पाकिस्तान बनाम टेररिस्तान की हकीकत : कितना फर्क है भारत और पाकिस्तान में

एक तरफ हम हैं भारत में सब धर्मों और धार्मिक स्थानों की इतनी इज्जत करते हैं कि सड़क के बीचों बीच बाधक होने के बाद भी, हम यह ध्यान रखते है कि हमारे दूसरे धर्मों के हिन्दुस्तानी भाईयों की आस्था पर किसी प्रकार का कोई आघात न पहुंचे. इस कारण छोटे बड़े सभी धार्मिक प्रतिष्ठानों की बाकायदा हमारी सरकार अच्छी तरह रख रखाव करके पूरी व्यवस्था करती हैं. दूसरी तरफ पाकिस्तान में जहाँ पर भी अच्छे बड़े और मान्यता प्राप्त मन्दिर है, उनका न तो रख रखाव किया जाता है, न कोई देख रेख. इस तरह के पाकिस्तान के लगभग सभी मन्दिर और धार्मिक स्थल अब सब धीरे धीरे “मोहन जोदड़ो के खण्हरों “ की तरह पूरी तरह बर्बाद होते जा रहे हैं.

पहला चित्र इन्दौर की केसरबाग स्थित मजार का है, जो मुख्य सड़क के बीच में आकर यातायात का बहुत बड़ा रोड़ा बना हुआ है. फिर भी सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी हमारे यहाँ सब लोग परेशानी उठाकर भी धार्मिक स्थान की अस्मिता को कायम रखे हैं.

दूसरे चित्र कल्लर कहार, चोला सैयदान, मल्काना जिले के दलवाली गाँव के पाकिस्तानी इलाकों में हैं. ‘शिव गंगा’ के नाम से इलाके के अति प्राचीन मन्दिर समूहों को बुरी तरह से क्षत विक्षत कर दिया गया है. यह सब वीरान खण्हर बन गए हैं. इनमें रखी आराध्य देवताओं की मूर्तियों को या तो खण्डित कर दिया गया है या फिर उन सबको स्मगलरों के द्वारा विदेशों में “एन्टिक” बना कर बेच दिया गया है. इसी प्रकार पाकिस्तान में दूसरे मन्दिरों और धार्मिक प्रतिष्ठानों को कतास राज, मालोत किला क्षेत्र, नन्दाना किला तथा रोहतास इलाकों मे जर्जर कर दिया गया है. विश्व विख्यात सूर्य मन्दिर मुल्तान, गोरी मन्दिर थारपरकार, वरूण मन्दिर स्यालकोट जैसे लगभग पूरे पाकिस्तान के मन्दिरों को तोड फोड करके लूटकर बर्बाद कर दिया गया है.

Pakistan temple

आश्चर्य की चीज तो यह है कि यूनेस्को द्वारा घोषित लाहौर के लाल किले परिसर में शहंशाह अकबर ने जोधा बाई का जो मन्दिर बनाया था, उसकी कांच की रचना अपने आप में अद्वितीय सांस्कृतिक धरोहर है. पर इस मन्दिर में भारतीय देवी देवताओं के लिये दीवार खोद खोदकर जो गन्दी अश्लील गालियां लिखी गई हैं, उन्हें देखकर कोई भी मूर्ख से मूर्ख इन्सान भी शर्मशार हो जाएगा.

पाकिस्तान बनाम टेररिस्तान

संयुक्त राष्ट्र की जनरल ऐसेम्बली में पाकिस्तान को जो “ टेररिस्तान” का उपनाम दिया गया है वह अपने आप मे पूरी तरह पाकिस्तान की हकीकत बयान करता है .पाकिस्तान में आज भी दो तरह की सरकारें हैं एक विदेशियों से मदद के नाम पर भीख मांगने के लिये संवैधानिक सरकार है. दूसरी सैन्य सरकार है. सैन्य सरकार सबसे ऊपर है. पाकिस्तान एक मात्र ऐसा देश है जहाँ पर न्याय व्यवस्था तक दोहरी है. सैनिक अदालतें किसी को फांसी की सजा तक दे सकती है. फिर वह चाहे सैनिक हो या नागरिक.

सन् २००४ में पाकिस्तान के एटम बम निर्माता डा०अब्दुल कादिर खान को अमेरिकन ने पकड़ कर उनसे पूछताछ करके यह जानकारी ली थी कि उन्होंने पाकिस्तान की सेना के एक गुप्त कार्यक्रम के अन्तर्गत लीबिया, ईरान और उत्तरी कोरिया को परमाणु हथियार बनाने की टेक्नालाजी और साधन सप्लाय किये थे.

DAWN पाकिस्तान में छपी एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार बीबीसी को दिये गए ५ सितम्बर २०१७ के एक टेलीफोनिक इंटरव्यू में डा० अब्दुल कादिर खान ने स्वंय यह माना कि वह पाकिस्तानी सेना के एक गोपनीय “मिसाईल प्रोजेक्ट” के तहत (डा० खान खुद ) दो मर्तबा प्योंगयांग उत्तरी कोरिया जाकर रह चुके हैं.

अब उत्तरी कोरिया के तानाशाह ने छ: सफल परमाणु परीक्षण कर लिए जिसमें छटवां हायड्रोजन बम का था. और उत्तरी कोरिया की सरकार अमेरिका के राष्ट्रपति की चेतावनी को “कुत्तों के भूँकने” की संज्ञा देती है. यहाँ तक कह दिया है कि अमेरिका प्रेसीडेन्ट पागल है. इसके लिये अगर कोई जिम्मेदार है तो वह है पाकिस्तान की समानान्तर सैनिक सरकार क्योंकि न पाकिस्तान अपनी परमाणु तकनीक तानाशाह को बेचता न वहां के तानाशाह की हिम्मत होती कि वह इतने खतरनाक इरादों पर अमल करे.

आज अगर उत्तरी कोरिया सच में प्रशान्त महासागर में हाड्रोजन बम की मिसाईल फोड़ देता है, तो यह सुनिश्चित है कि केलिफोर्निया के पास जो “सेन्ट एण्ड्रूज फाल्ट” है वह सक्रिय हो जाएगी. उसके कारण पूरे इलाके में १० शक्ति का भूकम्प आएगा और पूरा का पूरा केलिफोर्निया समुद्र में समा जाए. ठीक उसी तरह जैसे कृष्ण की द्वारका आज भी अरब सागर में जल समाधि लिये समुद्र के तल में विराजमान है.

यही कारण है कि पूरी दुनिया का उत्तरी कोरिया को लेकर चिन्तित होना स्वाभाभिक है. पाकिस्तान की उत्तरी कोरिया से सांठ गांठ और आंतकवादियों के शरण देने की आदत ही पाकिस्तान की इन हरकतों और इन्सानियत को तबाह करने की नापाक कोशिशों के कारण ही, “पाकिस्तान“ का नाम अब बदल कर “ टेररिस्तान“ कर देने के लिए मजबूर करती है.

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY