कौलान्तक पीठ-3 : महारहस्य पीठ और महायोगी सत्येन्द्र नाथ

महायोगी सत्येन्द्र नाथ हिमालय का एक अद्भुत योगी है शायद 600 साल पहले समाप्त हो चुकी भारतीय सिद्ध परम्परा का लगभग आखिरी वारिस. एक युवा जो संजोये है बहुत से अनसुलझे रहस्य, जिसे लोग सिद्ध संत कहते हैं. कहा जाता है कि हिमालय उसे अपना पुत्र मानता है, लेकिन युवा योगी ने अपने को केवल भारत का एक आम नागरिक ही बताया.

हज़ारों सिद्ध साधु नाथ और औघड़ परमहंस जिसे अपना गौरव मानते हैं वो विचित्रताओं से भरा एक युवा है जिसे महायोगी सत्येन्द्र नाथ जी के नाम से पुकारा जाता है, आपने ठीक समझा ये वही महायोगी सत्येन्द्र नाथ हैं जिन्हें कौलान्तक पीठ ने अपना पीठाधीश्वर नियुक्त किया.

अनेक रहस्यमयी साधनाओं को संपन्न करके ही कोई इस पीठ का अधिपति नायक बन सकता हैं. भौतिक विज्ञान से कोसों दूर अध्यात्म का नैसर्गिक विज्ञान अंगडाइयां लेता है, पुस्तकों में लिखित ज्ञान के अतिरिक्त जो भी आध्यात्मिक रहस्य है वो कौलान्तक पीठ के ही पास है. ये वही कौलान्तक पीठ है जिसे कुलांत पीठ के नाम से जाना जाता है, जिस पीठ ने हजारों साल पहले देवी देवताओं की पहली बार पृथ्वी पर प्रतिमाएं बनायीं थी.

ये वही कौलान्तक पीठ है जिसे मंत्र विद्या तंत्र योग आयुर्वेद का संरक्षक और प्रचारक कहा गया. इस पीठ का कार्य था धर्म जगत के रहस्यों को खोजना,अनसुलझे सवालों को हल करना, शायद आपको याद हो रामायण में जिस सिद्धाश्रम का विवरण है वो यही पीठ है. ये सारा संसार जानता है कि कौलान्तक पीठ का नाम लेते ही कम्कम्पी छूट जाती है क्योंकि वो बर्फीला हिमालय और कडकडाती ठण्ड हौसला पस्त करके रख देती है. इसी कौलान्तक पीठ में आज भी 33 करोड़ देवी देवता निवास करते हैं. आज भी तपस्या के लिए सिद्धक जन केवल कौलान्तक पीठ को ही प्रमुख और पवित्र मानते हैं. बहुत से लोग इस कौलान्तक पीठ को नीलखंड महाहिमालय उत्तराखंड आदि नामों से भी जानते हैं.

योगिनियों, किन्नरियों, अप्सराओं, गन्धर्वों, देवताओं, यक्ष-यक्षिणियों, जोगिनियों, भूतों सहित न जाने कितनी योनियां यहाँ गुप्त रूप और प्रकट रूप में निवास करती हैं. तान्करी भाषा के ग्रंथों में इस पीठ के विवरण भरे पड़े थे, लेकिन अफसोस की बात है कि उन ग्रंथों को केवल विदेशी आक्रमणकारियों ने नहीं बल्कि इसी देश के कुछ नासमझ लोगों ने भी जला जला कर समाप्त कर दिया. जादूगरी की दुनिया में कौलान्तक पीठ वो नाम था जहाँ से विश्व के अनेक जादूगर गुरु पैदा हुए थे.

तंत्र का इंद्रजालिक संसार देख कर होश ग़ुम हो जाते थे, हठयोगियों का ईश्वर विहीन साम्राज्य देखने का साहस हर किसी में नहीं था. यज्ञों की अनूठी परम्पराएँ, कर्मकांड का अनूठा संसार था कौलान्तक पीठ. शायद आप नहीं जानते कि जो पूजा पाठ आज आप कर रहे हैं उसे बनाने का श्री श्रेय भी कौलान्तक पीठ को ही जाता है. भले ही लोग आज इस बात को स्वीकार न करें लेकिन सत्य को प्रमाणों की आवश्यकता नहीं होती. कहावत थी कि गुरु जाए तो एकायामी-कौलान्तक जाए तो बहुआयामी अर्थात संसार के किसी भी गुरु के पास जाएँ तो वो केवल एक ही विषय में आपको परांगत बना सकता है, लेकिन कौलान्तक पीठ जा कर विद्या ग्रहण करें तो आप बहु आयामी हो सकते हैं.

कौलान्तक पीठ का एक भाग वाम मार्गियों का भी था, जिस कारण सारे सात्विक मार्गी घबराते थे. आज भी कौलान्तक पीठ की वाम मार्गी शाखा के प्रमुख उत्त्रान्चालाधिपति शंभर नाथ जी अवधूत हैं सात्विक मार्ग के महातपस्वी योगी परमहंस चिदानंद नाथ है. रजस मार्ग के सिद्ध प्रवर्तक आज हमारे बीच कौलान्तक पीठाधीश्वर महायोगी सत्येन्द्र नाथ जी के रूप में हैं. सबसे प्रसन्नता की बात कि हिमालय के महासिद्ध योगी योगिराज सिद्धसिद्धांत नाथ जी महाराज के ही शिष्य कौलान्तक पीठाधीश्वर महायोगी सत्येन्द्र नाथ जी को तीनो में से सर्वश्रेष्ठ कहा गया है.

केवल बातों में नहीं, सिद्ध साधनाओं हाथ साधनाओं के और तीनों शाखाओं के सार ज्ञान होने के कारण ही महायोगी सर्वश्रेष्ठ कहलाये, लेकिन ये अति दुखद पहलू है कि आज कौलान्तक पीठ का नामों निशाँ तक नहीं रहा है. कौलान्तक पीठ के नाम पर बची हैं कुछ प्राचीन पांडुलिपियाँ और महायोगी सत्येन्द्र नाथ जी महाराज.

पहले पहल महायोगी जी ने कौलान्तक पीठ को बचाने के लिए कई लोगों को जोड़ा, लेकिन यही लोग जल्द ही कुत्सित स्वार्थों के कारण महायोगी और पीठ के शत्रु बन गए. ये तो भला हो कि ऐसे लोग चुनिन्दा है, गिनाये जा सकते हैं केवल चार या पांच ही. सरकार की तरफ भी महायोगी जी ने निहारा पर बेकार. सन 2010 तक महायोगी जी ने सबसे मिन्नतें कर कर के इस पीठ और परम्पराओं के संरक्षण की बात कही लेकिन 2011 से महायोगी जी सीधे धर्म जगत के साधकों से जुड़ कर शाश्वत विद्याओं का प्रचार कर रहे हैं. साथ ही समस्या ये भी है कि आज की भाग दौड़ वाली जिंदगी में किसी के पास समय नहीं हैं लोग जटिल साधनाओं को समझ नहीं पाते.

लोग चाहते है धर्म के नाम पर बस थोड़ी देर भजन करें, नाचें, झूमें और धार्मिक मनोरंजन हो ज्यादा से ज्यादा कथा या प्रवचन हो जाए. हो सके तो साथ ही सुरक्षा की गारंटी कोई धर्म या धर्मगुरु दे दे, और कुछ नहीं. क्योंकि वो समझते हैं कि शायद इससे ज्यादा की आवश्यकता ही नहीं है. उनको धर्म की याद बुढ़ापे में मौत को देख कर ही आती है या फिर गंभीर बीमारी की दुःख की हालत में. ऊपर से इतने धर्म गुरु और इतने सारे ग्रन्थ कि क्या करें ये हम नहीं समझ पाते तो वो क्या समझेंगे?

इसलिए कौलान्तक पीठ को फिर अपने रूप में आने में समय तो लगेगा… लेकिन कौलान्तक पीठ अपने स्वरुप में फिर आएगा जरूर…. और ये सिलसिला शुरू हो चुका है…. महायोगी सत्येन्द्र नाथ जी के अद्भुत आश्रय में रहने वाले अनेक साधक एक जुट हो कर सनातन की सबसे पुरानी पीठ को तो जिन्दा कर ही रहे हैं साथ ही आत्मकल्याण और जीवन को सुखमय भी बना रहे हैं. मंत्र योग ज्योतिष तंत्र रसायन आयुर्वेद आदि विद्याओं का लाभ उठा कर जीवन के कष्टों को दूर कर सुखमय जीवन जी रहे हैं.

अब सबको समझ आने लगा है कि कौलान्तक पीठ क्यों इतना ज्यादा प्रचारित और पसंदीदा था. हर ओर बस कौलान्तक पीठ की ही लहर दौड़ रही है. ये सब आपके सहयोग से हुआ है. आज राष्ट्रीय ही नहीं अंतराष्ट्रीय स्तर पर कौलान्तक पीठ की चर्चा हो रही है.

कौलान्तक पीठ यानि के रहस्य पीठ…… तो देर किस बात की आइये जाने कौलान्तक पीठ के हर रहस्य को, जानें महायोगी सत्येन्द्र नाथ जी के अद्भुत ज्ञान को…. सीखें कुछ ऐसा जो जीवन की परिभाषा बदल दे…. जीवन जीने की नयी चाह जगा दे… जिंदगी को जीने का लक्ष्य दिखा दे…. तो बस जुड़े रहिये और जानते रहिये कौलान्तक पीठ को……

कौलान्तक पीठ -1 : रहस्यमय श्वेत वर्ण धारी सत्यस्वरूप शिवस्थली हिमालय

कौलान्तक पीठ -2 : हठयोगियों का गुप्त संसार, साधकों का स्वप्न स्थल

(साधकों तक अधिक से अधिक जानकारी पहुंचाने के उद्देश्य से ये लेख कौलान्तक पीठ की वेबसाइट से साभार लिया गया है)

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