी का ये तांडव BHU में पूरे 5 साल चला. उस पूरे कार्यकाल में BHU की सुरक्षा व्यवस्था इतनी कड़ी थी और पूर्व फौजियों का इतना खौफ था कि लौंडे उनका नाम ही सुन के पैंट गीली कर देते थे.

1990 के बाद BHU का स्वर्णकाल शुरू हुआ और जो यूनिवर्सिटी पढ़ाई न होने के कारण पूरी तरह बदनाम हो चुकी थी, वो देश के Premier institutions में गिनी जाने लगी.

इसके बाद आने वाले VCs ने भी यूनिवर्सिटी को बखूबी सम्हाला और 2000 के आसपास तो यूनिवर्सिटी में छात्रसंघ को ही भंग कर दिया गया. उसके बाद से आज तक वहां कभी छात्रसंघ के चुनाव नहीं हुए.

फिलहाल जो VC हैं प्रोफेसर गिरीश चंद्र त्रिपाठी, वो अपने No Nonsense Attitude के लिए जाने जाते हैं. ये एक सर्वविदित तथ्य है कि कांग्रेस के शासन काल में देश के सभी Premier Institutions, Press और यहां तक कि Bollywood तक पे seculars और वामपंथियों का कब्जा रहा है…

70 साल से काबिज़ इन नाजायज़ कब्ज़ाधारियों को अब मोदी सरकार धीरे-धीरे हटा के राष्ट्रवादी सोच के लोगों को स्थापित कर रही है तो स्वाभाविक है कि सेक्युलर और वामपंथी, रिक्शे पे लदे सूअर की माफ़िक़ चिल्ला रहे हैं.

वामपंथी seculars मोदी के खिलाफ माहौल बनाने का जो भी प्रयास कर रहे हैं वो सिर्फ इन्ही यूनिवर्सिटीज़ में ही हो रहा है.

क्रमशः …

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